Wednesday, July 1, 2026
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Professor VN Parthiban: मिलिए 150 से अधिक डिग्रियों वाले चेन्नई के इस प्रोफेसर से…एक मां से किया वादा और अनोखा सफर कर देगा हैरान, पढ़ें

Professor VN Parthiban: 70 साल के हो चुके चेन्नई के प्रोफेसर वी.एन. पार्थिबन के पास 150 से अधिक डिग्रियां और सर्टिफिकेट्स का अंबार है, लेकिन सीखने की उनकी भूख आज भी कम नहीं हुई है।

Professor VN Parthiban की यह कहानी कई चीजें सिखाती हैं

प्रोफेसर पार्थिबन की यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर मन में कुछ सीखने की सच्ची जिद हो, तो इंसान अपनी सीमाओं से परे जाकर भी इतिहास रच सकता है। ज्यादातर लोगों के लिए परीक्षाएं केवल एक बाधा होती हैं जिसे पार करके वे आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन चेन्नई के प्रोफेसर वी.एन. पार्थिबन के लिए परीक्षाएं ही उनकी जिंदगी का तरीका बन चुकी हैं। जब उनके साथी अपने करियर की प्लानिंग कर रहे थे, तब पार्थिबन डिग्रियां बटोरने में व्यस्त थे।

चलता-फिरता इनसाइक्लोपीडिया से मशहूर हैं Professor VN Parthiban

प्रोफेसर पार्थिबन ने यह सब उन्होंने किसी नाम या शोहरत के लिए नहीं किया, बल्कि अपनी पहली डिग्री में बमुश्किल पास होने के बाद अपनी मां से किए एक वादे को निभाने के लिए किया था। बस वही एक वादा उनके जीवन का सबसे बड़ा मकसद बन गया—पढ़ाई करना, फॉर्म भरना, परीक्षा देना और फिर यही प्रक्रिया दोहराना। स्थानीय लोग उन्हें “डिग्रियों का भंडार” और “चलता-फिरता इनसाइक्लोपीडिया” (Walking Encyclopedia) भी कहते हैं।

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पढ़ाई ही है रोज का काम (Daily Routine)

प्रोफेसर पार्थिबन ने सीखने को अपनी दिनचर्या बना लिया है। साल 1981 से वे लगातार अपनी पढ़ाई, टीचिंग, और पारिवारिक जीवन के बीच तालमेल बिठाते आ रहे हैं।

वेतन का 90% हिस्सा पढ़ाई में: वे अपनी इस अनोखी हॉबी का खर्च खुद उठाते हैं। उनकी सैलरी का करीब 90% हिस्सा सिर्फ कॉलेज की फीस, किताबों और परीक्षा के खर्चों में चला जाता है।

वर्तमान पद: वे वर्तमान में चेन्नई के आरकेएम विवेकानंद कॉलेज (RKM Vivekananda College) में एसोसिएट प्रोफेसर और कॉमर्स डिपार्टमेंट के हेड (HOD) हैं। उन्होंने अपनी पहली डिग्री के ठीक एक साल बाद, यानी 1982 में पढ़ाना शुरू कर दिया था।

कड़ा टाइम-टेबल: वे रोज सुबह 5 बजे उठ जाते हैं और देर रात करीब 11:30 बजे तक पढ़ाई करते हैं। पिछले कई दशकों से उनका यही रूटीन है।

संडे का आराम: वे रविवार का दिन भी रिसर्च या परीक्षाओं में बिताते हैं। पढ़ाई से ब्रेक के नाम पर वे केवल रविवार की शाम को तमिल कवि ‘कन्नदासन’ के गाने सुनते हैं।

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डिग्रियों का पूरा कैटलॉग

उनकी हासिल की गई मुख्य शैक्षणिक योग्यताओं की सूची किसी यूनिवर्सिटी के कोर्स मेन्यू जैसी दिखती है।

  • मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) की 13 डिग्रियां
  • मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की 14 डिग्रियां
  • मास्टर ऑफ लॉ (LLM – अलग-अलग शाखाएं) की 13 डिग्रियां
  • मास्टर ऑफ फिलॉसफी (MPhil) की 12 डिग्रियां
  • मास्टर ऑफ कॉमर्स (MCom) की 8 डिग्रियां
  • मास्टर ऑफ साइंस (MSc) की 4 डिग्रियां
  • प्रोफेशनल कोर्सेज की 20, सर्टिफिकेट कोर्सेज की 11 और पीजी डिप्लोमा कोर्सेज की 9 डिग्रियां।
  • मौजूदा पढ़ाई: वे वर्तमान में मैनेजमेंट में पीएचडी (PhD) और कॉर्पोरेट लॉ में मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहे हैं।

