Wednesday, July 1, 2026
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Rape Case: एक ही महिला ने 10 अलग-अलग पुरुषों पर कर दी FIR…ऐसी क्या बात हुई कि DGP को मिले कड़े दिशानिर्देश, पूरे केस को पढ़कर हीं समझेंगे

Rape Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई के सहर पुलिस स्टेशन में दर्ज दुष्कर्म के एक मामले को खारिज करते हुए बेहद चौंकाने वाला और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

महिला का अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग पुरुष पर केस अनोखा: हाईकोर्ट

हाईकोर्ट के जस्टिस रंजितसिंह राजा भोंसले की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) को इस महिला का पूरा डेटा राज्य के सभी पुलिस थानों में प्रसारित करने का अनोखा निर्देश भी दिया है। कहा, यदि कोई शिकायतकर्ता महिला अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग पुरुषों के खिलाफ एक ही ढर्रे पर लगातार गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज कराती है और फिर अदालती कार्यवाहियों से जानबूझकर गायब रहती है, तो यह कानून का खुला दुरुपयोग और दुर्भावनापूर्ण उत्पीड़न (Manifestly Malafide) है।

आपराधिक न्याय प्रणाली का इस्तेमाल ब्लैकमेल करने का नहीं: अदालत

आपराधिक न्याय प्रणाली का इस्तेमाल किसी बेकसूर नागरिक को ब्लैकमेल करने या डराने के हथियार के रूप में नहीं किया जा सकता। अदालत ने केसरी टूर्स एंड ट्रेवल्स के एक 30 वर्षीय टूर मैनेजर के खिलाफ साल 2019 से लंबित दुष्कर्म (धारा 376) की एफआईआर को पूरी तरह रद्द (Quash) कर दिया।

मामला क्या है?: सिंगापुर-मलेशिया टूर और शादी का झूठा वादा

यह मामला कानूनी दांवपेच, एक कामकाजी महिला के पैटर्न और एक बेकसूर कॉर्पोरेट कर्मचारी के उत्पीड़न से जुड़ा है।

घूमने के दौरान मुलाकात: ठाणे के कलवा निवासी मनोज बालासाहेब धनवड़े (याचिकाकर्ता) केसरी टूर्स में टूर मैनेजर हैं। जून 2019 में मलेशिया और सिंगापुर के एक टूर पैकेज में बेंगलुरु की एक महिला (जो भारतीय स्टेट बैंक में होम लोन विभाग में कार्यरत है) अकेले यात्रा कर रही थी।

दुष्कर्म का आरोप: महिला ने 26 जून 2019 को मुंबई लौटकर एफआईआर (C.R. No. 246/2019) दर्ज कराई। उसने आरोप लगाया कि टूर के दौरान मैनेजर ने उसे शादी का प्रस्ताव दिया और फिर सिंगापुर के होटल में उसकी मर्जी के बिना शारीरिक संबंध बनाए। बाद में मुंबई एयरपोर्ट पर जब उसने शादी के लिए कहा, तो मैनेजर मुकर गया।

बचाव में रखे गए तथ्य: मैनेजर के वकील अर्जुन कदम ने कोर्ट में वाट्सएप चैट और होटल के नियमों के सबूत रखे, जिससे साफ था कि महिला की पूरी सहमति थी। साथ ही यह भी सामने आया कि मैनेजर ने उसी दिन कलवा पुलिस स्टेशन में महिला के खिलाफ गैर-संज्ञेय (NC) शिकायत दर्ज कराई थी कि महिला उसे शादी न करने पर आत्महत्या करने की धमकी दे रही थी।

कोर्ट के सामने खुला राज: 2011 से 2022 तक 10 एफआईआर का ‘पैटर्न’

जब कोर्ट ने मामले की गहराई से जांच की और सहर पुलिस स्टेशन की पुलिस निरीक्षक सुषमा पंढरीनाथ माली ने हलफनामा दाखिल किया, तो महिला का एक हैरान करने वाला इतिहास सामने आया। यह महिला लगातार समन और नोटिस से बच रही थी (उसने 8 पते और 5 मोबाइल नंबर बदल रखे थे)। कोर्ट ने पाया कि वह 2011 से अब तक 10 एफआईआर अलग-अलग पुरुषों पर दर्ज करा चुकी थी।

पहला विवाह (2011): पहले पति और ससुराल वालों पर बेंगलुरु में धारा 498-A (दहेज उत्पीड़न) का केस। कोर्ट से आरोपी बरी हुए क्योंकि महिला गवाही देने ही नहीं आई।

टूर पर पहला केस (2015): उत्तर भारत के टूर पर मिले संतोष नामक व्यक्ति पर बेंगलुरु में धारा 376 (दुष्कर्म) का केस। आरोप हूबहू वर्तमान केस जैसे थे।

तीसरी एफआईआर (2015): मारपीट और धमकी का केस। आरोपी बरी हुए क्योंकि महिला कोर्ट नहीं आई।

चौथी एफआईआर (2017): कुमार गौरव नामक व्यक्ति पर दुष्कर्म और जान से मारने के प्रयास (307) का केस।

