Friday, May 22, 2026
HomeLaw Firms & Assoc.Virtual Hearings: ईंधन बचाने को ऑनलाइन कोर्ट की मांग…सुप्रीम सलाह- न्यायिक आदेश...

Virtual Hearings: ईंधन बचाने को ऑनलाइन कोर्ट की मांग…सुप्रीम सलाह- न्यायिक आदेश देना ठीक नहीं, अनुरोध तो कर ही चुके हैं, पढ़िए मामला

Virtual Hearings: सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों को पूरी तरह ऑनलाइन/वर्चुअल मोड में चलाने की मांग पर अपना रुख स्पष्ट किया है।

प्रशासनिक स्तर पर पहले ही अनुरोध हो चुका है

पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संकट और ईंधन संरक्षण (Fuel Conservation) की राष्ट्रीय चिंताओं के बीच, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत ने साफ कहा कि सभी अदालतों में वर्चुअल हियरिंग (Virtual Hearings) अनिवार्य करने के लिए ‘न्यायिक आदेश’ (Judicial Directions) जारी करना उचित नहीं होगा। सीजेआई ने खुलासा किया कि वे प्रशासनिक स्तर पर पहले ही सभी राज्यों के हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से जिला अदालतों (District Courts) समेत सभी स्तरों पर वर्चुअल हियरिंग की अनुमति देने का अनुरोध कर चुके हैं।

Also Read; Court Appearance: सोमवार व शुक्रवार को ऑनलाइन के साथ-साथ फिजिकल अपीयरेंस भी…सुप्रीम कोर्ट में जिरह पर जाने से पहले ध्यान दें

यह बार और बेंच का स्वैच्छिक प्रयास होना चाहिए

  • एक महिला वकील ने जब दिल्ली की सभी जिला अदालतों में ईंधन की खपत को कम करने और “राष्ट्रहित” (National Interest) का हवाला देते हुए वर्चुअल हियरिंग अनिवार्य करने की याचिका पर जल्द सुनवाई (Urgent Listing) की मांग की, तो सीजेआई सूर्या कांत ने इसे न्यायिक दायरे (Judicial Side) में लेने से इनकार किया।
  • प्रशासनिक अनुरोध पहले ही जारी: सीजेआई ने बताया, मैंने पहले ही सभी मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) से अनुरोध किया है। अधिकांश ने इसे लागू भी कर दिया है।
  • स्वैच्छिक भागीदारी जरूरी: कोर्ट का मानना है कि इसे किसी अदालती आदेश के जरिए थोपा नहीं जा सकता, बल्कि यह बार (Woke/Advocates) और बेंच (Judges) दोनों के द्वारा स्वैच्छिक (Voluntary Exercise) रूप से अपनाया जाना चाहिए।
  • हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं: सीजेआई ने स्पष्ट किया कि देश की सभी जिला अदालतें (District Courts) सीधे संबंधित हाई कोर्ट के प्रशासनिक नियंत्रण (Administrative Control) में आती हैं। इसलिए, यह फैसला हाई कोर्ट को ही लेने देना चाहिए। हालांकि, सीजेआई ने पत्र लिखकर जिला अदालतों के लिए भी विशेष अनुरोध किया है।

पृष्ठभूमि: पश्चिम एशिया संकट और सुप्रीम कोर्ट के अपने कदम

  • यह पूरा मामला वैश्विक और राष्ट्रीय परिस्थितियों से जुड़ा हुआ है।
  • ईंधन संरक्षण (Fuel Conservation): अमेरिका-इरान संघर्ष (US-Iran Conflict) के बाद पश्चिम एशिया में उपजे संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने ईंधन बचाने के कई उपाय लागू किए हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट की अपनी पहल: इसी के तहत सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने प्रशासनिक स्तर पर कुछ ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। कोर्ट ने मिसलेनियस वर्किंग डेज (सोमवार और शुक्रवार) और आंशिक कार्य दिवसों (Partial Working Days) पर कुछ श्रेणियों के मामलों के लिए अनिवार्य वर्चुअल हियरिंग की शुरुआत की थी।
  • वकीलों के विरोध के बाद ढील: हालांकि, बाद में बार काउंसिल और वकीलों की आपत्तियों और व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्टीकरण जारी किया। इसमें कहा गया कि वकीलों को वर्चुअल जुड़ने के लिए प्रोत्साहित (Encourage) तो किया जाएगा, लेकिन जो किसी अपरिहार्य कारण (Unavoidable reasons) से ऑनलाइन नहीं आ सकते, वे फिजिकल (Physical Court) में भी पेश हो सकते हैं।

मामले का अंतिम निष्कर्ष (The Takeaway at a Glance)

मुख्य विधिक और प्रशासनिक पहलूसुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख
मूल मांगईंधन की बचत के लिए दिल्ली की सभी जिला अदालतों में अनिवार्य वर्चुअल सुनवाई हो।
CJI का रुखइस मामले को न्यायिक आदेश (Judicial Order) के जरिए तय करना गलत परंपरा होगी।
जिला अदालतों का डोमेनजिला अदालतें सीधे हाई कोर्ट के अधीन हैं, सुप्रीम कोर्ट उनके रोस्टर या प्रशासनिक निर्णयों में सीधे दखल नहीं देगा।
वर्तमान स्थितियह एक स्वैच्छिक व्यवस्था (Voluntary System) बनी रहेगी, जिसे धीरे-धीरे तकनीक के माध्यम से बढ़ावा दिया जा रहा है।

निष्कर्ष (Analysis Summary)

यह फैसला न्यायपालिका के भीतर शक्तियों के पृथक्करण (Separation of Powers) और हाई कोर्ट्स की प्रशासनिक स्वतंत्रता (Administrative Independence of High Courts) का सम्मान करता है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि भले ही ईंधन बचाना या पर्यावरण संरक्षण एक बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा हो, लेकिन इसके नाम पर सुप्रीम कोर्ट देश की सभी निचली अदालतों पर कोई आदेश थोप नहीं सकता। डिजिटल कोर्टरूम को बढ़ावा देने का सबसे सही तरीका ‘प्रशासनिक संवाद’ और ‘स्वैच्छिक इच्छाशक्ति’ है, न कि कोई न्यायिक डिक्री।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
haze
36 ° C
36 °
36 °
63 %
5.1kmh
0 %
Fri
44 °
Sat
47 °
Sun
46 °
Mon
45 °
Tue
41 °

Recent Comments