Small Snakes: पटना हाई कोर्ट ने बिहार के सहरसा जिले में मिड-डे मील (PM POSHAN योजना) खाने के बाद 189 बच्चों के बीमार पड़ने के गंभीर मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है।
जनहित याचिका पर कोर्ट ने अपनाया कड़ा रुख
हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस मोहित कुमार शाह की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्कूल की थालियों में “छोटे सांप” (Small Snakes) मिलने की बात को रेखांकित करते हुए राज्य की प्रशासनिक और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
क्या है पूरा मामला? (The Mid-Day Meal Tragedy)
- घटना: यह घटना 7 मई 2026 को सहरसा जिले के बलुआहा और चंद्रयान गांवों के दो सरकारी स्कूलों में हुई थी, जहां मिड-डे मील का खाना खाने के बाद कुल 189 स्कूली बच्चे अचानक बीमार हो गए थे।
- फॉरेंसिक रिपोर्ट में सांप का जिक्र: कोर्ट ने 19 मई 2026 के अपने आदेश में एक फॉरेंसिक निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट रूप से दर्ज है कि बलुआहा गांव के सरकारी मिडिल स्कूल में बच्चों की भोजन की थालियों से “छोटे सांप” बरामद हुए थे।
जांच और फूड सैंपलिंग पर हाई कोर्ट के गंभीर सवाल
- हाई कोर्ट की पीठ ने इस मामले में खाद्य नमूनों (Food Samples) को एकत्र करने और उनकी जांच की पूरी प्रक्रिया में कई विसंगतियों (Discrepancies) और गड़बड़ियों को पकड़ा है।
- संदिग्ध सैंपलिंग प्रक्रिया: खाद्य सुरक्षा अधिकारी (Food Safety Officer) ने दावा किया था कि उन्होंने स्वतंत्र रूप से दाल और खिचड़ी के नमूने एकत्र किए और उन्हें कूरियर के जरिए अगमकुआं स्थित प्रयोगशाला में भेजा। कोर्ट ने इस कूरियर प्रक्रिया और अधिकारी के बयानों पर संदेह जताया है।
- लैब रिपोर्ट में विसंगति: अदालत ने नोट किया कि अधिकारी के दावों और प्रयोगशाला की रिपोर्ट में भारी अंतर है। जहां अधिकारी ने दाल-खिचड़ी भेजने की बात कही, वहीं लैब रिपोर्ट में उन नमूनों को केवल “दाल” और “सब्जियां” (Pulses and Vegetables) के रूप में वर्णित किया गया है।
- फॉरेंसिक लैब भेजने में देरी: कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि नमूनों को भागलपुर स्थित ‘क्षेत्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला’ (RFSL) भेजने में अनावश्यक देरी क्यों की गई।
हाई कोर्ट के कड़े निर्देश और एक्शन प्लान
- मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना हाई कोर्ट ने कड़े निर्देश जारी किए हैं।
- एसपी को व्यक्तिगत कमान: सहरसा के पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिया गया है कि वे इस मामले की जांच की व्यक्तिगत रूप से निगरानी (Personally Supervise) करें और मामले के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) का नेतृत्व खुद करें।
- जवाबदेही तय: कोर्ट ने सहरसा के एसपी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी और पीएम पोषण योजना के अधिकारियों को हलफनामा (Affidavit) दायर कर यह समझाने का निर्देश दिया है कि जब्ती, सैंपलिंग और प्रयोगशाला जांच की पूरी प्रक्रिया किस तरह संचालित की गई।
- एनजीओ (NGO) पर गाज: इन 144 स्कूलों में मिड-डे मील की आपूर्ति करने वाले एनजीओ ‘भारत रत्न डॉ. भीम राव अंबेडकर दलित उत्थान एवं शिक्षा समिति’ को मामले में एक प्रतिवादी (Respondent) के रूप में जोड़ा गया है। कोर्ट ने पीएम पोषण निदेशालय से कहा है कि वे समीक्षा करें कि क्या जांच चलने तक इस एनजीओ को काम जारी रखने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
केस मैट्रिक्स (Case Summary at a Glance)
| मुख्य विधिक एवं प्रशासनिक बिंदु | वर्तमान स्थिति और विवरण |
| अदालत | पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) |
| बीमार बच्चों की संख्या | सहरसा जिले के दो स्कूलों के 189 छात्र। |
| मुख्य विवाद | खाने की थाली में ‘छोटे सांप’ मिलना और फूड सेफ्टी ऑफिसर द्वारा संदिग्ध सैंपलिंग। |
| आपूर्तिकर्ता संस्था | भारत रत्न डॉ. भीम राव अंबेडकर दलित उत्थान एवं शिक्षा समिति (NGO)। |
| अगली अदालती सुनवाई | 2 जून 2026 |
निष्कर्ष (Analysis Summary)
यह मामला स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ हो रहे खिलवाड़ और जमीनी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही का एक भयावह उदाहरण है। ‘पीएम पोषण योजना’ जैसी महत्वाकांक्षी योजना में एनजीओ और खाद्य निरीक्षकों की साठगांठ या लापरवाही के कारण बच्चों की थाली तक सांप पहुंच जाना बेहद चिंताजनक है। पटना हाई कोर्ट द्वारा इस मामले को स्वतः गंभीरता से लेना और पुलिस कप्तान (SP) को सीधे एसआईटी (SIT) की कमान सौंपना यह सुनिश्चित करेगा कि स्थानीय स्तर पर साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके।

