Deficiency in Service: जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, दिल्ली ने दिल्ली के एक उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को सेवा में कमी का दोषी पाया है।
एसबीआई को कानूनी खर्च व 15 हजार रुपए मुआवजा देना पड़ा
आयोग की अध्यक्ष मोनिका ए. श्रीवास्तव और सदस्य किरण कौशल की पीठ ने 2 जून 2026 को दिए अपने आदेश में कहा कि हालांकि बैंक ने मूल राशि वापस कर दी है, लेकिन यह रिफंड उपभोक्ता द्वारा फोरम का दरवाजा खटखटाने के बाद ही संभव हो सका। इसलिए, फोरम ने एसबीआई को शिकायतकर्ता को ₹15,000 का मुआवजा और कानूनी खर्च देने का निर्देश दिया। एक उपभोक्ता का एटीएम कार्ड फंसने के बाद उनके खाते से धोखाधड़ी कर ₹80,000 उड़ा दिए गए थे। बैंक ने यह राशि वापस करने में 10 महीने की लंबी देरी की, जिसके लिए फोरम ने एसबीआई पर जुर्माना ठोक दिया है।
फोरम ने बैंक की खिंचाई करते हुए यह आदेश दिया
फोरम ने आदेश में कहा, यह आयोग विपक्षी दल (SBI) को इस हद तक सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी पाता है कि धोखाधड़ी से निकाली गई राशि शिकायतकर्ता को करीब 10 महीने की देरी से लौटाई गई, वह भी तब जब शिकायतकर्ता ने इस आयोग का रुख किया। इसलिए, विपक्षी दल को निर्देश दिया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी के खर्च के एवज में ₹15,000 का भुगतान करे।
मामला क्या था? (फंसा हुआ कार्ड, फर्जी हेल्प लाइन नंबर और स्किमिंग का खेल)
दिल्ली निवासी संजय मिश्रा के साथ हुई यह घटना डिजिटल बैंकिंग के दौर में एटीएम फ्रॉड के नए तरीकों को उजागर करती है।
कार्ड का फंसना: 13 जनवरी 2024 को दोपहर करीब 2:15 बजे संजय मिश्रा ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के एक एटीएम से अपने एसबीआई डेबिट कार्ड के जरिए ₹10,000 निकाले। लेकिन पैसे निकलने के बाद उनका कार्ड मशीन के भीतर ही फंस गया।
फर्जी कॉल सेंटर का जाल: एटीएम बूथ के अंदर लिखे एक सहायता नंबर पर मिश्रा ने कॉल किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को पीएनबी हेल्प सेंटर का कर्मचारी बताया और उन्हें ‘Clear’ बटन दबाकर कार्ड खींचने को कहा। जब कार्ड नहीं निकला, तो उसने कहा कि शाम को बैंक इंजीनियर आएगा, तब आईडी दिखाकर कार्ड ले लेना।
अंधाधुंध ट्रांजैक्शन: मिश्रा जैसे ही एटीएम बूथ से निकले, उनके फोन पर ₹5,000-₹5,000 की अनधिकृत निकासी के दो एसएमएस अलर्ट आए। उन्होंने तुरंत एसबीआई को फोन कर कार्ड ब्लॉक कराया और पुलिस व साइबर क्राइम में शिकायत दर्ज कराई। बाद में पता चला कि कार्ड ब्लॉक करने की सूचना के बावजूद उनके खाते से कुल 12 ट्रांजैक्शन (पीओएस और एटीएम के जरिए) कर ₹80,000 साफ कर दिए गए थे।
लापरवाही के सबूत: जब मिश्रा दोबारा एटीएम पहुंचे, तो वह नंबर वहां से हटाया जा चुका था। एटीएम का कार्ड स्लॉट भी टूटा हुआ था, जिससे यह आशंका पुख्ता हुई कि वहां स्किमिंग डिवाइस (Skimming Device) लगाई गई थी।
10 महीने का मानसिक उत्पीड़न और बैंक का लापरवाह रवैया
संजय मिश्रा ने फरवरी 2024 में बैंकिंग लोकपाल (Banking Ombudsman) और एसबीआई के समक्ष सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। महीनों तक बैंक के चक्कर काटने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो उन्होंने उपभोक्ता फोरम की शरण ली।
उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान बैंक के रवैये पर टिप्पणियां कीं
मुकदमे के बाद जागा बैंक: बैंक ने आखिरकार 7 दिसंबर 2024 को (शिकायत के लगभग 10 महीने बाद) ₹80,000 की मूल राशि मिश्रा के खाते में क्रेडिट की। लेकिन यह कदम तब उठाया गया जब फोरम ने बैंक को नोटिस जारी कर दिया था।
कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ SBI: फोरम ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए नोट किया कि उचित नोटिस दिए जाने के बावजूद एसबीआई की तरफ से कोई भी प्रतिनिधि अदालत में पेश नहीं हुआ। इसके चलते अप्रैल 2025 में बैंक के खिलाफ एकपक्षीय (Ex-Parte) कार्यवाही शुरू की गई थी।
विश्लेषण: उपभोक्ता फोरम का निर्देश
फोरम ने माना कि त्वरित शिकायत और कार्ड ब्लॉक कराने के बावजूद उपभोक्ता को अपनी ही गाढ़ी कमाई वापस पाने के लिए 10 महीने तक भटकना पड़ा, जो गंभीर मानसिक तनाव का कारण है।
| मुख्य तथ्य / आदेश बिंदु | कानूनी और वित्तीय विवरण (The Liability Score) |
| पीड़ित उपभोक्ता | संजय मिश्रा (दिल्ली निवासी) |
| धोखाधड़ी की कुल राशि | ₹80,000 (जो 10 महीने बाद दिसंबर 2024 में रिफंड की गई)। |
| अदालती हर्जाना (Compensation) | ₹15,000 (मानसिक परेशानी और कानूनी लड़ाई के खर्च के लिए)। |
| मामले की प्रकृति | एटीएम स्किमिंग और बैंक द्वारा रिफंड प्रक्रिया में की गई प्रशासनिक लापरवाही। |

