Tuesday, October 6, 2026
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BCD Election: मामले में गंभीर गड़बड़ियां हैं…दिल्ली बार काउंसिल चुनाव की मतगणना अब डिविजन बेंच में, जानिए ऐसा क्यों किया गया

BCD Election: दिल्ली बार काउंसिल (BCD) के चुनावों की काउंटिंग और नतीजों को लेकर चल रहे सस्पेंस पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है।

पुराने स्टे ऑर्डर में कोई ढील या बदलाव नहीं करेंगे

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने साफ किया कि वे अपने पुराने स्टे ऑर्डर (Stay Order) में कोई ढील या बदलाव नहीं करेंगे। कोर्ट ने सभी पक्षों को राहत के लिए तुरंत दिल्ली हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मतपत्रों (Ballot Papers) की गिनती शुरू करने की मांग वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस पूरे चुनावी मामले में “बेहद गंभीर मुद्दे (Serious Issues)” और विसंगतियां हैं।

अदालत रूम का ड्रामा: सिर्फ काउंटिंग होने दीजिए, नतीजे रोक लीजिए

  • सुनवाई के दौरान बार काउंसिल और उम्मीदवारों के वकीलों ने कोर्ट को मनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन बेंच टस से मस नहीं हुई।
  • बार काउंसिल की दलील (Senior Advocate Vikas Singh): काउंसिल की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने बीच का रास्ता निकालते हुए मौखिक अनुरोध किया कि कोर्ट अंतिम नतीजे घोषित करने पर रोक जारी रखे, लेकिन कम से कम वोटों की गिनती (Counting of Votes) शुरू करने की अनुमति दे दे। उन्होंने दलील दी कि चुनाव कराने में काउंसिल पहले ही ₹5 करोड़ खर्च कर चुकी है और जस्टिस सुधांशु धूलिया कमेटी ने भी काउंटिंग जारी रखने की मंजूरी दी थी।
  • उम्मीदवारों के वकील की चिंता: उम्मीदवारों की तरफ से पेश महिला वकील ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने उनका पक्ष सुने बिना ही (Ex-parte) काउंटिंग पर रोक लगा दी थी। अब हालत यह है कि दिल्ली बार काउंसिल का ₹5 लाख प्रति दिन का खर्च आ रहा है और सबसे बड़ी बात— सारे बैलेट पेपर्स (मतपत्र) खुले पड़े हैं, जिससे सुरक्षा का बड़ा खतरा है।
  • CJI सूर्य कांत का कड़ा रुख: सीजेआई ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा, हम इसकी अनुमति बिल्कुल नहीं देंगे, इस मामले में कई गंभीर विसंगतियां हैं। कृपया जाकर हाई कोर्ट में अपनी बहस करें। हमारा आदेश केवल एक अंतरिम व्यवस्था (Transitional Order) है और हम यहां से कुछ भी ऐसा नहीं करना चाहते जिससे हाई कोर्ट की कार्यवाही प्रभावित (Prejudice) हो।

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हाई कोर्ट के समर वेकेशन को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का ‘फास्ट-ट्रैक’ निर्देश

  • जब उम्मीदवारों के वकील ने कोर्ट का ध्यान इस ओर खींचा कि 29 मई से दिल्ली हाई कोर्ट में गर्मियों की छुट्टियां (Summer Break) शुरू हो रही हैं, इसलिए मामले की तुरंत सुनवाई जरूरी है, तो सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत एक विशेष प्रशासनिक रास्ता निकाला।
  • डिवीजन बेंच को विशेष अनुरोध: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से विशेष अनुरोध किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इस केस को तुरंत आगामी सोमवार को ही हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (Division Bench) के सामने लिस्ट किया जाए।
  • अंतरिम राहत की स्वतंत्रता: सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों (उम्मीदवारों और काउंसिल) को यह खुली छूट (Liberty) दी है कि वे मतपत्रों की सुरक्षा या काउंटिंग से जुड़ी कोई भी अंतरिम राहत सीधे सोमवार को हाई कोर्ट से मांग सकते हैं।

मामले का मुख्य सारांश (Key Takeaways at a Glance)

मुख्य पहलूसुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का स्टैंड और आदेश
मूल विवाददिल्ली बार काउंसिल (BCD) चुनाव में कथित अनियमितताओं के कारण काउंटिंग पर लगा स्टे।
काउन्सिल का नुकसानचुनाव में अब तक ₹5 करोड़ खर्च हो चुके हैं और प्रतिदिन ₹5 लाख का प्रशासनिक नुकसान हो रहा है।
सुरक्षा का सवालकोर्ट में यह गंभीर बात सामने आई कि मतदाताओं के बैलेट पेपर्स फिलहाल असुरक्षित और खुले पड़े हैं।
अंतिम निर्णयसुप्रीम कोर्ट ने आदेश में बदलाव से मना किया, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट को सोमवार को ही अर्जेंट सुनवाई करने का आदेश दिया।

निष्कर्ष (Analysis Summary)

यह आदेश दिखाता है कि सुप्रीम कोर्ट चुनावों की शुचिता (Integrity) को लेकर कितना गंभीर है। भले ही ₹5 करोड़ खर्च हो चुके हों या रोजाना ₹5 लाख का नुकसान हो रहा हो, अगर अदालत को लगता है कि चुनावी प्रक्रिया में “गंभीर गड़बड़ियां” हैं, तो वह प्रक्रिया को आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दे सकती। सुप्रीम कोर्ट ने खुद इस मामले में दखल न देकर दिल्ली हाई कोर्ट को जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि स्थानीय स्तर पर सभी तथ्यों की जांच कर दूध का दूध और पानी का पानी किया जा सके। सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने होने वाली सुनवाई अब इस चुनाव का भविष्य तय करेगी।

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