Khan Sir Legal Battle: पटना के मशहूर कोचिंग संचालक और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजल खान उर्फ ‘खान सर’ की पैरवी अधिवक्ता अरविंद कुमार मव्वार कर रहे हैं।
दरअसल, जून 2026 की शुरुआत में पटना के मुसल्लाहपुर हाट इलाके में कोचिंग प्रतिद्वंद्विता (Rivalry) को लेकर भारी बवाल और फायरिंग हुई, तो खान सर पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही थी। ऐसे में अरविंद कुमार मव्वार ने पटना जिला अदालत के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज के सामने दमदार पैरवी की और खान सर को अंतरिम राहत (Interim Protection/Stay on Arrest) दिलाई।
कौन हैं अरविंद कुमार मव्वार? (Profile & Background)
अधिवक्ता अरविंद कुमार मव्वार पटना के कानूनी हलकों में एक जाना-माना और बेहद भरोसेमंद नाम हैं। खान सर के केस ने भले ही उन्हें राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में ला दिया हो, लेकिन वे पिछले दो दशकों से बिहार की अदालतों में सक्रिय हैं।
शिक्षा: उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा पटना के ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित पटना कॉलेजिएट स्कूल (Patna Collegiate School) से पूरी की। इसके बाद उन्होंने अपनी एलएलबी (LLB) की डिग्री हासिल की।
अनुभव: मव्वार के पास पटना हाई कोर्ट और विभिन्न जिला व सत्र अदालतों (District & Sessions Courts) में 20 से अधिक वर्षों (2002 से सक्रिय) का लंबा व वकालत का गहरा अनुभव है।
कार्यशैली: पटना सिविल कोर्ट के वकीलों के अनुसार, मव्वार केवल बड़े कानूनी सिद्धांतों पर हवा में बात नहीं करते, बल्कि केस की केस-डायरी और तकनीकी साक्ष्यों (जैसे सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट) का बारीक अध्ययन करते हैं। उनकी इसी ‘थोरॉ अप्रोच’ (Thorough Approach) के कारण उन्हें क्रिमिनल डिफेंस में बेहद कारगर माना जाता है।
उनकी कानूनी विशेषज्ञता (Areas of Expertise)
अरविंद कुमार मव्वार को मुख्य रूप से आपराधिक मामलों के बचाव (Criminal Defence) में महारत हासिल है। वे विशेष रूप से निम्नलिखित मामलों को संभालने के लिए जाने जाते हैं, इनमें अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) और नियमित जमानत (Regular Bail) के पेचीदा मामले, आर्म्स एक्ट (Arms Act) और गंभीर आपराधिक धाराओं से जुड़े मुकदमे।इसके अलावा, वे दीवानी (Civil Litigation), संपत्ति विवाद (Property Disputes) और पारिवारिक मामलों में भी स्वतंत्र रूप से वकालत करते हैं।
खान सर मामले में मव्वार के मुख्य तर्क क्या थे?
2 जून 2026 को खान सर के ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ और प्रतिद्वंद्वी ‘ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी’ के बीच मुसल्लाहपुर हाट में हिंसक झड़प हुई थी। खान सर के सुरक्षा गार्ड्स द्वारा हवा में फायरिंग करने का वीडियो सामने आने के बाद, पुलिस ने उन पर हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) और आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर (कदमकुआं थाना) दर्ज की थी। अदालत में खान सर का पक्ष रखते हुए अरविंद कुमार मव्वार ने दो टूक दलीलें दीं।
प्रतिशोध में की गई कार्रवाई (Retaliatory FIR): मव्वार ने कोर्ट को बताया कि मुख्य एफआईआर खान सर को केवल “फंसाने और बदनाम करने” के उद्देश्य से दर्ज कराई गई है। असल में, हमला विरोधी गुट (15-20 लोगों) ने किया था, जिसकी शिकायत खान सर के स्टाफ ने पहले ही दर्ज कराई थी।
आत्मरक्षा (Self-Defence): उन्होंने तर्क दिया कि कोचिंग के बाहर जब भीड़ ने पथराव और तोड़फोड़ की, तो सुरक्षा गार्ड्स ने आत्मरक्षा में केवल ‘हवाई फायरिंग’ (Warning Shots) की थी, जिससे कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ था।
अदालती नतीजा: मव्वार के तर्कों से सहमत होकर पटना जिला अदालत के प्रधान न्यायाधीश ने खान सर की गिरफ्तारी पर तुरंत अंतरिम रोक लगा दी और पुलिस से केस डायरी व फोरेंसिक रिपोर्ट तलब की।
अरविंद कुमार मव्वार: एक नजर में
| विशेषता | विवरण |
| प्रैक्टिस का स्थान | पटना हाई कोर्ट और पटना के सभी अधीनस्थ न्यायालय (सिविल कोर्ट)। |
| अनुभव काल | वर्ष 2002 से (लगभग 24 वर्षों की सक्रिय वकालत)। |
| मुख्य ताकत | क्रिमिनल लॉ, खासकर हाई-प्रोफाइल अग्रिम जमानत के मामलों में त्वरित राहत दिलाना। |
| दफ्तर/निवास | इंद्रप्रस्थ कॉलोनी, गोला रोड, दानापुर, पटना। |
बॉटमलाइन (The Bottom Line)
पटना जैसे शहर में, जहां कोचिंग इंडस्ट्री करोड़ों रुपये के टर्नओवर और भारी छात्र-शक्ति के दम पर चलती है, वहां इस तरह के विवादों का कानूनी रूप से सुलझना बेहद पेचीदा होता है। अरविंद कुमार मव्वार ने कानून और तथ्यों के सही मिश्रण का इस्तेमाल कर खान सर को पुलिसिया कार्रवाई से तात्कालिक तौर पर बचा लिया। भले ही कानूनी लड़ाई अभी जारी है, लेकिन इस हाई-प्रोफाइल केस ने मव्वार को बिहार के क्रिमिनल लॉयर्स की ‘लीग’ में और मजबूती से स्थापित कर दिया है।

