UPSC Success Story: अगर आपके हौसलों में उड़ान है, तो समाज की रूढ़िवादी बेड़ियां भी आपका रास्ता नहीं रोक सकतीं, मध्य प्रदेश की अंजलि सोंधिया (Anjali Sondhiya) की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है।
अंजलि की UPSC Success Story चाइल्ड मैरिज से शुरू होती है
अंजलि की यह सफलता केवल एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक मां के अदम्य साहस, समाज के तानों पर बेटी की जीत और विपरीत हालातों को घुटने टेकने पर मजबूर करने की महागाथा है। एक समय था जब अंजलि की किस्मत बाल विवाह (Child Marriage) के मंडप में कैद होने वाली थी, शादी के कार्ड तक छप चुके थे। लेकिन आज वह भारतीय वन सेवा (IFoS) में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 9 हासिल कर एक बेहद प्रतिष्ठित अधिकारी बन चुकी हैं।
जब छप चुके थे शादी के कार्ड: एक मां का ऐतिहासिक फैसला
मध्य प्रदेश के एक पारंपरिक ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी अंजलि की नियति भी वही तय की जा रही थी, जो वहां की आम लड़कियों की होती है। जब वह महज एक किशोरी थीं, तभी सामाजिक दबाव में उनका बाल विवाह तय कर दिया गया। रिश्तेदारों को बुलाने के लिए शादी के निमंत्रण पत्र तक बंटने के लिए तैयार थे। अंजलि के सपनों का अंत बिल्कुल करीब था। लेकिन ठीक उसी मोड़ पर उनकी मां ने वह किया, जिसकी कल्पना भी उस रूढ़िवादी समाज में किसी ने नहीं की थी।
समाज के खिलाफ बगावत: अंजलि की मां ने पूरे समुदाय और परिवार के कड़े विरोध के बावजूद, अकेले दम पर उस तय हो चुकी शादी को तोड़ दिया।
बेटी को दिया पंख: मां ने अंजलि के हाथ में चूड़ियों की जगह किताबें थमाईं और एक ही संदेश दिया—तुम स्कूल जाओगी, अपनी पढ़ाई पूरी करोगी और अपने भविष्य का फैसला खुद अपने पैरों पर खड़े होकर करोगी। यह सिर्फ एक सगाई का टूटना नहीं था, बल्कि अंजलि की नई जिंदगी का आगाज था।
लगातार 3 विफलताएं, पिता का साया उठना और समाज के ताने
अंजलि पढ़ाई में शुरू से ही बेहद गंभीर थीं। एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों को अपना हमसफर बनाकर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी (UPSC) की तैयारी शुरू की। लेकिन सिविल सर्विसेज की राह कांटों भरी थी और अंजलि के सब्र की अभी और बड़ी परीक्षाएं बाकी थीं:
लगातार तीन बार फेल: अंजलि ने एक के बाद एक लगातार तीन बार यूपीएससी की परीक्षा दी, लेकिन तीनों ही बार उन्हें असफलता हाथ लगी।
पिता का आकस्मिक निधन: इसी संघर्ष के बीच अंजलि के पिता का साया उनके सिर से उठ गया। इस व्यक्तिगत क्षति ने उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ कर रख दिया। ‘मैंने तो पहले ही कहा था’ का शोर: अंजलि की हर विफलता के साथ समाज के वही पुराने रूढ़िवादी लोग फिर सक्रिय हो गए। मां-बेटी को ताने मिलने लगे कि ‘पढ़ाई-लिखाई छोड़कर इसकी शादी कर दो, यही इसकी किस्मत है।’ इस मोड़ पर आकर किसी के लिए भी हार मान लेना सबसे आसान रास्ता था।
मां के भरोसे की ढाल और चौथी बार में ऐतिहासिक फतेह
अंजलि जब भी टूटतीं या पढ़ाई छोड़ने का विचार उनके मन में आता, उन्हें अपनी मां का वह चेहरा याद आता जिसने पूरी दुनिया से लड़कर उनके सपनों को बचाया था। अंजलि को लगने लगा कि अब यह लड़ाई सिर्फ उनकी अपनी कामयाबी की नहीं है, बल्कि उनकी मां के उस ऐतिहासिक फैसले को सही साबित करने की है। वह अपनी मां के भरोसे को टूटने नहीं दे सकती थीं।
इसी कसम के साथ अंजलि ने अपनी बची-खुची ताकत समेटी और चौथे प्रयास के लिए जी-जान लगा दी। जब परिणाम आया, तो हर आंख नम थी और ताने देने वालों के मुंह हमेशा के लिए बंद हो चुके थे। अंजलि ने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि भारतीय वन सेवा (IFoS) परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल कर इतिहास रच दिया।
अंजलि सोंधिया: प्रेरणादायी सफरनामा (Success Profile)
| व्यक्तिगत और विधिक श्रेणियां | अंजलि सोंधिया की गौरवगाथा के मुख्य आंकड़े |
| नाम | अंजलि सोंधिया (Anjali Sondhiya) |
| गृह राज्य | मध्य प्रदेश (MP) |
| सबसे बड़ा संकट | छप चुके शादी के कार्ड के बीच तय बाल विवाह (Child Marriage) |
| संकटमोचक | उनकी साहसी मां, जिन्होंने समाज से लड़कर सगाई तोड़ी। |
| परीक्षा और रैंक | भारतीय वन सेवा (IFoS) परीक्षा, ऑल इंडिया रैंक (AIR): 9 |
| सफलता का प्रयास | चौथा प्रयास (लगातार 3 विफलताएं और पिता को खोने के बाद) |
| जीवन का टर्निंग पॉइंट | मां का वह एक फैसला, जिसने बेटी को चूल्हे-चौके से निकाल कर अफसर बना दिया। |

