केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल (इलाहाबाद उच्च न्यायालय) |
| मामला नाम | योगेंद्र बनाम यूपी राज्य एवं 3 अन्य (Yogendra v. State of UP and 3 Others) |
| संबंधित नियम | All India Bar Examination Rules, 2010 (Rule 9) एवं BCI Verification Rules, 2015 |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | AIBE पास करने के बाद स्थायी नामांकन में देरी नहीं होनी चाहिए; बिना CoP वाले वकीलों पर अयोग्यता तभी लागू होती है जब उनका नाम गैर-अभ्यासरत सूची में प्रकाशित हो। |
| अदालत का निर्णय | AIBE पास करने पर 4 सप्ताह में Enrolment Number और 2 सप्ताह में पुलिस वेरिफिकेशन पूरा करने का कड़ा निर्देश। |
Permanent Enrolment Number: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल (Bar Council of UP) को निर्देश दिया है कि ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) पास करने वाले वकीलों को रिजल्ट कार्ड प्राप्त होने की तारीख से 4 सप्ताह के भीतर स्थायी एनरोलमेंट नंबर (Permanent Enrolment Number) जारी किया जाए।
इसके साथ ही, न्यायामूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने 7 अगस्त 2026 के अपने आदेश में पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी निर्देश दिया कि वे सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों को निर्देश दें कि बार काउंसिल से फॉर्म मिलने के 2 सप्ताह के भीतर कानून स्नातकों का पुलिस सत्यापन (Police Verification) पूरा किया जाए।
🏛️ हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां एवं कानूनी निष्कर्ष
- 2 साल तक अनंतिम नामांकन (Provisional Enrolment) पर प्रैक्टिस
- शैक्षणिक सत्र 2009-10 या उसके बाद लॉ डिग्री हासिल करने वाले स्नातक यूपी बार काउंसिल से प्राप्त प्रोविजनल एनरोलमेंट सर्टिफिकेट के आधार पर 2 साल तक सभी अदालतों और ट्रिब्यूनलों में प्रैक्टिस करने के हकदार होंगे।
- शर्त: यदि वे 2 साल के भीतर AIBE परीक्षा पास करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें किसी भी अदालत या ट्रिब्यूनल में वकालत करने का अधिकार नहीं होगा।
- इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रैक्टिस के नियम
- प्रोविजनल एनरोलमेंट वाले वकीलों को इलाहाबाद हाई कोर्ट में स्वतंत्र रूप से वकालत करने के लिए हाई कोर्ट के ‘प्रोविजनल एडवोकेट्स रोल’ (Provisional Advocates Roll) पर होना अनिवार्य है।
- जिन वकीलों के पास केवल राज्य बार काउंसिल का प्रोविजनल सर्टिफिकेट है, वे हाई कोर्ट में तभी पेश हो सकते हैं जब वे किसी ऐसे मुख्य वकील के साथ हों जिसका नाम हाई कोर्ट के एडवोकेट्स रोल में दर्ज हो।
- गैर-अभ्यासरत वकीलों (Non-Practicing Advocates) की सूची
- बीसीआई के ‘सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस (वेरिफिकेशन) रूल्स, 2015’ के नियम 20.4 के तहत, जब तक बार काउंसिल गैर-अभ्यासरत वकीलों की सूची प्रकाशित नहीं कर देती, तब तक सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (CoP) के नवीनीकरण के बिना भी वकील प्रैक्टिस जारी रख सकते हैं।
मामला क्या था? (Case Background)
- जयहिंद गौंड (Jaihind Gaund) मामला: यह मुद्दा तब सामने आया जब जयहिंद गौंड नामक एक वकील निष्पादित (Expired) प्रोविजनल एनरोलमेंट के साथ जमानत (Bail) के मामले में बहस करने पहुंचे। जब कोर्ट ने सवाल उठाया, तो उन्होंने बताया कि वे AIBE रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। बाद में उन्होंने अदालत को सूचित किया कि उन्होंने परीक्षा पास कर ली है।
- देरी पर कोर्ट का संज्ञान: अदालत को सूचित किया गया कि AIBE का परिणाम आने के बाद भी राज्य बार काउंसिल से स्थायी नामांकन नंबर प्राप्त करने में महीनों का समय लग जाता है, जिससे नए वकीलों के करियर पर असर पड़ता है।
अदालत के मुख्य निर्देश
- बार काउंसिल के लिए 4 हफ्ते की सीमा: यूपी बार काउंसिल AIBE परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को 4 सप्ताह के भीतर परमानेंट एनरोलमेंट नंबर जारी करे।
- पुलिस वेरिफिकेशन के लिए 2 हफ्ते की सीमा: यूपी डीजीपी यह सुनिश्चित करें कि वकीलों के पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया 2 सप्ताह के भीतर पूरी हो।
- हाई कोर्ट एडवोकेट रोल सेक्शन को निर्देश: 2 साल के भीतर AIBE पास न करने वाले प्रोविजनल वकीलों का नाम नोटिस जारी करने के बाद एडवोकेट रोल से निलंबित या हटा दिया जाए।