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भारी कीमत और परिवार का साथ

लगातार दशकों तक की गई इस बेहद कठिन और गहन पढ़ाई का असर प्रोफेसर पार्थिबन की सेहत पर भी पड़ा है। अत्यधिक पढ़ाई के तनाव के कारण उनकी याददाश्त (Memory) पर असर पड़ा है, जिससे वे कभी-कभी लोगों के चेहरे या रास्ते पहचानने में भी संघर्ष करते हैं। इसके बावजूद वे रुकने को तैयार नहीं हैं।

इस पूरे सफर में उनके परिवार का उन्हें पूरा साथ मिला। उनकी पत्नी एम. सेल्वाकुमारी खुद एक शिक्षाविद हैं और उनके पास भी अपनी 9 डिग्रियां हैं। वे पार्थिबन की इस ज्ञान यात्रा को बखूबी समझती हैं और देर रात तक चलने वाले स्टडी सेशन्स में हमेशा उनके साथ खड़ी रहती हैं।

प्रोफेसर पार्थिबन की कहानी यह सोचने पर मजबूर करती है कि डिग्रियां सिर्फ नौकरी पाने का जरिया नहीं हैं, बल्कि ज्ञान का एक अंतहीन समंदर हैं।

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डिग्रियों से जुड़ी अनोखी चुनौतियां

इतनी सारी डिग्रियां हासिल करने के बाद प्रोफेसर पार्थिबन को रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ बहुत ही अजीब और मजेदार स्थितियों का सामना करना पड़ता है।

एग्जामिनर्स के लिए मुसीबत: कई बार जब वे परीक्षा देने परीक्षा हॉल में बैठते हैं, तो वहां ड्यूटी पर मौजूद इनविजिलेटर (परीक्षा नियंत्रक) या हॉल के मुख्य परीक्षक उनके ही पढ़ाए हुए छात्र निकल आते हैं. ऐसे में छात्र अपने ही प्रोफेसर को एक छात्र के रूप में परीक्षा देते देख चौंक जाते हैं।

गलत फॉर्म भरने की आदत: एक इंटरव्यू में उन्होंने हंसते हुए बताया था कि लगातार दशकों से केवल परीक्षा के फॉर्म भरने और पढ़ाई करने के कारण, कई बार वे अनजाने में सही विषय की जगह किसी दूसरे विषय का फॉर्म भर देते हैं. लेकिन वे उसे भी एक चुनौती की तरह लेते हैं और उसकी पढ़ाई शुरू कर देते हैं।

विजिटिंग कार्ड का आकार: प्रोफेसर पार्थिबन के पास इतनी शैक्षणिक योग्यताएं हैं कि अगर वे अपने नाम के आगे अपनी सारी डिग्रियां लिखना चाहें, तो उनका विजिटिंग कार्ड (Visiting Card) एक छोटी किताब के आकार का हो जाएगा! इसलिए वे केवल अपनी मुख्य डिग्रियों का ही जिक्र करते हैं।

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उनकी इस यात्रा का मुख्य संदेश

प्रोफेसर पार्थिबन की कहानी हमें जीवन के कुछ बेहद जरूरी सबक सिखाती है।

उम्र सिर्फ एक नंबर है: 60 वर्ष की उम्र में भी जहाँ लोग रिटायरमेंट और आराम के बारे में सोचते हैं, वे आज भी एक युवा छात्र की तरह उत्साह के साथ हर रोज घंटों पढ़ाई करते हैं।

सीखने की कोई सीमा नहीं: उन्होंने यह साबित कर दिया है कि इंसान चाहे किसी भी ऊंचे पद (जैसे कॉमर्स डिपार्टमेंट के हेड) पर क्यों न पहुँच जाए, सीखने की ललक कभी खत्म नहीं होनी चाहिए।

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13 कानून की डिग्रियां (Master of Law – LLM)

पार्थिबन ने कानून (Law) के एक या दो नहीं, बल्कि 13 अलग-अलग क्षेत्रों में मास्टर डिग्रियां हासिल की हैं।

