Wednesday, July 22, 2026
HomeScam NoseTitle Case: फिर तो हाई कोर्ट की इमारत भी सुरक्षित नहीं है..आपकी...

Title Case: फिर तो हाई कोर्ट की इमारत भी सुरक्षित नहीं है..आपकी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी! आप पुलिस क्वार्टर ही बेच खा रहे हैं?, पढ़िए यह केस

Title Case: कर्नाटक हाई कोर्ट ने बेंगलुरु में पुलिस क्वार्टर्स की जमीन को एक निजी पक्ष द्वारा बेचे जाने के मामले की सुनवाई की।

पिछले 15 सालों से वहां पुलिसकर्मी अपने परिवारों के साथ रह रहे हैं

हाई कोर्ट के जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि अगर इस तरह के दावों को हवा दी गई, तो कल को कोई आकर कह देगा कि हाई कोर्ट की यह ऐतिहासिक इमारत भी उसी की है। अपने तल्ख और हैरान करने वाली टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट जज ने कहा, आपकी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी! आप पुलिस क्वार्टर ही बेच खा रहे हैं? पिछले 15 सालों से वहां पुलिसकर्मी अपने परिवारों के साथ रह रहे हैं और आप उस जमीन पर अपना दावा ठोक रहे हैं!

क्या है पूरा मामला? (पुलिस की नाक के नीचे ‘खेला’)

जमीन की रजिस्ट्री और बिक्री: यह पूरा विवाद बेंगलुरु के एक इलाके में स्थित पुलिस क्वार्टर्स (Police Quarters) की बेशकीमती जमीन से जुड़ा है।
शिवमोग्गा के रहने वाले श्रीनाथ नगरगद्दे (Srinath Nagaragadde) नाम के एक व्यक्ति पर आरोप है कि उसने बेंगलुरु की उस जमीन का सौदा (Sale Agreement) कुछ लोगों के साथ कर लिया, जिस पर दशकों से पुलिस क्वार्टर बने हुए हैं। इस धोखाधड़ी को लेकर उसके खिलाफ एक क्रिमिनल केस दर्ज है।

आरोपी की दलील, पुलिस के पास कोई कागज नहीं: आरोपी श्रीनाथ ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही को रद्द कराने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। आरोपी के वकील (वरिष्ठ अधिवक्ता एम. अरुण श्याम) ने कोर्ट में दलील दी कि 1950 के दशक से लेकर अब तक के सभी लैंड रिकॉर्ड्स और एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC – भारमुक्ति प्रमाण पत्र) उनके पूर्वजों और मुख्य आरोपी (एम.आर. महालक्ष्मी) के नाम पर हैं। वकील ने चुनौती दी कि अगर सरकार या पुलिस विभाग इस जमीन का एक भी मालिकाना दस्तावेज (Ownership Document) दिखा दे, तो वे अपना केस तुरंत वापस ले लेंगे।

पुलिस का दावा, ‘1930 से हमारा कब्जा’: दूसरी तरफ, राज्य सरकार के अतिरिक्त विशेष लोक अभियोजक (Special PP) बी.एन. जगदीशा ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस जमीन पर साल 1930 से ही पुलिस महकमे का कब्जा है और बाद में यहां पुलिसकर्मियों के रहने के लिए बकायदा सरकारी क्वार्टर बनाए गए थे।

हाई कोर्ट का कड़ा रुख…आपकी हिम्मत की दाद देनी पड़ेगी

हाई कोर्ट की सुरक्षा पर सवाल: जस्टिस एम. नागप्रसन्ना आरोपी के इन दावों और दलीलों से बिल्कुल सहमत नहीं दिखे। उन्होंने मामले पर तीखी और व्यावहारिक टिप्पणियां कीं। जब आरोपी के वकील ने कहा कि पुलिस का इस जमीन पर कब्जा पूरी तरह अनाधिकृत (Unauthorised) है, तो जज ने कहा, “यही तो मैं कह रहा हूं, अगर इस तरह की चीजों की अनुमति दी गई, तो यह (हाई कोर्ट) इमारत भी सुरक्षित नहीं है। कल को कोई आकर इस पर भी दावा ठोक देगा।

जांच में दखल देने से इनकार: कोर्ट ने साफ किया कि चूंकि यह मामला सीधे तौर पर पुलिस क्वार्टर को बेचने के संगीन अपराध से जुड़ा है और इसकी पुलिस जांच (Investigation) अभी चल रही है, इसलिए इसे बीच में नहीं रोका जा सकता।

वकील की गुहार: वेंडर को छोड़, खरीदारों को बनाया बलि का बकरा

आरोपी के वकील ने कोर्ट के सामने यह भी दलील दी कि पुलिस इस मामले में भेदभाव कर रही है। उनका कहना था कि जिस मुख्य भूस्वामी (Vendor) ने जमीन का मालिकाना हक होने का दावा करके एग्रीमेंट किया, पुलिस ने उसे तो अब तक पकड़ा नहीं है, लेकिन जिन लोगों ने जमीन खरीदने के लिए एग्रीमेंट (Agreement Holders) किए थे, उन्हें दूसरी पुलिस स्टेशन से टीम भेजकर गिरफ्तार करवा दिया गया।

विश्लेषण: सरकारी और पुलिसिया जमीनों पर कब्जे का खेल

यह मामला इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे भू-माफिया सरकारी संपत्तियों के पुराने और उलझे हुए लैंड रिकॉर्ड्स का फायदा उठाकर उनकी फर्जी खरीद-फरोख्त का जाल बुनते हैं

पक्षमुख्य दलीलजमीन की वर्तमान स्थिति
निजी पक्ष (आरोपी)1950 से सारे राजस्व रिकॉर्ड (Land Records) हमारे नाम हैं। पुलिस के पास मालिकाना हक का कोई ठोस कागज नहीं है।केवल कागजों पर सेल एग्रीमेंट (बिक्री का समझौता) किया गया।
पुलिस विभाग / सरकार1930 से जमीन पर भौतिक कब्जा (Physical Possession) है। पिछले 15+ सालों से यहां पुलिसकर्मी रह रहे हैं।जमीन पर बकायदा सरकारी क्वार्टर निर्मित हैं और पुलिस परिवार वहां निवास कर रहे हैं।

बॉटमलाइन (The Bottom Line)

कर्नाटक हाई कोर्ट की यह टिप्पणी देश के रियल एस्टेट और क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की एक कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। जब भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो जाएं कि वे खाकी वर्दी वालों के ही आशियाने (पुलिस क्वार्टर) को कागजों पर बेच डालें, तो आम नागरिक की जमीन की सुरक्षा भगवान भरोसे ही है। हाई कोर्ट ने इस मामले को आगे की मेरिट (गुण-दोष) पर परखने के लिए अगली सुनवाई 9 जून 2026 को तय की है, जहां आरोपी को यह साबित करना होगा कि उसने कानून का उल्लंघन नहीं किया है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
27 ° C
27 °
27 °
84 %
5kmh
98 %
Wed
33 °
Thu
33 °
Fri
32 °
Sat
35 °
Sun
36 °