मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| अदालत | कर्नाटक उच्च न्यायालय (Karnataka High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | न्यायमूर्ति सूरज गोविंदराज (Justice Suraj Govindaraj) |
| संबंधित कानून | सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 की धारा 22 |
| केंद्र का पक्ष | पति की सहमति के बिना फ्रोजन स्पर्म या Donor Sperm का उपयोग शादी के रहते कानूनी रूप से अमान्य है। |
Infertile Of Husband: कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण विधिक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि कोई महिला इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रक्रिया के लिए अपने पति के शुक्राणु (Sperm) का उपयोग केवल उसकी सहमति से ही कर सकती है। इसके अलावा, जब तक पति का बांझपन या बंध्यता (Infertility) साबित न हो जाए, तब तक वह किसी दाता के शुक्राणु (Donor Sperm) का उपयोग भी नहीं कर सकती।
यह प्रस्तुति अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) अरविंद कामथ द्वारा एक महिला की याचिका के विरोध में दी गई, जिसमें उसने बेंगलुरु स्थित अपने अलग रह रहे पति की सहमति के बिना उसके फ्रोजन स्पर्म (Frozen Sperm) का उपयोग करने की अनुमति मांगी थी।
केंद्र सरकार और अदालत की प्रमुख दलीलें
- पति की सहमति के बिना IVF असंभव
- एएसजी अरविंद कामथ ने अदालत में कहा:“जब तक महिला वैवाहिक बंधन (Marriage) में है, वह अपने पति की लिखित सहमति के बिना उसके शुक्राणु का उपयोग नहीं कर सकती और न ही दाता का शुक्राणु (Donor Sperm) ले सकती है। याचिकाकर्ता के पास केवल एक ही विकल्प बचता है कि वह एक ‘एकल महिला’ (Single Woman) के रूप में यह प्रक्रिया अपनाए (जिसके लिए तलाक या विधवा होना अनिवार्य है)।”
- ART कानून का सख्त प्रावधान
- सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 [ART Act] की धारा 22 का हवाला दिया गया, जो यह अनिवार्य करती है कि IVF क्लीनिक दोनों पक्षों (पति और पत्नी) की लिखित और सूचित सहमति के बिना कोई भी प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकते।
- अदालत की ‘कैच-22’ टिप्पणी
- सुनवाई कर रहे न्यायाधीश सूरज गोविंदराज (Justice Suraj Govindaraj) ने स्थिति को बेहद जटिल (Catch-22) बताते हुए कहा:“विधायिका ने इस मुद्दे पर विचार करने के बाद ही इसे सीमित किया है। यदि आप इस अधिनियम (ART Act) का लाभ उठाना चाहती हैं, तो आपको इसे उसी रूप में स्वीकार करना होगा जैसा यह कानून है, न कि वैसा जैसा आप इसे बनाना चाहती हैं।”
मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
- विवाह और IVF का प्रयास: महिला और उसके पति का विवाह 2022 में हुआ था। गर्भधारण न होने पर दोनों ने IVF क्लीनिक का रुख किया और 6 बार इलाज कराया। इस दौरान दोनों ने अपने युग्मक (Gametes – स्पर्म और एग्स) फ्रीज करवा दिए थे।
- वैवाहिक विवाद: 2 साल बाद दोनों के बीच मतभेद शुरू हो गए और वे अलग रहने लगे। पति ने प्रताड़ना (Cruelty) के आधार पर तलाक की अर्जी दाखिल की है, जो अभी शुरुआती चरण में है।
- संपत्ति का विवाद: पति के वकील चिन्मय जे. मिर्गी ने तर्क दिया कि यदि महिला विवाह में रहते हुए किसी तीसरे पक्ष (Donor) के स्पर्म से बच्चे को जन्म देती है, तो वह बच्चा कानूनी रूप से पति की संपत्ति पर अपना दावा ठोक सकता है, जिससे उसकी पहली शादी के बच्चे के अधिकार भी प्रभावित होंगे।
- महिला का पक्ष: महिला के वकील मीर परवेज अहमद ने तर्क दिया कि महिला बच्चे के लिए पति या उसकी संयुक्त संपत्ति पर कोई दावा न करने का वचनपत्र (Undertaking) देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि पति तलाक के लिए दबाव बनाने के लिए सहमति रोक रहा है।
अदालत का अगला कदम
जब महिला के वकील ने पूछा, “क्या माँ बनने के लिए तलाक देना ही मेरे पास एकमात्र विकल्प है?”, तो पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 के लिए स्थगित कर दी। अदालत ने महिला के वकील को ऐसे कानूनी व्याख्याओं और प्रावधानों को रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया जो उसके पक्ष का समर्थन कर सकें।

