केस का संक्षिप्त ब्योरा (Case Snapshot)
| पहलू | विधिक विवरण |
| संबंधित अदालत | दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस मिनी पुष्करणा (Justice Mini Pushkarna) |
| केस का नाम | टीवी टुडे नेटवर्क बनाम सौराष्ट्र आज तक एवं अन्य (TV Today Network v. Saurashtra Aaj Tak and Another) |
| याचिकाकर्ता (Plaintiff) | टीवी टुडे नेटवर्क (वकील: हृषिकेश बरुआ, राधिका गुप्ता व अन्य) |
| प्रतिवादी (Defendant) | सौराष्ट्र आज तक समाचार पत्र (वकील: अर्जुन महाजन, सुमित आर शर्मा व अन्य) |
| अदालत का निर्णय | पासिंग ऑफ का मामला स्वीकार; गुजराती अखबार पर ‘आज तक’ नाम के इस्तेमाल पर स्थायी रोक। |
Brand Use Restriction: भारत के प्रमुख हिंदी समाचार चैनल ‘आज तक’ (Aaj Tak) के ट्रेडमार्क और गुडविल के संरक्षण को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
जस्टिस मिनी पुष्करणा (Justice Mini Pushkarna) की पीठ ने गुजराती समाचार पत्र को निर्देश दिया कि वह तुरंत इस नाम का प्रयोग बंद करे और कोई ऐसा नया नाम अपनाए जो टीवी टुडे नेटवर्क के ट्रेडमार्क ‘आज तक’ से मिलता-जुलता या भ्रामक रूप से समान न हो। अदालत ने राजकोट से प्रकाशित होने वाले एक गुजराती समाचार पत्र को ‘सौराष्ट्र आज तक’ (Saurashtra Aaj Tak) नाम का उपयोग करने से स्थायी रूप से रोक (Permanent Injunction) दिया है।
कोर्ट ने माना कि अखबार द्वारा इस नाम का उपयोग पासिंग ऑफ (Passing Off) के समान है और इससे आम जनता के बीच यह भ्रम पैदा होने की पूरी संभावना है कि यह समाचार पत्र ‘आज तक’ न्यूज चैनल या उसकी मूल कंपनी टीवी टुडे नेटवर्क (TV Today Network) से जुड़ा हुआ है [टीवी टुडे नेटवर्क बनाम सौराष्ट्र आज तक एवं अन्य]।
दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य कानूनी निष्कर्ष और टिप्पणियां
ट्रेडमार्क एवं पासिंग-ऑफ विवाद
│
┌──────────────────────────┴──────────────────────────┐
▼ ▼
'आज तक' शब्द ने हासिल किया 'सेकेंडरी मीनिंग' उपसर्ग/प्रत्यय (Prefix/Suffix) जोड़ने से भ्रम दूर नहीं होता
• 'आज' और 'तक' आम शब्द हो सकते हैं, लेकिन इनका संयोजन • 'सौराष्ट्र' जोड़ने मात्र से धोखा देने की संभावना खत्म नहीं होती।
न्यूज सेवाओं के लिए एक विशिष्ट पहचान बन चुका है। • 'आज तक' शब्द को अधिक प्रमुखता देना नीयत पर सवाल उठाता है।
‘आज तक’ ने अर्जित किया है द्वितीयक अर्थ (Secondary Meaning)
कोर्ट ने अपने 30 जुलाई के फैसले में कहा, हालांकि ‘आज’ और ‘तक’ व्यक्तिगत रूप से वर्णनात्मक (Descriptive) या शब्दकोश के शब्द हो सकते हैं, लेकिन समाचार प्रसारण के क्षेत्र में लंबे और निरंतर उपयोग के कारण उनका संयोजन एक द्वितीयक अर्थ (Secondary Meaning) प्राप्त कर चुका है। ‘सौराष्ट्र आज तक’ नाम में ‘आज तक’ शब्दों पर अधिक जोर देना स्पष्ट करता है कि प्रतिवादी (अखबार) टीवी टुडे की ख्याति और प्रतिष्ठा का अनुचित लाभ उठाने (Pass Off) की कोशिश कर रहा है।
ट्रायल कोर्ट का फैसला खारिज; डिस्क्लेमर (Disclaimer) पर्याप्त नहीं
- ट्रायल कोर्ट का फैसला (2012): दिल्ली की निचली अदालत ने अखबार को इस शर्त पर ‘सौराष्ट्र आज तक’ नाम जारी रखने की अनुमति दी थी कि वह अखबार में स्पष्ट रूप से एक ‘डिस्क्लेमर’ छापेगा कि उसका टीवी टुडे के ‘आज तक’ से कोई संबंध नहीं है।
- हाई कोर्ट का रुख: हाई कोर्ट ने इस निर्देश को रद्द कर दिया और स्पष्ट किया कि केवल एक डिस्क्लेमर जोड़ देने से भ्रम की संभावना समाप्त नहीं होती। इसके अतिरिक्त, अखबार ने अपनी सद्भावना (Bona fide) या स्वतंत्र ख्याति साबित करने के लिए अदालत के समक्ष कोई सबूत या गवाही पेश नहीं की थी।
विवाद का इतिहास (2002 से 2026)
- 1995 – 2000: ‘आज तक’ की शुरुआत 1995 में दूरदर्शन पर एक समाचार कार्यक्रम के रूप में हुई और वर्ष 2000 में यह 24 घंटे का हिंदी न्यूज चैनल बना। इसका ट्रेडमार्क टीवी टुडे की होल्डिंग कंपनी लिविंग मीडिया इंडिया लिमिटेड के नाम पंजीकृत है।
- दिसंबर 2002: टीवी टुडे को पता चला कि गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र (राजकोट) से ‘सौराष्ट्र आज तक’ नाम से एक गुजराती अखबार शुरू और वितरित किया जा रहा है।
- 2003: जनवरी 2003 में लीगल नोटिस भेजने के बाद अप्रैल 2003 में टीवी टुडे ने पासिंग-ऑफ का मुकदमा दायर किया।
- हाई कोर्ट अपील: ट्रायल कोर्ट द्वारा पूर्ण स्थगनादेश (Injunction) देने से इनकार करने पर टीवी टुडे ने हाई कोर्ट का रुख किया था। अपीलीय कार्यवाही के दौरान ‘आज तक’ को आधिकारिक तौर पर एक सुप्रसिद्ध ट्रेडमार्क (Well-known Trademark) घोषित किया जा चुका है।
बॉटमलाइन (The Bottom Line)
दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि मीडिया और बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) के क्षेत्र में स्थापित और लोकप्रिय ब्रांड नामों के साथ किसी भी प्रकार की भ्रामक समानता या उपसर्ग/प्रत्यय (Prefix/Suffix) जोड़कर उनका फायदा उठाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

