Wednesday, September 16, 2026
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Odisha News: कट-ऑफ तारीख तय करना सरकार का अधिकार, दखल नहीं दे सकती अदालत…अब न्यायिक सेवा परीक्षा मामले में क्या होगा आगे

Odisha News: ओडिशा न्यायिक सेवा (Odisha Judicial Service – OJS) परीक्षा की तैयारी कर रहे युवा वकीलों को उड़ीसा हाई कोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है।

सिविल जज (Junior Division) भर्ती परीक्षा में बैठने का मामला

हाईकोर्ट के जस्टिस मानस रंजन पाठक और जस्टिस सिबो संकर मिश्रा की खंडपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि कट-ऑफ तारीख का निर्धारण करना कार्यपालिका (Executive) का विशेषाधिकार है और यह सरकार के नीतिगत फैसले (Policy Decision) के दायरे में आता है। जब तक यह फैसला पूरी तरह से मनमाना, तर्कहीन या दुर्भावना से प्रेरित न हो, तब तक अदालतें इसमें बदलाव के लिए न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का इस्तेमाल नहीं कर सकतीं।

चयन प्रक्रिया के बीच नियमों को नहीं बदल सकते

यह कानून का स्थापित सिद्धांत है कि भर्ती प्राधिकारी शुरुआत में मानदंड तय कर सकता है, लेकिन चयन प्रक्रिया के बीच में नियमों को नहीं बदल सकता। अदालत ने सिविल जज (Junior Division) भर्ती परीक्षा में बैठने के लिए आवश्यक ‘3 साल के वकालत अनुभव’ की गणना के लिए 1 अप्रैल की कट-ऑफ तारीख (Cut-off Date) को चुनौती देने वाली याचिका पर कोई भी अंतरिम राहत (Interim Relief) देने से साफ इनकार कर दिया है।

विवाद क्या है? (2026 में आई वैकेंसी, लेकिन अनुभव चाहिए 2025 तक)

यह पूरा विवाद ओडिशा लोक सेवा आयोग (OPSC) द्वारा 30 अप्रैल 2026 को जारी किए गए एक विज्ञापन से शुरू हुआ है। इसके तहत सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की 78 सीटों पर भर्ती निकाली गई है।

अभ्यर्थियों की आपत्ति: OPSC ने इस भर्ती के लिए नोटिफिकेशन तो 30 अप्रैल 2026 को निकाला, लेकिन वकालत के ३ साल के न्यूनतम अनुभव की गणना के लिए कट-ऑफ तारीख 1 अप्रैल 2025 तय कर दी।

युवा वकीलों की दलील: याचिकाकर्ता युवा वकीलों का कहना है कि वे वर्तमान में (2026 में) 3 साल का अनुभव पूरा कर चुके हैं। चूंकि भर्ती प्रक्रिया अब शुरू हो रही है, इसलिए कट-ऑफ तारीख विज्ञापन की तारीख होनी चाहिए। अगर 1 अप्रैल 2025 की तारीख को आधार बनाया गया, तो वे परीक्षा में बैठने से अयोग्य हो जाएंगे। उन्होंने कोर्ट से अंतरिम राहत के तौर पर परीक्षा में ‘अनंतिम रूप से’ (Provisionally) बैठने की अनुमति मांगी थी।

सुप्रीम कोर्ट का अनिवार्य 3 साल का नियम और ओडिशा में संशोधन

इस विवाद की जड़ें पिछले साल सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए एक ऐतिहासिक फैसले से जुड़ी हैं।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: मई 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन बनाम भारत संघ मामले में एंट्री-लेवल सिविल जज भर्ती के लिए 3 साल का न्यूनतम वकालत अनुभव अनिवार्य करने के नियम को बहाल कर दिया था।

ओडिशा सरकार का संशोधन: इस फैसले के बाद, ओडिशा सरकार ने हाई कोर्ट की सलाह पर अपने ‘ओडिशा सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस रूल्स, 2007’ में संशोधन किया। इसके तहत नियम 18(1)(a) जोड़ा गया, जो कहता है कि उम्मीदवार के पास भर्ती वर्ष की 1 अप्रैल को कम से कम 3 साल का अनुभव होना चाहिए।

