Friday, June 26, 2026
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Ayodhya Ram Mandir: FIR से शुरू अब PIL; याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों कहा…Ayodhya Ram Mandir मामले की सीबीआई से जांच हो

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में मिलने वाले दान (Donations) में कथित वित्तीय हेराफेरी और गबन के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।

Ayodhya Ram Mandir के दान चोरी मामले में जनहित याचिका

हाईकोर्ट के जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जोयमाल्या बागची की अवकाशकालीन पीठ (Vacation Bench) के समक्ष इस जनहित याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए पेश किया गया था। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे इस मामले को आगामी सोमवार यानी 29 जून को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए अदालत के समक्ष दोबारा मेंशन (उल्लेख) करें।

याचिकाकर्ताओं की विधिक मांग: यूपी सरकार की एसआईटी पर भरोसा नहीं, सीबीआई से हो जांच

यह याचिका सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली के दो अभ्यास करने वाले अधिवक्ताओं— अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर की गई है। याचिका में विधिक मांगें की गई हैं।

FIR और समयबद्ध जांच: राम मंदिर के प्रबंधन और दान में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ एक नियमित आपराधिक मामला (FIR) दर्ज कर समयबद्ध और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

CBI के नेतृत्व में SIT का गठन: याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के मामलों और प्रशासन से जुड़ी वित्तीय गड़बड़ियों की जांच के लिए सीबीआई (CBI) के नेतृत्व में एक बहु-विषयक विशेष जांच दल (Multi-Disciplinary SIT) का गठन किया जाना चाहिए।

यूपी सरकार की कमेटी नाकाफी: याचिका में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा वर्तमान में गठित एसआईटी में केवल प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं, जिनके पास जटिल वित्तीय और आपराधिक जांच का विशिष्ट विधिक अनुभव नहीं है। इसलिए, एक एकीकृत और विशेषज्ञ केंद्रीय एजेंसी द्वारा जांच कराए जाने पर ही आम जनता और करोड़ों भक्तों का भरोसा बहाल होगा।

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सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही: अगर कमियां दूर हैं, तो सोमवार को आएं

गुरुवार को सुनवाई के दौरान जब एक याचिकाकर्ता ने बेंच से आग्रह किया कि उनकी याचिका को नंबर मिल चुका है लेकिन सुनवाई की कोई तारीख नहीं दिख रही है, इसलिए इसे 29 जून के लिए लिस्ट किया जाए, तो पीठ ने कहा, कृपया पहले रजिस्ट्री से संपर्क करें। यदि याचिका में कोई तकनीकी कमी (Deficiency) नहीं है, तो रजिस्ट्री इसे आगे बढ़ाएगी। आप इस मामले को सोमवार (29 जून 2026) को हमारे समक्ष दोबारा मेंशन करें। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को आश्वस्त किया कि याचिका पूरी तरह से त्रुटिहीन है और रजिस्ट्री ने इसे पंजीकृत कर लिया है।

पृष्ठभूमि: ट्रस्ट की शिकायत पर उत्तर प्रदेश सरकार ने गठित की है SIT

यह विवाद तब और गहरा गया जब राम मंदिर ट्रस्ट की खुद की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। यह एसआईटी दान के पैसों में कथित गबन के दावों की जांच कर रही है।

SIT के सदस्य: इस तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति में लखनऊ के मंडल आयुक्त (Divisional Commissioner) विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

याचिकाकर्ताओं की चिंता: याचिका में कहा गया है कि भले ही फंड गायब होने की रिपोर्ट सच हो या झूठ, लेकिन इन खबरों ने उन पीढ़ियों को गहराई से झकझोर दिया है जिन्होंने अयोध्या के गौरव के लिए लंबा संघर्ष किया है। चूंकि यूपी सरकार की एसआईटी ने बिना किसी एफआईआर के केवल प्रारंभिक प्रशासनिक जांच शुरू की है, इसलिए इसमें विधिक पारदर्शिता की कमी है।

इधर….ट्रस्ट के जिम्मेदारों पर शिकंजा, फिलहाल 8 नामजद व कई अज्ञात लोगों पर एफआईआर

अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में हेरफेर व चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अयोध्या के राम जन्मभूमि थाने में 8 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है।