पांचवीं एफआईआर (2019): वर्तमान केस (केसरी टूर्स के मैनेजर के खिलाफ)।

छठी एफआईआर (2020): रूस की टिकट बुक कराते समय मिले मोहम्मद नाजिम पर वाट्सएप पर प्यार का नाटक कर दुष्कर्म करने का केस। आरोपी बरी हुए।

सातवीं एफआईआर (2020): छठी एफआईआर के महज 24 दिन बाद बेंगलुरु के बसावनगुड़ी में एक अन्य व्यक्ति पर छेड़छाड़ का केस।

आठवीं एफआईआर (2020): एक पुलिस अधिकारी विश्वनाथ पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप।

नौवीं एफआईआर (2021): एक बैंक अधिकारी अभिषेक अडिगा पर यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म का केस।

दूसरा विवाह (2022): दूसरे पति विवेक पी.के. और उसके परिवार पर फिर से धारा 498-A का केस। इस केस को कर्नाटक हाई कोर्ट ने सितंबर 2024 में रद्द कर दिया था और कर्नाटक पुलिस प्रमुख को इस महिला के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

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हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण: यह सम्मति थी, दुष्कर्म नहीं

जस्टिस रंजितसिंह राजा भोंसले ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले [स्टेट ऑफ हरियाणा बनाम भजन लाल (1992)] के सिद्धांतों (कैटेगरी 5 और 7) को लागू करते हुए इस मुकदमे को पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण और झूठा माना:

वैवाहिक स्थिति को छुपाया: महिला ने केस दर्ज कराते समय छुपाया कि वह पहले से शादीशुदा थी। जब वह कानूनी रूप से विवाहित थी, तो किसी अन्य से ‘शादी का कानूनी वादा’ लागू ही नहीं हो सकता था।

सहमतिजन्य संबंध (Consensual Relationship): कोर्ट ने कहा कि महिला 34 वर्ष की उच्च शिक्षित, आत्मनिर्भर कामकाजी महिला है जो दो बार शादी कर चुकी है और देश-विदेश घूम चुकी है। एफआईआर के तथ्यों से भी साफ है कि दोनों मैरिज रजिस्ट्रार के दफ्तर भी गए थे, जिसका मतलब है कि बाद में किसी कारणवश रिश्ता टूटा, न कि शुरुआत से धोखा देने की नीयत थी।

ब्लैकमेलिंग का हथकंडा: कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि महिला का एक ही ढर्रे पर बार-बार केस दर्ज कराना और फिर गवाही से गायब हो जाना यह दिखाता है कि उसका मकसद केवल पुरुषों को प्रताड़ित करना और उनसे पैसे वसूलना (Extortion/Blackmail) था।

महाराष्ट्र पुलिस को हाई कोर्ट के सख्त और अभूतपूर्व निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने केवल केस रद्द नहीं किया, बल्कि भविष्य के लिए बड़े सुरक्षात्मक निर्देश जारी किए।

1.डेटाबेस में दर्ज होगी जानकारी:तत्काल प्रभाव से.

महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) को आदेश दिया गया है कि इस महिला की पूरी कुंडली, उसके द्वारा दर्ज कराए गए सभी 10 मुकदमों की सूची और विवरण राज्य के सभी पुलिस स्टेशनों के रिकॉर्ड और डेटाबेस में सर्कुलेट (प्रसारित) किया जाए।

2.सजगता और कड़ा पहरा:

भविष्य में यदि यह महिला महाराष्ट्र के किसी भी कोने में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई नई आपराधिक शिकायत या एफआईआर दर्ज कराने पहुंचती है, तो पुलिस अधिकारी अत्यंत सतर्कता बरतेंगे।

3.अनिवार्य प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry):बिना जांच एफआईआर पर रोक.

यदि महिला कोई शिकायत देती है, तो संबंधित पुलिस स्टेशन कानून के स्थापित सिद्धांतों के तहत तुरंत एफआईआर दर्ज नहीं करेगा। सबसे पहले मामले की गहन ‘प्रारंभिक जांच’ की जाएगी, और शिकायत पूरी तरह सही पाए जाने पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।

केस मैट्रिक्स: बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला (Case Summary)

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांबॉम्बे उच्च न्यायालय की विधिक व्यवस्था (2026)
संबंधित अदालतबॉम्बे उच्च न्यायालय (मुंबई पीठ)
माननीय न्यायाधीशजस्टिस रंजितसिंह राजा भोंसले (एकल पीठ)
याचिकाकर्ता (आरोपी)मनोज बालासाहेब धनवड़े (टूर मैनेजर, केसरी टूर्स)
शिकायतकर्ता का इतिहास2011 से 2022 के बीच कर्नाटक और महाराष्ट्र में कुल 10 एफआईआर दर्ज।
लागू विधिक सिद्धांतBhajan Lal Case (दुर्भावनापूर्ण मुकदमेबाजी) और Section 90 IPC (सहमति बनाम धोखा)
अदालत का अंतिम आदेशटूर मैनेजर के खिलाफ दुष्कर्म का केस पूरी तरह निरस्त (Quashed)
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