Wednesday, September 9, 2026
HomeLatest NewsCBSE 12th: शिक्षा का राजनीतिकरण न करें…सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद...

CBSE 12th: शिक्षा का राजनीतिकरण न करें…सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद पर यह टिप्पणी क्यों की गई, पीआईएल से समझिए

CBSE 12th: सीबीएसई (CBSE) कक्षा 12 वीं के परीक्षा परिणामों के मूल्यांकन में कथित तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर कानूनी विवाद गहरा गया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट की जस्टिस नीना बंसल कृष्णा और जस्टिस मधु जैन की खंडपीठ ने यह नोटिस तब जारी किया, जब सीबीएसई ने इस याचिका को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताते हुए इसका कड़ा विरोध किया।

Also Read; CBSE 12th: कांपियों की फिजिकल जांच कराई जाए…ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में है गड़बड़झाला, NSUI की याचिका में और बातें हैं, पढ़कर पता चलेगा

क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद?

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ द्वारा दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली—ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) में इस साल बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और तकनीकी विफलताएं (Systemic Flaws) देखी गई हैं, जिससे देश भर के लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया है।

कापियां धुंधली और पन्ने गायब: परिणाम घोषित होने के बाद छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने शिकायत की है कि वेबसाइट पर अपलोड की गई स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं धुंधली (Blurred) हैं, कई कापियों के पन्ने गायब हैं, और कुछ मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं का मिलान (Mismatch) भी गलत हुआ है।

अचानक बेहद कम अंक: इन तकनीकी गड़बड़ियों के कारण कई मेधावी छात्रों को उम्मीद से बेहद कम अंक मिले हैं।

3.8 लाख से अधिक कापियों पर शिकायत: याचिका में दावा किया गया है कि परिणाम आने के शॉर्ट नोटिस के भीतर ही 387399 स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित लगभग 127146 आवेदन (शिकायतें) दर्ज की गई थीं, जो यह साबित करता है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं बल्कि पूरी प्रणाली की विफलता है।

कोर्ट रूम ड्रामा: “शिक्षा पर राजनीति” बनाम “एबीवीपी का उदाहरण”

सुनवाई के दौरान सीबीएसई और एनएसयूआई के वकीलों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

CBSE का पक्ष (शिक्षा का राजनीतिकरण न हो): सीबीएसई की ओर से पेश अधिवक्ता एम. ए. नियाज़ी ने याचिका की विचारणीयता (Maintainability) पर सवाल उठाते हुए कहा, “याचिकाकर्ता एक राजनीतिक दल (कांग्रेस) का छात्र विंग है। हम नहीं चाहते कि शिक्षा का इस तरह राजनीतिकरण किया जाए। यह एक जनहित याचिका है, इसमें कोई आपातकालीन स्थिति (Urgency) नहीं है।” बोर्ड ने यह भी तर्क दिया कि उन्होंने छात्रों की सुविधा के लिए री-इवैल्यूएशन पोर्टल की समयसीमा पहले ही कई बार बढ़ाई है।

NSUI का पलटवार (ABVP की याचिका का हवाला): एनएसयूआई के वकील मोहम्मद अली खान ने सीबीएसई के दावों को खारिज करते हुए अदालत को याद दिलाया कि हाल ही में ऐसी ही परिस्थितियों में भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी (ABVP) द्वारा दायर याचिका पर भी अदालत ने सुनवाई की थी। उन्होंने कहा, “हम एक ५५ साल पुराना संगठन हैं। इस मुद्दे से प्रभावित होने वाले छात्र नाबालिग (Minors) हैं और हम उनकी आवाज उठा रहे हैं।”

विश्लेषण: याचिका में छात्रों के लिए मांगी गई मुख्य राहतें

चूंकि कक्षा 12 वीं के अंक विश्वविद्यालयों में दाखिले, स्कॉलरशिप और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए एनएसयूआई ने वकीलों ऋषव रंजन और अजय छिकारा के माध्यम से कोर्ट से निम्नलिखित मांगें की हैं।

मांगी गई मुख्य राहतेंउद्देश्य और व्यावहारिक प्रभाव
मुआवजा अंक (Compensatory Marks)जिन छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं गायब हैं, धुंधली हैं या गलत तरीके से जांची गई हैं, उन्हें मुआवजा अंक दिए जाएं।
स्वतंत्र जांच (Independent Inquiry)ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम की खामियों और ग्रीवांस रेड्रेसल पोर्टल की विफलताओं की एक स्वतंत्र कमेटी से जांच हो।
फिजिकल री-चेकिंग (Manual Verification)डिजिटल स्कैनिंग पर विवाद होने की स्थिति में छात्रों को मूल उत्तर पुस्तिका (Physical Copy) दिखाकर मैन्युअल चेकिंग की अनुमति मिले।
पोर्टल १ महीना और खुला रहेरी-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन पोर्टल को एक अतिरिक्त महीने के लिए खोला जाए ताकि प्रभावित छात्र आवेदन कर सकें।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
light rain
30 ° C
30 °
30 °
84 %
2.1kmh
100 %
Tue
30 °
Wed
34 °
Thu
34 °
Fri
34 °
Sat
34 °

Recent Comments