Friday, June 12, 2026
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Divorce Rule: पति का 13 दिनों तक पत्नी से बात न करना क्रूरता नहीं…क्या है वैवाहिक जीवन में अनबन और खामोशी का नियम?

Divorce Rule: सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक संबंधों में उतार-चढ़ाव और आईपीसी की धारा 498A (क्रूरता) के दुरुपयोग को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यावहारिक फैसला सुनाया है।

पति की दोषसिद्धि और सजा के आदेश को पूरी तरह से रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ ने पति की दोषसिद्धि (Conviction) और सजा के आदेश को पूरी तरह से रद्द (Set Aside) कर दिया और उसका पासपोर्ट भी वापस करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि पति किसी विवाद के कारण 13 दिनों तक अपनी पत्नी से बातचीत नहीं करता है, तो इसे किसी भी सूरत में आपराधिक क्रूरता (Cruelty) नहीं माना जा सकता। वैवाहिक जीवन में मतभेद होना एक आम बात है और इन मतभेदों के कारण अस्थायी रूप से बातचीत बंद होना स्वाभाविक है।

मामला क्या था? (ओमान में था पति, मायके जाने पर बंद की थी बात)

आत्महत्या और आरोप: यह मामला 2015 में दर्ज हुआ था। याचिकाकर्ता पति ओमान (Oman) में रहता था, जबकि उसकी पत्नी भारत में अपने माता-पिता के घर पर थी। पति की मर्जी के खिलाफ पत्नी के मायके जाने को लेकर दोनों परिवारों में कुछ अनबन थी। इसके बाद पति ने १३ दिनों तक पत्नी से फोन या मैसेज पर बात नहीं की। इस मानसिक तनाव के चलते पत्नी ने आत्महत्या (Suicide) कर ली।

निचली अदालत का रुख: मायके वालों ने पति और उसके परिवार के खिलाफ धारा 498A (क्रूरता) और 304B (दहेज मृत्यु) के तहत केस दर्ज कराया। ट्रायल कोर्ट ने दहेज और प्रताड़ना के सबूत न मिलने पर सभी को ३०४बी से बरी कर दिया, लेकिन पति को 498 ए के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट का मानना था कि पति का ‘जानबूझकर बात न करना’ (Wilful Conduct) ऐसा व्यवहार था जिसने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाया। मद्रास हाई कोर्ट ने भी इस सजा को बरकरार रखा था, जिसके बाद पति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट का कानूनी तर्क: ‘व्हाट्सएप पर मैसेज न भेजना बात न होने का सबूत नहीं’

सुप्रीम कोर्ट में पति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर. बसंत और शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बालाजी सुब्रमण्यम ने दलीलें पेश कीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद निचली अदालतों के आदेश को खारिज कर दिया।

अनबन और खामोशी वैवाहिक जीवन का हिस्सा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “ठोस सबूतों के अभाव में, केवल 13 दिनों तक बातचीत न होने को क्रूरता के दायरे में नहीं लाया जा सकता। वैवाहिक जीवन में मतभेद इसके अभिन्न अंग (Part and Parcel) हैं और ऐसे मतभेदों के परिणामस्वरूप बातचीत बंद हो सकती है। यह ऐसा मामला भी नहीं है जहां दोनों के बीच कोई गंभीर झगड़ा हुआ हो।”

डिजिटल साक्ष्यों पर कोर्ट की टिप्पणी: अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने यह साबित करने के लिए व्हाट्सएप चैट (WhatsApp Chats) पेश की थी कि पति की तरफ से कोई मैसेज नहीं भेजा गया था। कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा, अभियोजन पक्ष ने यह दिखाने के लिए व्हाट्सएप चैट पर भरोसा किया कि अपीलकर्ता द्वारा मृतका को कोई संदेश नहीं भेजा गया था। हालांकि, हमारी राय में व्हाट्सएप पर संदेश न भेजना यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है कि उनके बीच कोई बातचीत नहीं हुई, क्योंकि बातचीत सामान्य फोन कॉल (Normal Phone Call) के माध्यम से भी हो सकती थी।

‘मानसिक क्रूरता’ का कोई तय फॉर्मूला (Thumb Rule) नहीं

अदालत ने मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) को परिभाषित करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न पुराने फैसलों का अध्ययन करने के बाद स्पष्ट किया। मानसिक क्रूरता पूरी तरह से प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसे मापने का कोई ‘थंब रूल’ या तय पैमाना नहीं हो सकता, क्योंकि जो बात किसी एक व्यक्ति के लिए महज एक ‘मासूम झगड़ा’ (Innocent Quarrel) हो सकती है, वही बात किसी दूसरे व्यक्ति के लिए गंभीर मानसिक प्रताड़ना का कारण बन सकती है। हालांकि, आपराधिक मामले में दोषी ठहराने के लिए घटना या शिकायत दर्ज होने के नजदीकी समय (Proximity of Time) में लगातार और क्रूर उत्पीड़न (Persistent Harassment) का होना अनिवार्य है, जो इस मामले में साबित नहीं हुआ।

विश्लेषण: धारा 498A IPC (बीएनएसएस में बदलाव) और क्रूरता का सिद्धांत

यह फैसला वैवाहिक विवादों में कानून के अति-उत्साही इस्तेमाल को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

कानूनी बिंदुसुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था और प्रभाव
संदेह से परे सबूत (Beyond Reasonable Doubt)कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष केवल मृतका के माता-पिता की मौखिक गवाही और एकतरफा व्हाट्सएप स्क्रीनशॉट के आधार पर यह साबित करने में नाकाम रहा कि बातचीत की कमी ही आत्महत्या की वजह थी।
आपराधिक दायित्व (Criminal Liability)हर उस वैवाहिक खामोशी या अलगाव को आपराधिक क्रूरता नहीं माना जा सकता जो किसी दुखद घटना (जैसे आत्महत्या) पर समाप्त होती है, जब तक कि दुर्भावनापूर्ण इरादा (Mens Rea) साबित न हो।
पासपोर्ट की वापसीदोषसिद्धि रद्द होने के साथ ही कोर्ट ने विदेश में रह रहे पति को उसका पासपोर्ट तुरंत लौटाने का आदेश दिया।
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