Thursday, October 29, 2026
HomeDelhi High CourtBlaming Judge: जज को हत्यारा कहना अदालत को बदनाम करने की कोशिश…...

Blaming Judge: जज को हत्यारा कहना अदालत को बदनाम करने की कोशिश… साकेत बिल्डिंग हादसे वाले वीडियो पर क्यों दिया आदेश, कारण जानें

Blaming Judge: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जजों के खिलाफ बढ़ते आपत्तिजनक और अपमानजनक अभियानों पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

हाईकोर्ट के जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान यह भी संकेत दिया कि वे इन वीडियो को अपलोड करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स को पूरी तरह से ब्लॉक (Block) करने पर विचार कर सकती हैं। अदालत ने उन सभी वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट्स को तुरंत इंटरनेट से हटाने (Remove) का आदेश दिया है, जिनमें हाई कोर्ट के एक मौजूदा जज को “हत्यारा” कहा गया था और उन पर साकेत में हुए एक बिल्डिंग हादसे का दोष मढ़ा गया था।

अदालत ने सोशल मीडिया की बेलगाम ताकत पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, वीडियो में दिए गए बयान रत्ती भर भी वास्तविक नहीं हैं, बल्कि यह अदालत को बदनाम (Scandalise) करने की एक सोची-समझी कोशिश है। सोशल मीडिया आज बेहद शक्तिशाली हो चुका है। क्या हम इन प्लेटफॉर्म्स (Intermediaries) पर भी कोई जिम्मेदारी तय कर सकते हैं? जब आपको इतनी बेतुकी बातों का पता चलता है, तो आप खुद (Suo Motu) इन्हें क्यों नहीं हटाते?

क्या था साकेत बिल्डिंग हादसा और विवाद?

यह पूरा मामला 30 मई 2026 को साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक इमारत के ढहने से जुड़ा है, जिसमें 6 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी।

डॉ. कपिल कक्कड़ के आरोप: मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. कपिल कक्कड़ ने यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (Twitter) और लिंक्डइन पर वीडियो की एक सीरीज पोस्ट की। इन वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि इस हादसे के जिम्मेदार सीधे तौर पर हाई कोर्ट के एक सिटिंग जज हैं।

भ्रष्टाचार का झूठा दावा: कक्कड़ ने दावा किया कि नगर निगम अधिकारियों के साथ कथित भ्रष्ट साठगांठ के चलते उक्त जज ने इस अवैध निर्माण को रोकने वाली एक याचिका को खारिज कर दिया था।

बार एसोसिएशन (DHCBA) का खंडन: दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने कोर्ट को बताया कि कक्कड़ का दावा पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत है। जज ने याचिका खारिज नहीं की थी, बल्कि याचिकाकर्ता ने खुद अपनी अर्जी वापस (Withdraw) ली थी क्योंकि उन्होंने संपत्ति के मालिक को मामले में पक्षकार (Party) ही नहीं बनाया था। कोर्ट ने उन्हें नए सिरे से याचिका दायर करने की छूट दी थी।

जज हत्यारा है, जनता न्याय के खिलाफ खड़ी हो: कक्कड़ के आपत्तिजनक बयान

बार एसोसिएशन द्वारा दायर आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) याचिका में डॉ. कक्कड़ के वीडियो के कई बयानों को रिकॉर्ड पर रखा गया, जिसमें उन्होंने जज को सरेआम “हत्यारा” करार दिया। न्यायपालिका में व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। नागरिकों से आह्वान किया कि वे “इस तरह के अन्याय के खिलाफ खड़े हों (Rise Against Injustice)”। इतना ही नहीं, कोर्ट में यह भी बताया गया कि कक्कड़ यहीं नहीं रुके; उन्होंने 4 और 5 जून को नए वीडियो अपलोड कर उक्त जज को आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) से जुड़े एक अन्य दीवानी विवाद से जोड़ दिया और जजों व कॉर्पोरेट घरानों के बीच भ्रष्ट संबंधों के आरोप मढ़ दिए।

विश्लेषण: अदालत में पक्षकारों की दलीलें और कानूनी स्टैंड

हाई कोर्ट ने माना कि इस तरह की घटनाएं अब बहुत नियमित और बार-बार सामने आने लगी हैं, इसलिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को खुद सक्रिय (Proactive) होना पड़ेगा।

अदालत में उपस्थित पक्षमुख्य दलीलें और कोर्ट का रुख
DHCBA (बार एसोसिएशन)प्रेसिडेंट और सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन ने कहा कि वीडियो की भाषा अत्यंत आपत्तिजनक (Scurrilous) है। इसे अपलोड करने वाले और बढ़ावा देने वाले प्लेटफॉर्म्स दोनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
केंद्र सरकार (Central Govt)एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने बार एसोसिएशन की दलीलों का पूरा समर्थन किया और कहा कि इस तरह की सामग्री को इंटरनेट पर एक पल भी रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
दिल्ली हाई कोर्ट बेंचकोर्ट ने वीडियो हटाने के निर्देश जारी करते हुए डॉ. कपिल कक्कड़ के खिलाफ अपराधिक अवमानना का नोटिस (Notice on Criminal Contempt) जारी कर दिया है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
25.5 ° C
25.5 °
25.5 °
70 %
2kmh
100 %
Wed
25 °
Thu
23 °
Fri
22 °
Sat
28 °
Sun
29 °

Recent Comments