कोर्ट रूम का ड्रामा: जब महाधिवक्ता (AG) ही अपनी सरकार के नियम के खिलाफ खड़े हुए

इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम में एक बेहद दिलचस्प स्थिति देखने को मिली, जब राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) पीतांबर आचार्य ने अपनी ही सरकार के नियम के विपरीत जाकर याचिकाकर्ताओं (अभ्यर्थियों) का समर्थन कर दिया।

महाधिवक्ता (AG) का तर्क: एजी ने अदालत में कहा कि हालांकि राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह नियम बनाया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने किसी ‘विशिष्ट कट-ऑफ तारीख’ को तय करने का निर्देश नहीं दिया था। छत्तीसगढ़ और केरल जैसे गिने-चुने राज्यों को छोड़कर किसी अन्य राज्य ने ऐसी कठिन कट-ऑफ तारीख नहीं रखी है।

हाई कोर्ट की ओर से तीखा पलटवार: हाई कोर्ट प्रशासन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौतम मिश्रा ने महाधिवक्ता के इस रुख पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि चूंकि यह नियम राज्य सरकार ने खुद हाई कोर्ट से परामर्श के बाद बनाया है, इसलिए महाधिवक्ता को अपनी ही सरकार के नीतिगत फैसले पर सवाल उठाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

OPSC की दलील: लोक सेवा आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पी.के. मोहंती ने चेतावनी दी कि यदि इस चरण पर अंतरिम राहत दी गई, तो तकनीकी और लॉजिस्टिक समस्याएं खड़ी हो जाएंगी और ऐसे हजारों ‘बाउंड्री लाइन’ वाले उम्मीदवार कोर्ट आ जाएंगे, जिससे पूरी भर्ती प्रक्रिया ठप हो जाएगी।

हाई कोर्ट का कानूनी निष्कर्ष: 1 अप्रैल की तारीख तार्किक है

सभी पक्षों को सुनने के बाद, हाई कोर्ट की खंडपीठ ने विज्ञापन में तय की गई १ अप्रैल की कट-ऑफ तारीख को पूरी तरह वैध और सही ठहराया।

वित्तीय/भर्ती वर्ष का चक्र: कोर्ट ने कहा कि भर्ती वर्ष हमेशा उस साल की 1 अप्रैल से शुरू होकर अगले साल की 31 मार्च तक चलता है। चूंकि यह विज्ञापन भर्ती वर्ष 2025 (यानी वर्ष 2024-25 की रिक्तियों) के लिए है, इसलिए 1 अप्रैल 2025 की कट-ऑफ तारीख पूरी तरह तार्किक (Rational) है।

वैकेंसी का बैकलॉग: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक कारणों से पिछली ओजेएस परीक्षाओं की प्रक्रिया 1 अगस्त 2025 को पूरी हो पाई थी, जिसके कारण 2024-25 की रिक्तियों की गणना 31 मार्च 2026 तक की गई। चूंकि अभ्यर्थियों ने ‘भर्ती के वर्ष’ (Year of Recruitment) को चुनौती नहीं दी है, और वैकेंसी 2024-25 की है, इसलिए वे 2024-25 में 3 साल का अनुभव न रखने के कारण वैसे भी अयोग्य हैं।

विश्लेषण: ओडिशा न्यायिक सेवा परीक्षा की वर्तमान स्थिति

यह आदेश उन अभ्यर्थियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो नीतिगत फैसलों में अदालत के हस्तक्षेप की उम्मीद करते हैं।

कानूनी और प्रशासनिक बिंदुवर्तमान स्थिति और भविष्य की रूपरेखा
सुप्रीम कोर्ट द्वारा परीक्षा पर रोकओजेएस (OJS) की प्रारंभिक परीक्षा पहले 5 जुलाई 2026 को होनी तय थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के २२ मई २०२६ के एक आदेश के बाद इसे अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है।
अंतिम सुनवाई की तारीखहाई कोर्ट ने नियम १८(१)(a) की संवैधानिक वैधता पर विस्तृत सुनवाई के लिए इस मामले को 6 जुलाई 2026 को अंतिम सुनवाई (Final Hearing) के लिए लिस्ट किया है।
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