केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी एवं न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया (सर्वोच्च न्यायालय) |
| पक्षकार | आयकर विभाग (Revenue) बनाम सुपरस्टार लिब्रा लिमिटेड (SLL) / स्टार क्रूज (इंडिया) प्रा. लि. |
| संबंधित कानून | Income Tax Act, 1961 — Section 44B (Presumptive Taxation for Non-Resident Shipping Business) & Section 195 |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | 1. क्रूज जहाजों पर दी जाने वाली हॉस्पिटैलिटी और मनोरंजन की सेवाएं ‘Carriage of Passengers’ के मूल उद्देश्य को खत्म नहीं करतीं। 2. ऐसी सहायक सेवाएं प्रदान करने वाले विदेशी क्रूज ऑपरेटर भी धारा 44B के तहत 7.5% अनुमानित टैक्स के हकदार हैं। |
| अदालत का अंतिम निर्णय | आयकर विभाग की अपील खारिज; बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला बरकरार। |
Carriage of Passengers: सुप्रीम कोर्ट ने आयकर अधिनियम (Income Tax Act) के तहत अनिवासी जहाजरानी कंपनियों (Non-Resident Shipping Companies) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है।
न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी (Justice S.V.N. Bhatti) और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया (Justice N.V. Anjaria) की पीठ ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए आयकर विभाग (Revenue) की अपील को खारिज कर दिया और विदेशी क्रूज ऑपरेटर सुपरस्टार लिब्रा लिमिटेड (Superstar Libra Ltd. – SLL) को धारा 44B के तहत अनुमानित कर (Presumptive Taxation) का लाभ दिए जाने को सही ठहराया। शीर्ष अदालत ने माना है कि क्रूज (Cruise) के सफर के दौरान यात्रियों को दी जाने वाली हॉस्पिटैलिटी (खान-पान/आवास) और मनोरंजन (Entertainment) की सुविधाएं, जहाजों द्वारा किए जाने वाले “यात्रियों के परिवहन” (Carriage of Passengers) के मूल उद्देश्य को समाप्त या परिवर्तित नहीं करती हैं।
अदालत ने टिप्पणी की:
“समुद्री यात्रा (Voyage) के दौरान अनुषंगी/सहायक सेवाएं (Ancillary Services) प्रदान करने से अधिनियम की धारा 44B के तहत ‘परिवहन’ (Carriage) का अर्थ समाप्त नहीं हो जाता। असेसिंग ऑफिसर (AO) द्वारा अपनाया गया अर्थ वर्तमान मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में अत्यधिक संकुचित था।”
सुप्रीम कोर्ट का कानूनी विश्लेषण एवं मुख्य बिंदु
- धारा 44B का लाभ और टैक्स दर (7.5% बनाम 25%): आयकर अधिनियम की धारा 44B एक अनुमानित कराधान प्रावधान (Presumptive Taxation Provision) है, जिसके तहत जहाजों का संचालन करने वाली गैर-निवासी (Non-Resident) कंपनियों की कर योग्य आय उनकी सकल प्राप्तियों (Specified Receipts) का केवल 7.5% मानी जाती है। आयकर विभाग ने तर्क दिया था कि SLL की मुख्य गतिविधि परिवहन न होकर पर्यटन और मनोरंजन है, इसलिए उसकी आय पर 7.5% के बजाय 25% की दर से टैक्स लगाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने विभाग के इस रुख को खारिज कर दिया।
- सहायक सेवाएं (Ancillary Services) बनाम मुख्य व्यवसाय: अदालत ने स्पष्ट किया कि समुद्री सफर के दौरान यात्रियों को दी जाने वाली बोर्डिंग, लॉजिंग और मनोरंजन की सुविधाएं केवल सहायक (Incidental/Ancillary) होती हैं। मुख्य व्यवसाय अभी भी यात्रियों को समुद्र के रास्ते एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना (या राउंड ट्रिप कराना) ही रहता है।
- असेसिंग ऑफिसर (AO) का संकीर्ण दृष्टिकोण: विभाग का तर्क था कि चूंकि क्रूज मुंबई से शुरू होकर वापस मुंबई पर ही समाप्त होता है (Round Trip), इसलिए यह सामान्य परिवहन नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यात्रा के दौरान यात्री बीच के बंदरगाहों (Intermediate Ports) पर भी उतर सकते हैं। केवल राउंड-ट्रिप होने या हॉस्पिटैलिटी देने से धारा 44B का दायरा समाप्त नहीं होता।
मामले की पृष्ठभूमि (Case History)
- मामले की शुरुआत
- विदेशी कंपनी SLL की भारतीय एजेंट स्टार क्रूज़ (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड ने धारा 195 के तहत प्रमाणपत्र की मांग की और दावा किया कि SLL की आय धारा 44B के तहत 7.5% की दर से ही कर योग्य है।
- असेसिंग ऑफिसर (AO) ने इस दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि क्रूज की मुख्य गतिविधि मनोरंजन है, न कि विशुद्ध “परिवहन”।
- अपीलीय अदालतों व हाई कोर्ट का रुख
- CIT (Appeals) और ITAT (आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण): दोनों ने असेसिंग ऑफिसर का फैसला पलट दिया और माना कि राउंड-ट्रिप में भी यात्रियों का परिवहन शामिल है और मनोरंजन केवल इसके साथ जुड़ी एक गौण सुविधा है।
- बॉम्बे हाई कोर्ट: हाई कोर्ट ने भी ITAT के निष्कर्षों को सही ठहराया।
- सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मुहर
- आयकर विभाग ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने आयकर विभाग की दलीलों को खारिज करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट, ITAT और CIT(A) के समवर्ती निष्कर्षों (Concurrent Findings) को पूरी तरह से बरकरार रखा।
⚖️ सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय
- अपील खारिज: सुप्रीम कोर्ट ने आयकर विभाग की अपीलों को खारिज कर दिया।
- अनुमानित टैक्स दर (7.5%) लागू: विदेशी क्रूज ऑपरेटर SLL को धारा 44B के तहत 7.5% की रियायती अनुमानित दर से टैक्स चुकाने का पात्र माना गया।

