BPSC Success Story: आमतौर पर लोग पहली ही बार में कोई बड़ी सरकारी नौकरी मिलते ही आगे की तैयारी छोड़ देते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के एक छोटे से गांव में जन्मी श्रद्धा पांडे के लिए यह सिर्फ एक शुरुआत थी, मंजिल नहीं।
प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज क्षेत्र के पचरास गांव में जन्मी श्रद्धा पांडे
श्रद्धा पांडे की यह कहानी साबित करती है कि सफलता इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आपकी शुरुआत कहाँ से हुई थी, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी जिद कितनी बड़ी है! उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज क्षेत्र के पचरास गांव में जन्मी श्रद्धा ने अपने पहले ही प्रयास में UPPSC की परीक्षा पास कर असिस्टेंट कमिश्नर (GST) का पद हासिल कर लिया था। जहां कई लोग इस कामयाबी के बाद ठहर जाते, वहीं श्रद्धा ने नौकरी के साथ-साथ अपनी पढ़ाई और कोशिशें जारी रखीं।
सेल्फ-स्टडी और इंटरनेट का सही इस्तेमाल (तैयारी की सिंपल स्ट्रेटेजी)
श्रद्धा की इस सफलता की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने किसी भी महंगी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया, बल्कि पूरी तैयारी खुद के दम पर की।
फ्री इंटरनेट लेक्चर्स: उन्होंने कोचिंग के बजाय इंटरनेट पर उपलब्ध मुफ्त वीडियो लेक्चर्स, किताबों और अखबारों (Newspapers) से अपनी पढ़ाई की।
कॉन्सेप्ट क्लियरिटी: इसी रणनीति से उन्होंने अपने विषयों पर मजबूत पकड़ (Conceptual Clarity) बनाई।
प्रैक्टिस पर जोर: उन्होंने पिछले सालों के प्रश्न पत्र (Previous Years’ Question Papers) हल किए, मेन्स के लिए आंसर राइटिंग का जमकर अभ्यास किया और कई मॉक टेस्ट दिए।
असफलताओं को बनाया सफलता की सीढ़ी
श्रद्धा का यह सफर इतना आसान नहीं था, उन्हें भी शुरुआती दौर में असफलताओं का सामना करना पड़ा। वह UPSC प्रीलिम्स परीक्षा पास करने से महज 4 नंबर से चूक गईं। इसके अलावा उन्हें उत्तराखंड PCS परीक्षा में भी असफलता हाथ लगी। आमतौर पर ऐसे मोड़ पर लोग निराश हो जाते हैं, लेकिन श्रद्धा का नजरिया अलग था। उनका मानना था कि असफलता सिर्फ एक फीडबैक (गलतियों को सुधारने का जरिया) है। उन्होंने कहा था, “असफलता सिर्फ कुछ अंकों की कमी नहीं होती (कि आप हिम्मत हार जाएं)। इसलिए उम्मीद खोने के बजाय, अगली बार और दोगुनी मेहनत करें।”
आखिरकार रंग लाई मेहनत: बिहार में लहराया परचम
उनका यही सकारात्मक नजरिया और कभी न हार मानने वाला जज्बा आखिरकार रंग लाया। श्रद्धा पांडे ने BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (CCE) में 593 अंक हासिल कर पूरे राज्य में पहली रैंक (Rank 1) का इतिहास रच दिया। इस ऐतिहासिक कामयाबी से उनके पूरे गांव और परिवार में जश्न का माहौल है।
बीपीएससी टॉपर के बारे में अब तक के सफर पर एक नजर
पृष्ठभूमि और शिक्षा
निजी परिचय: श्रद्धा पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के रानीगंज क्षेत्र के पचरास गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता पेशे से एक वकील/किसान हैं।
प्रारंभिक जीवन: वह एक बेहद साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी और कॉलेज के दिनों से ही सिविल सेवा में जाने का दृढ़ निश्चय कर लिया था।
कॉलेज के दिन और विषय: श्रद्धा ने साल 2021 में इतिहास (History) और अंग्रेजी साहित्य (English Literature) विषयों के साथ अपना ग्रेजुएशन पूरा किया।
शुरुआती लक्ष्य: कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का मन बना लिया था और ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी होते ही उन्होंने खुद को पूरी तरह से सिविल सर्विस की तैयारी में झोंक दिया।
