Brain Drain: सुप्रीम कोर्ट ने देश की युवा विधिक प्रतिभाओं को आर्थिक तंगी के कारण वकालत छोड़ने से बचाने और महिला वकीलों को बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में एक बेहद दूरगामी और ऐतिहासिक कदम उठाया है।
“यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड का गठन अनिवार्य
चीफ जस्टिस (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने महिला अधिवक्ताओं के एक समूह द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर विधिक मुद्दे पर केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) को नोटिस जारी कर उनके विस्तृत विधिक प्रस्ताव और जवाब तलब किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 को तय की गई है। शीर्ष अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि शुरुआती वर्षों में गंभीर आर्थिक संकट के चलते होनहार जूनियर वकील इस पेशे को छोड़ रहे हैं, जिसे रोकने के लिए “यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड” (Young Lawyers’ Professional Assistance Fund) का गठन किया जाना अनिवार्य है।
याचिका का मुख्य आधार (आर्थिक तंगी और महिला वकीलों की सुरक्षा)
महिला वकीलों की बुनियादी जरूरतें: जब महिला अधिवक्ताओं को अपने दिन का एक बड़ा हिस्सा अदालती परिसरों में बिताना पड़ता है, तो उनकी निजता (Privacy), सुरक्षा, आराम और गरिमा के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा (Infrastructure) उपलब्ध कराना न्यायपालिका और सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी बन जाता है। महिला वकीलों के एक समूह द्वारा दायर इस याचिका में मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दों को उठाया गया था।
शुरुआती विधिक करियर का संघर्ष: पहली पीढ़ी (First-generation) के वकीलों और आर्थिक/सामाजिक रूप से पिछड़े पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं के लिए वकालत के शुरुआती साल बेहद कठिन होते हैं। सीजेआई की बेंच ने स्पष्ट किया कि आर्थिक चुनौतियों का यह मुद्दा ‘जेंडर-न्यूट्रल’ (Gender-neutral – पुरुष और महिला दोनों के लिए समान) है और इस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट का विधिक दृष्टिकोण: वकालत में प्रतिभाओं का पलायन (Brain Drain) रोकना होगा
सुप्रीम कोर्ट ने जूनियर वकीलों के संघर्ष और इस विधिक पेशे की कड़वी सच्चाई को स्वीकार करते हुए कई महत्वपूर्ण व्यावहारिक और विधिक सुझाव दिए।
पहली पीढ़ी के वकीलों का संघर्ष
अदालत ने कहा कि जब कोई नया और पहली पीढ़ी का वकील बार (Bar) में प्रवेश करता है, तो उसे विरासत में कोई तैयार ऑफिस, कानूनी लाइब्रेरी, स्थापित मुवक्किल (Clientele) या निश्चित आय नहीं मिलती। वे अपने वरिष्ठ वकीलों (Seniors) या स्थानीय बार एसोसिएशनों द्वारा दिए जाने वाले बेहद मामूली वजीफे (Stipend) पर निर्भर होते हैं, जो उनके बुनियादी रहने के खर्च के लिए भी नाकाफी होता है।
असिस्टेंस फंड का ढांचा और विधिक नियंत्रण
सर्वोच्च न्यायालय ने सुझाव दिया कि इस प्रस्तावित फंड को संबंधित उच्च न्यायालयों (High Courts) के सीधे विधिक नियंत्रण में या केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों के परामर्श से गठित एक स्वायत्त निकाय (Autonomous Body) के तहत स्थापित किया जाना चाहिए। इससे दानदाताओं और योगदानकर्ताओं के बीच इस फंड की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
फंड के लिए वित्तीय स्रोत (Funding Mechanism)
सफल वकीलों का योगदान और टैक्स छूट: वरिष्ठ और स्थापित अधिवक्ताओं के लिए कानून के तहत एक स्वैच्छिक या संरचनात्मक दान प्रणाली बनाई जाए। दान को लोकप्रिय बनाने के लिए दानदाता वकीलों को आयकर में छूट (Tax Exemptions), राष्ट्रीय पुरस्कार या अन्य विधिक सम्मान देने का प्रावधान हो। सुप्रीम कोर्ट ने इस कोष को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाने के लिए तीन मुख्य विधिक स्रोतों का प्रस्ताव रखा है।
कोर्ट फीस का हिस्सा: केंद्र और राज्य सरकारें अदालतों में एकत्र होने वाली कोर्ट फीस (Court Fee) का एक निश्चित हिस्सा इस फंड में डाइवर्ट करें।
अदालती जुर्माना (Costs): न्यायिक कार्यवाहियों के दौरान विभिन्न मामलों में अदालतों द्वारा लगाया जाने वाला जुर्माना (Costs imposed in judicial proceedings) भी इसी फंड में जमा किया जाए।
सहायता की शर्तें और ‘पे-बैक’ मॉडल (Pay-Back Model)
अदालत ने इस फंड के संचालन के लिए एक व्यावहारिक रूपरेखा भी प्रस्तुत की है।
शुरुआती 3 साल की सहायता: यह वित्तीय सहायता केवल पहली पीढ़ी या आर्थिक रूप से कमजोर जूनियर वकीलों को दी जाएगी, जो किसी अनुभवी वकील के साथ एसोसिएट के रूप में जुड़कर अनिवार्य विधिक सेवाएं प्रदान करेंगे। यह राशि उनके न्यूनतम जीवन निर्वाह के लिए पर्याप्त होगी।
7 साल में समाप्ति: यह वित्तीय सहायता शुरुआती 3 वर्षों के बाद धीरे-धीरे कम की जाएगी और वकालत के 7 साल पूरे होने पर पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
रिफंड/आत्मनिर्भर मॉडल: कोर्ट ने यह अनूठा विचार भी रखा कि जो जूनियर वकील इस फंड की मदद से आगे चलकर सफल बनते हैं, वे बाद में मासिक किश्तों के माध्यम से इस फंड में वापस योगदान (Pay back) करेंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों के जूनियर वकीलों को भी इसका लाभ मिल सके।
विधिक एवं केस सारांश (Case Matrix)
| विधिक/मुख्य बिंदु | उच्चतम न्यायालय की महत्वपूर्ण विधिक पहल (जून 2026) |
| याचिकाकर्ता | महिला अधिवक्ताओं का समूह (अधिवक्ता कल्याण और बुनियादी ढांचे की मांग)। |
| प्रतिवादी | केंद्र सरकार, सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (UTs)। |
| पीठ (Coram) | मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना। |
| प्रस्तावित विधिक कोष | यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड (Young Lawyers’ Professional Assistance Fund)। |
| मुख्य विधिक उद्देश्य | आर्थिक तंगी के कारण जूनियर वकीलों का पलायन (Attrition) रोकना और महिला वकीलों को बुनियादी सुविधाएं देना। |
| विधिक सहायता की अवधि | वकालत के शुरुआती 3 वर्षों के लिए पूर्ण सहायता, जो 7 वर्ष तक धीरे-धीरे समाप्त होगी। |
| अगली विधिक तारीख | 17 जुलाई 2026 (अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और सभी राज्यों के एडवोकेट जनरल्स को उपस्थित रहने का निर्देश)। |

