Sunday, September 20, 2026
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Illegal Occupation: हक छीनने के लिए मुकदमेबाजी करना एक मानसिक उत्पीड़न…छत्तीसगढ़ सरकार पर क्यों ठोका ₹2 लाख जुर्माना

Illegal Occupation: सुप्रीम कोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा बिना किसी विधिक अधिग्रहण प्रक्रिया के दशकों तक निजी जमीन पर अवैध कब्जा रखने और फिर उसके बढ़े हुए मुआवजे के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने वाली छत्तीसगढ़ सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।

छतीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम अदालत ने रखा बरकरार

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को पूरी तरह बरकरार रखा, जिसमें राज्य सरकार को आदेश दिया गया था कि वह पीड़ित भूस्वामियों (Landowners) को ₹5,380 प्रति वर्ग मीटर की दर से बढ़ा हुआ मुआवजा और उस पर भारी ब्याज का भुगतान करे। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की इस अपील को “पूरी तरह से तुच्छ और बेतुकी” (Absolutely Frivolous) करार देते हुए खारिज कर दिया और सरकार पर ₹2 लाख का भारी विधिक जुर्माना (Cost) ठोक दिया।

विवाद की पृष्ठभूमि: 1986 से शुरू हुई विधिक बेइंसाफी (The 25-Year Illegal Occupation)

बिना अधिग्रहण सड़क निर्माण: यह मामला छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का है, जिसकी विधिक कड़ियां कानून और प्रशासनिक मनमानी की कहानी कहती हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने वर्ष 1986 में दुर्ग जिले में कुछ निजी भूस्वामियों की जमीन पर बिना कोई कानूनी प्रक्रिया अपनाए या मुआवजा दिए कब्जा कर लिया और उस पर सड़क का निर्माण कर दिया।

20 साल बाद खुला विधिक सच: इस अवैध कब्जे का खुलासा तब हुआ जब 3 मई 2006 को आधिकारिक सीमांकन (Demarcation Proceedings) हुआ। अपनी जमीन पर अवैध कब्जा पाकर भूस्वामियों ने ‘छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता’ के तहत विभाग को बेदखल (Eviction) करने के लिए मुकदमा दायर कर दिया।

देर से जागी सरकार: चौतरफा घिरने के बाद, राज्य सरकार ने घटना के 24 साल बाद यानी वर्ष 2010 में भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 की धारा 4 के तहत अधिसूचना जारी कर औपचारिक अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की। जून 2011 में पारित अंतिम अवार्ड में सरकार ने वित्तीय वर्ष 2009-10 की गाइडलाइन दरों के आधार पर ₹4,308 प्रति वर्ग मीटर का मुआवजा तय किया।

अदालतों का रुख: गाइडलाइन दरों में वृद्धि और ब्याज का विधिक आदेश

रेफरेंस कोर्ट (Reference Court): भूस्वामियों ने मुआवजे को कम मानते हुए भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 18 के तहत संदर्भ अदालत का रुख किया। कोर्ट ने वित्तीय वर्ष 2010-11 की संशोधित गाइडलाइन दरों को लागू करते हुए मुआवजे को बढ़ाकर ₹5,380 प्रति वर्ग मीटर कर दिया। साथ ही, अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से पहले वर्ष के लिए 9% वार्षिक और उसके बाद भुगतान होने तक 15% की दर से ब्याज देने का आदेश दिया।

हाई कोर्ट का ऐतिहासिक हस्तक्षेप: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बढ़े हुए मुआवजे को तो सही माना ही, साथ ही एक बड़ा विधिक सिद्धांत तय करते हुए कहा कि भूस्वामी 2 सितंबर 2006 (जिस दिन उन्होंने बेदखली का मुकदमा दायर किया था) से ही इस ब्याज को पाने के विधिक हकदार हैं, क्योंकि राज्य सरकार ने वर्षों तक बिना किसी मुआवजे के उनकी जमीन का अवैध उपभोग किया था।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: ‘यह केवल भूस्वामियों का उत्पीड़न है’

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह विधिक दलील दी कि बेदखली का मुकदमा दायर करने की तारीख (2006) से ब्याज की गणना नहीं की जानी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार के इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा:

अवैध कब्जे के बाद ब्याज देना पूरी तरह न्यायसंगत

पीठ ने स्पष्ट किया कि चूंकि राज्य ने अनधिकृत रूप से प्रतिवादियों की भूमि पर कब्जा किया था और लंबे समय तक इसका उपयोग किया, और वर्ष 2006 में मुकदमा दायर होने के बाद भी मुआवजे की कोई पेशकश नहीं की, इसलिए हाई कोर्ट द्वारा मुकदमे की तारीख से ब्याज का आदेश देना पूरी तरह विधिक और न्यायसंगत है।

मुकदमेबाजी की आड़ में हक मारने का प्रयास

शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार के इस विधिक कदम को केवल समय काटने और गरीब भूस्वामियों को परेशान करने वाला कृत्य माना। कहा, हाई कोर्ट द्वारा तय किए जा चुके स्थापित विधिक सिद्धांतों को दोबारा सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देना और मुकदमेबाजी को खींचना, प्रतिवादी भूस्वामियों को उनके वैध मुआवजे से वंचित करने और उन्हें प्रताड़ित (Harassment) करने के अलावा और कुछ नहीं है।

अदालत का अंतिम विधिक आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार की अपील को पूरी तरह खारिज करते हुए निर्देश दिया कि राज्य सरकार भूस्वामियों को उनके बढ़े हुए मुआवजे और ब्याज का भुगतान तो करे ही, साथ ही अदालती आदेश की तारीख से 8 सप्ताह के भीतर ₹2 लाख के जुर्माने की राशि भी सीधे तौर पर प्रतिवादी भूस्वामियों को सौंपे।

विधिक एवं केस सारांश (Case Matrix)

विधिक/मुख्य बिंदुसर्वोच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण विधिक निर्णय (जून 2026)
पीठ (Bench)जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई।
अपीलकर्ता पक्षछत्तीसगढ़ राज्य सरकार (लोक निर्माण विभाग/PWD)।
प्रतिवादी पक्षदुर्ग जिले के पीड़ित भूस्वामी (Landowners)।
विवादित दर और मुआवजारेफरेंस कोर्ट द्वारा तय ₹5,380 प्रति वर्ग मीटर की दर को सही माना गया।
ब्याज का विधिक सिद्धांतसरकार के अवैध कब्जे की स्थिति में, औपचारिक अधिग्रहण से पहले (मुकदमा दायर करने की तारीख से) ही 9% और 15% का ब्याज देय होगा।
अदालत का हर्जानाराज्य सरकार पर ₹2 लाख का कॉस्ट (जुर्माना) लगाया गया, जिसे 8 सप्ताह में चुकाना अनिवार्य है।
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