सेल्फ-स्टडी रूटीन: श्रद्धा के पिता के अनुसार, वह बिना किसी बड़ी कोचिंग के घर पर ही रोजाना 10 से 12 घंटे (कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 14 घंटे तक) लगातार पढ़ाई करती थीं।
सीमित संसाधनों में सफलता: बिना किसी महंगे कोचिंग हब (जैसे दिल्ली या प्रयागराज) में जाए, सिर्फ इंटरनेट पर उपलब्ध फ्री लेक्चर्स, टेस्ट सीरीज़ और किताबों के जरिए उन्होंने यह मुकाम हासिल कर साबित किया कि संसाधनों की कमी कभी आपके सपनों के आड़े नहीं आ सकती।
मौजूदा निवास: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षा क्लियर करने के बाद फिलहाल वे अपनी नौकरी के सिलसिले में लखनऊ में रह रही थीं।
अब तक का सफर और उपलब्धियां
UPPSC में सफलता: BPSC में टॉप करने से पहले ही, श्रद्धा ने उत्तर प्रदेश की सिविल सेवा परीक्षा (UPPSC 2024) अपने पहले ही प्रयास में पास कर ली थी। उसमें उन्होंने EWS कैटेगरी के तहत 153वीं रैंक हासिल की थी और वर्तमान में वह असिस्टेंट कमिश्नर (कमर्शियल टैक्स) के पद पर कार्यरत हैं।
BPSC में शीर्ष स्थान: अपनी निरंतर तैयारी को जारी रखते हुए, उन्होंने BPSC 70वीं CCE में कुल 593 अंक प्राप्त कर पूरे राज्य में टॉप किया है। उन्हें बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) में एसडीएम (SDM) का पद मिलने की प्रबल संभावना है।
UPPSC में 153वीं रैंक: BPSC टॉप करने से पहले उन्होंने उत्तर प्रदेश सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा (UPPSC) में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कैटेगरी के तहत 153वीं रैंक हासिल की थी。 इस रैंक के आधार पर उनका चयन असिस्टेंट कमिश्नर (कमर्शियल टैक्स/GST) के पद पर हुआ था।
BPSC में 593 अंक और टॉप रैंक: अपनी पहली सरकारी नौकरी की व्यस्तताओं के बीच भी उन्होंने पढ़ाई नहीं रोकी। उन्होंने 25 से 30 अप्रैल 2026 तक आयोजित की गई BPSC 70वीं मुख्य परीक्षा और उसके बाद इंटरव्यू राउंड में हिस्सा लिया। अंतिम परिणाम में 593 नंबर के साथ उन्होंने शीर्ष स्थान पाया और अब बिहार प्रशासनिक सेवा में उनका SDM बनना लगभग तय है।
उनकी सफलता के मूल मंत्र (Key Strategy)
सकारात्मक दृष्टिकोण: वह यूपीएससी प्रीलिम्स में सिर्फ 4 नंबरों से फेल हुई थीं, लेकिन निराश होने के बजाय उन्होंने उसे अपनी ताकत बनाया और गलतियों को सुधारा।
रिवीजन और मेमोरी पर फोकस: उन्होंने पढ़ी हुई चीज़ों को लंबे समय तक याद रखने के लिए अपनी खुद की कस्टमाइज्ड रिवीजन साइकिल तैयार की थी।
आंसर राइटिंग पर पकड़: मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए उन्होंने पुराने पेपर्स को टाइम-लिमिट के अंदर लिखने की कड़ी प्रैक्टिस की थी, जिसने उन्हें मेन्स में बेहतरीन स्कोर दिलाने में मदद की।
तैयारी की अनोखी रणनीति
श्रद्धा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने इस मुकाम तक पहुँचने के लिए किसी भी महंगी कोचिंग का सहारा नहीं लिया। उनकी तैयारी के प्रमुख स्तंभ इस प्रकार थे।
संसाधन का सरलीकरण (Resource Minimalism): आज के दौर में जब अभ्यर्थी ढेरों पीडीएफ और टेलीग्राम चैनल्स के बीच उलझ जाते हैं, श्रद्धा ने केवल मानक किताबों (जैसे- लक्ष्मीकांत, स्पेक्ट्रम, NCERT, लूसेंट) और समाचार पत्रों पर भरोसा किया।
पैरेलल तैयारी: उन्होंने UPPSC और BPSC को एक साथ ‘पैरेलल प्रोजेक्ट’ की तरह चलाया, जिससे उन्हें दोनों परीक्षाओं में सफलता मिली।
आंसर राइटिंग और फीडबैक: मेन्स परीक्षा के लिए उन्होंने डेटा, डायग्राम और डाइमेंशन्स आधारित आंसर राइटिंग की। उनका मानना है कि असफलता अंत नहीं है, बल्कि वह एक फीडबैक की तरह है जिससे सीखकर अपनी रणनीति में सुधार करना चाहिए।