8 मुख्य आरोपियों को हिरासत में लिया गया

प्राथमिकी दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी 8 मुख्य आरोपियों को हिरासत में ले लिया है, जिनमें से दो आरोपियों से चोरी की गई राशि भी बरामद कर ली गई है।

ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज हुई FIR

यह मुकदमा किसी बाहरी व्यक्ति की शिकायत पर नहीं, बल्कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के सदस्य कृष्ण मोहन की लिखित शिकायत पर दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले विपक्षी दलों द्वारा मंदिर के दान में करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए जाने के बाद, ट्रस्ट ने खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बाद 13 जून को सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) का गठन किया था। एसआईटी द्वारा 23 जून को अपनी गोपनीय रिपोर्ट सौंपने के बाद यह कानूनी कदम उठाया गया है।

6 कैशियर सहित 8 लोग नामजद

पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में जिन आठ लोगों को नामजद किया गया है, उनमें से अधिकांश मंदिर में दान और चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारी (कैशियर) हैं। आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा (गिरफ्तार, राशि बरामद), लवकुश मिश्रा (गिरफ्तार, राशि बरामद), मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव, राम शंकर यादव उर्फ ‘टिन्नू’ (ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी का पूर्व ड्राइवर) नामजद तथा इनके अलावा कुछ अन्य अज्ञात लोगों को भी इस आपराधिक साजिश में शामिल होने के संदेह में जांच के दायरे में रखा गया है।

गंभीर धाराओं में मुकदमा, भारी बरामदगी

आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की बेहद गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें धारा 306 में क्लर्क या सेवक द्वारा मालिक की संपत्ति की चोरी, धारा 316(5) में लोक सेवक या एजेंट द्वारा आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust), धारा 317 में चोरी की संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना या छिपाना, धारा 61 और 3(5) में आपराधिक साजिश और संयुक्त आपराधिक दायित्व। इसके साथ ही ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ (Prevention of Corruption Act) की धारा 13(1)(a) भी लगाई गई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों में से अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा के पास से चोरी की गई नकदी बरामद हो चुकी है।

कैसे होती थी चोरी?

राम मंदिर में हर रोज औसतन 2 लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। भारी चढ़ावे के कारण दान पेटियों (हुंडी) से नकदी, सोने-चांदी के सिक्के और आभूषणों की गिनती दो शिफ्टों में की जाती है। आरोपी कर्मचारी इसी गिनती प्रक्रिया से सीधे जुड़े हुए थे।

जांच में सामने आया कि ये कर्मचारी नोटों और आभूषणों की गिनती के दौरान चुपके से नकदी और कीमती सामान गायब कर देते थे। महज 18,000 से 22,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले इन कर्मचारियों ने पिछले कुछ महीनों में अयोध्या और आसपास के इलाकों में 40 लाख से लेकर 1.5 करोड़ रुपये तक की बेनामी संपत्तियां और जमीनें खरीद ली थीं, जिससे एसआईटी का शक गहरा गया।

राजनीतिक बयानबाजी और आगे की राह

इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि “यह भाजपा राज में अन्याय की एक झलक है, जहां छोटी मछलियों को फंसाया जा रहा है और बड़ी मछलियों को बचाने के लिए एसआईटी का सहारा लिया गया।” वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया कि असली दोषियों को बचाने के लिए केवल छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है।

दूसरी तरफ, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने मांग की है कि इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होनी चाहिए क्योंकि यह मामला करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही साफ कर दिया है कि आस्था के केंद्र में किसी भी तरह का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस को आरोपियों के बैंक खातों और संपत्तियों की प्रत्यक्ष जांच करने का कानूनी अधिकार मिल गया है।

केस मैट्रिक्स और विधिक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक श्रेणियां / बिंदुउच्चतम न्यायालय की विधिक स्थिति (25 जून 2026)
संबंधित अदालतभारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जोयमाल्या बागची (खंडपीठ)
याचिकाकर्ताअधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव (जनहित याचिका)
लक्षित प्रतिवादीकेंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
मुख्य विधिक मांगनियमित FIR दर्ज करना और यूपी सरकार की प्रशासनिक SIT के बजाय CBI के नेतृत्व वाली SIT से जांच कराना।
अदालत का अंतरिम निर्देशयाचिकाकर्ताओं को 29 जून 2026 (सोमवार) को मामला दोबारा मेंशन करने की छूट दी।
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