Tuesday, October 6, 2026
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Bar Action: दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता कर रहे हैं हड़ताल…समझिए इसके पीछे की क्या है वजह, घटनाक्रम के नजरिए से पढ़ें यह मामला

Bar Action: दिल्ली हाई कोर्ट बनाम डिस्ट्रिक्ट कोर्ट (जिला अदालत) के वकीलों के बीच कानूनी और प्रशासनिक टकराव तेज हो गया है।

25 मई 2026 से काम का बहिष्कार करने का ऐलान

सिविल मुकदमों की सुनवाई के आर्थिक अधिकार यानी ‘पेक्यूनियरी ज्यूरिस्डिक्शन’ (Pecuniary Jurisdiction- आर्थिक क्षेत्राधिकार) को बढ़ाने के प्रस्ताव पर
के विरोध में दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने सोमवार (25 मई 2026) को काम का बहिष्कार करने (Abstain from work) का एलान किया है। यह विवाद जिला अदालतों के आर्थिक क्षेत्राधिकार की सीमा को वर्तमान ₹2 करोड़ से बढ़ाकर सीधे ₹20 करोड़ करने के प्रस्ताव से जुड़ा है।

समझिए ‘पेक्यूनियरी ज्यूरिस्डिक्शन’ और क्यों हो रहा है विवाद?

सरल शब्दों में ‘पेक्यूनियरी ज्यूरिस्डिक्शन’ का मतलब उस अधिकतम मौद्रिक मूल्य (Monetary Value) से है, जिसके तहत कोई अदालत किसी दीवानी (Civil) या कमर्शियल मुकदमे को सुन सकती है। दिल्ली में वर्तमान नियम के अनुसार, ₹2 करोड़ तक के सिविल केस जिला अदालतों में जाते हैं, और ₹2 करोड़ से ऊपर के सभी बड़े और वीआईपी केस सीधे दिल्ली हाई कोर्ट के मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction) में सुने जाते हैं।

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अगर सीमा ₹20 करोड़ होती है तो क्या होगा?

  • यदि यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो ₹2 करोड़ से लेकर ₹20 करोड़ तक के हजारों बड़े मुकदमों और कॉरपोरेट विवादों की सुनवाई हाई कोर्ट से छिनकर दिल्ली की जिला अदालतों (जैसे तीस हजारी, पटियाला हाउस, साकेत आदि) में ट्रांसफर हो जाएगी।
  • वकीलों के हितों का टकराव: यही कारण है कि जिला अदालतों के वकील इसका पुरजोर समर्थन कर रहे हैं (क्योंकि उनका काम और मुकदमों की संख्या बढ़ेगी), जबकि हाई कोर्ट के वकील इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं क्योंकि इससे हाई कोर्ट में आने वाले सिविल मुकदमों की संख्या में भारी कमी आएगी।

टकराव की क्रोनोलॉजी: जिला अदालत बनाम हाई कोर्ट बार

  • इस पूरे विवाद की शुरुआत और मौजूदा स्थिति को समझने के लिए इसकी टाइमलाइन को देखना जरूरी है।
  • 23 मई 2025: ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स बार एसोसिएशन की समन्वय समिति (Coordination Committee) ने केंद्रीय कानून मंत्रालय को एक पत्र लिखकर मांग की थी कि जिला अदालतों की आर्थिक सुनवाई का दायरा बढ़ाया जाए।
  • 2 सितंबर 2025: इस पत्र का संज्ञान लेते हुए दिल्ली हाई कोर्ट की ‘फुल कोर्ट मीट’ (Full Court Meeting) ने इस विषय पर सभी पक्षों (Stakeholders) से बात करने और अध्ययन करने के लिए 6 वरिष्ठ जजों की एक समिति का गठन किया।
  • जजों की समिति में शामिल नाम: इस छह सदस्यीय समिति में जस्टिस वी. कामेश्वर राव, जस्टिस एन. डब्ल्यू. साम्ब्रे, जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा, जस्टिस विवेक चौधरी, जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस नवीन चावला शामिल हैं।
  • 21 मई 2026 (गुरुवार): इस प्रस्ताव के समर्थन में दिल्ली की सभी जिला अदालतों (Trial Courts) के वकीलों ने काम का बहिष्कार किया था।
  • 22 मई 2026 (शुक्रवार): इसके ठीक अगले दिन, प्रस्ताव के विरोध में दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) की कार्यकारी समिति ने प्रस्ताव पारित कर सोमवार (25 मई) को हड़ताल (काम से अलग रहने) का फैसला किया।

हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) की आपत्तियां क्या हैं?

  • DHCBA ने हाई कोर्ट के जजों की समिति की कार्यवाही को तुरंत रोकने (In Abeyance) की मांग की है। इसके पीछे उन्होंने कई दलीलें दी हैं।
  • अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) का अभाव: बार एसोसिएशन का तर्क है कि अदालतों के आर्थिक क्षेत्राधिकार में बदलाव करना पूरी तरह से विधायिका (Legislative Domain – संसद/सरकार) का काम है। हाई कोर्ट के पास अपनी तरफ से ऐसी प्रक्रिया शुरू करने या इसके लिए कमेटी बनाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
  • बिना रेफरल के संज्ञान क्यों?: DHCBA का कहना है कि जिला अदालतों का मूल पत्र केंद्रीय कानून मंत्रालय को संबोधित था, न कि हाई कोर्ट को। जब कानून मंत्रालय ने इस मुद्दे पर हाई कोर्ट से कोई टिप्पणी या राय मांगी ही नहीं, तो फुल कोर्ट ने स्वतः इस पर विचार क्यों शुरू किया?
  • दस्तावेजों की मांग: एसोसिएशन ने मांग की है कि इस संबंध में मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) द्वारा की गई सिफारिशों, एजेंडा नोट्स और कमेटी के गठन से जुड़े सभी प्रस्तावों की प्रतियां उनके सामने और फुल कोर्ट के समक्ष पुनर्विचार के लिए रखी जाएं ताकि वे अपनी चिंताएं दर्ज करा सकें।

मामले का संक्षिप्त विवरण (Case Matrix at a Glance)

विवाद का बिंदुवर्तमान स्थिति और प्रस्तावित बदलाव
वर्तमान आर्थिक सीमा₹2 करोड़ (₹2 करोड़ से ऊपर के केस दिल्ली हाई कोर्ट जाते हैं)।
प्रस्तावित आर्थिक सीमा₹20 करोड़ (यानी ₹20 करोड़ तक के केस जिला अदालतों में ही सुने जाएंगे)।
समर्थन में कौन हैं?जिला अदालतों के वकील (ट्रायल कोर्ट बार – इन्होंने 21 मई को हड़ताल की)।
विरोध में कौन हैं?दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA – ये 25 मई को कार्य बहिष्कार कर रहे हैं)।
हाई कोर्ट का स्टैंड6 जजों की समिति मामले का अध्ययन और स्टेकहोल्डर्स से चर्चा कर रही है।

निष्कर्ष (Analysis Summary)

दिल्ली में आर्थिक क्षेत्राधिकार को बढ़ाने का मुद्दा नया नहीं है, इससे पहले भी कई बार इस सीमा में बदलाव किए जा चुके हैं। हाई कोर्ट बार एसोसिएशन का मुख्य प्रशासनिक तर्क यह है कि इस प्रक्रिया की शुरुआत नीतिगत रूप से कानून मंत्रालय की तरफ से होनी चाहिए, न कि न्यायपालिका की तरफ से। बहरहाल, सोमवार (25 मई) को हाई कोर्ट में होने वाले इस कार्य बहिष्कार के कारण आम मुवक्किलों और अदालती कामकाज पर असर पड़ना तय है, और अब देखना यह होगा कि छह जजों की यह समिति दोनों बार एसोसिएशनों के हितों और दलीलों के बीच कैसे संतुलन बिठाती है।

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