Wednesday, November 4, 2026
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Joggers’ Track: प्रयागराज के चंद्रशेखर आजाद पार्क (कंपनी बाग) के अंदर नए निर्माण और वाहनों की आवाजाही पर क्यों लगाई रोक….इस खबर को पढ़ें

केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक श्रेणियां / बिंदुइलाहाबाद उच्च न्यायालय का अंतरिम आदेश (2026)
मामले का नामभूपेंद्र पांडे बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य (Bhupendra Pandey v. State of UP & Ors.)
संबंधित अदालतइलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस अजीत कुमार एवं जस्टिस गरिमा प्रसाद
मुख्य विषयचंद्रशेखर आजाद पार्क (कंपनी बाग), प्रयागराज के भीतर नया गेट निर्माण व पार्किंग विवाद
अदालत का अंतरिम फैसलाबिना इजाजत किसी भी निर्माण पर रोक; वाहनों की आवाजाही व पार्किंग बंद (राज्यपाल/वीआईपी को छूट)।
नागरिकों के लिए निर्देशपार्क का ‘जोगर्स ट्रैक’ पूरी तरह बाधा-रहित और सुव्यवस्थित रखा जाए।

Joggers’ Track: प्रयागराज के ऐतिहासिक चंद्रशेखर आजाद पार्क (कंपनी बाग) के हरित क्षेत्र और विरासत को बचाने की दिशा में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है।

जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ ने यह आदेश पारित किया। उच्च न्यायालय ने पार्क के भीतर संग्रहालय (Museum) के लिए नए प्रवेश द्वार के निर्माण को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए पार्क के अंदर किसी भी प्रकार के अस्थायी या स्थायी निर्माण पर पूर्ण रोक लगा दी है। इसके साथ ही, अदालत ने पार्क परिसर के भीतर आम वाहनों की आवाजाही और पार्किंग पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

मामला क्या था? (Case Background)

  • यह जनहित याचिका प्रयागराज निवासी भूपेंद्र पांडे द्वारा दायर की गई है।
  • याचिकाकर्ता की दलील: याचिका में आरोप लगाया गया था कि चंद्रशेखर आजाद पार्क के अंदर स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय (Allahabad Museum) के लिए एक नया प्रवेश द्वार बनाने की योजना बनाई जा रही है। इससे पार्क के हरित क्षेत्र, जोगर्स ट्रैक (Joggers’ Track) और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा।
  • “प्रयागराज के फेफड़े”: याचिकाकर्ता ने इस पार्क को “प्रयागराज शहर का फेफड़ा” (Lungs of Prayagraj city) बताते हुए तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के पुराने आदेशों के अनुसार पार्क में किसी भी नए निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। साथ ही, पुराने आदेशों के बावजूद पार्क में अवैध रूप से वाहन चलाए और पार्क किए जा रहे थे।
  • केंद्र सरकार/संग्रहालय का पक्ष: केंद्र सरकार के वकील ने 2021 के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए तर्क दिया कि राष्ट्रीय स्तर के संग्रहालय में पर्यटकों की पहुंच सुगम बनाने के लिए द्वार खोलना आवश्यक था।
  • याचिकाकर्ता का प्रति-तर्क: याचिकाकर्ता के अनुसार, संग्रहालय से मात्र 50 मीटर की दूरी पर ‘कमला नेहरू रोड’ पर गेट नंबर 2 पहले से ही मौजूद है। ऐसे में मात्र 30 मीटर की दूरी पर एक और नया गेट बनाना फिजूलखर्ची है, जिससे ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या पैदा होगी।

हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण एवं आदेश

हाई कोर्ट की पीठ ने माना कि मामले में पार्क के संरक्षण और संग्रहालय के उपयोग के बीच संतुलन बनाने के लिए गहराई से विचार करने की आवश्यकता है।

निर्माण और वाहनों पर प्रतिबंध

हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि अदालत की विशेष अनुमति (Leave of the Court) के बिना चंद्रशेखर आजाद पार्क के भीतर न तो संग्रहालय द्वारा और न ही किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा कोई नया निर्माण (अस्थायी या स्थायी) किया जाएगा।

वीआईपी आवाजाही को छूट

अदालत ने स्पष्ट किया कि वाहनों के प्रवेश पर लगाई गई रोक राज्यपाल (Governor) या संग्रहालय का दौरा करने वाले अन्य अति-विशिष्ट महानुभावों (High Dignitaries) के वाहनों पर लागू नहीं होगी।

जोगर्स ट्रैक की देखरेख

अदालत ने पार्क प्रशासन को सख्त निर्देश दिए कि पार्क के भीतर बना ‘जोगर्स ट्रैक’ (Joggers’ Track) पूरी तरह से रखरखाव युक्त और बाधा-रहित (Hindrance-Free) रहना चाहिए ताकि सुबह-शाम टहलने आने वाले नागरिकों को कोई परेशानी न हो।

उच्च न्यायालय का अंतिम आदेश (Court Directives)

  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय संग्रहालय (प्रयागराज), भारत संघ (UOI) और अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद स्मृति उद्यान प्रबंधन को पक्षकार बनाने की अनुमति दी।
  • केंद्र और राज्य सरकार, दोनों को अगली सुनवाई से पहले अपना स्पष्ट रुख और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
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