मैनेजमेंट का तरीका: भारतीय कानून के तहत आप एक बार में एक ही रेगुलर (Regular) कोर्स कर सकते हैं, इसलिए उन्होंने इन डिग्रियों को अलग-अलग वर्षों में और कई यूनिवर्सिटीज के डिस्टेंस एजुकेशन (दूरस्थ शिक्षा) व ईवनिंग कोर्सेज के जरिए पूरा किया।

विविधता: उन्होंने क्रिमिनल लॉ, लेबर लॉ, इंटरनेशनल लॉ, टैक्स लॉ और मानवाधिकार (Human Rights) जैसे बिल्कुल अलग-अलग कानूनी क्षेत्रों की पढ़ाई की ताकि हर बार कुछ नया सीखने को मिले। वर्तमान में भी वे ‘कॉर्पोरेट लॉ’ में एक और मास्टर डिग्री कर रहे हैं।

14 बिजनेस डिग्रियां (MBA)

एक आम इंसान के लिए एक बार एमबीए (MBA) करना ही बड़ी बात होती है, लेकिन प्रोफेसर पार्थिबन के पास 14 MBA डिग्रियां हैं।

क्यों किया ऐसा?: वे खुद कॉमर्स के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष (HOD) हैं, इसलिए बिजनेस और मैनेजमेंट से जुड़े विषयों पर उनकी पहले से अच्छी पकड़ थी। उन्होंने मार्केटिंग, फाइनेंस, ह्यूमन रिसोर्स (HR), ऑपरेशंस, और इंटरनेशनल बिजनेस जैसी लगभग हर उपलब्ध विशेषज्ञता (Specialization) में MBA की डिग्री हासिल कर ली।

फायदा: इस व्यापक ज्ञान का फायदा उन्हें कॉलेज में अपने छात्रों को पढ़ाते समय मिलता है, क्योंकि वे किसी भी विषय को कई अलग-अलग दृष्टिकोणों से समझा सकते हैं।

याददाश्त (Memory) पर पड़ा असर

इस सफर का एक कड़वा सच यह भी है कि इतनी अधिक पढ़ाई करने और लगातार अलग-अलग विषयों के सिलेबस को दिमाग में भरने के कारण उनकी याददाश्त पर गहरा असर पड़ा है। वे अक्सर लोगों के चेहरे भूल जाते हैं या जिन रास्तों से वे रोज गुजरते हैं, उन्हें भी पहचानने में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ता है। इसके बावजूद उनका कहना है कि पढ़ाई ही उनकी जिंदगी का असली मकसद है और वे इसे कभी नहीं छोड़ेंगे।

जानिए प्रोफेसर पार्थिबन का प्रोफाइल

जन्म और उम्र (Birth & Age)

जन्म वर्ष: प्रोफेसर वी.एन. पार्थिबन का जन्म वर्ष 1956 के आसपास हुआ था।

उम्र: वर्तमान वर्ष (2026) के अनुसार उनकी उम्र लगभग 70 वर्ष है। वह तमिलनाडु के चेन्नई के रहने वाले हैं और पिछले चार दशकों से अधिक समय से यहीं रहकर अपनी ज्ञान यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं।

व्यक्तिगत और पेशेवर प्रोफाइल (Professional Profile)

प्रोफेसर पार्थिबन का प्रोफाइल किसी सामान्य शिक्षक से बिल्कुल अलग है। वे न केवल पढ़ाते हैं, बल्कि खुद भी जीवनभर एक छात्र बने रहे हैं।

वर्तमान पद: वे चेन्नई के प्रसिद्ध आरकेएम विवेकानंद कॉलेज (RKM Vivekananda College) में कॉमर्स डिपार्टमेंट के हेड (HOD) और एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं।

करियर की शुरुआत: उन्होंने अपनी पहली डिग्री पूरी करने के ठीक एक साल बाद, यानी 1982 में ही पढ़ाना शुरू कर दिया था। वे पिछले 44 सालों से कॉलेज के छात्रों को शिक्षा दे रहे हैं।

सैलरी का निवेश: वे अपनी कमाई या वेतन का लगभग 90% हिस्सा अपनी पढ़ाई, नई डिग्रियों की कॉलेज फीस, परीक्षा फॉर्म और किताबों पर ही खर्च कर देते हैं। उनके लिए शिक्षा एक निवेश नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है।

अनोखा रिकॉर्ड: उनके पास 150 से अधिक शैक्षणिक डिग्रियां हैं, जिसके कारण उन्हें दुनिया में किसी एक व्यक्ति द्वारा सर्वाधिक शैक्षणिक योग्यताएं हासिल करने का (अनौपचारिक) वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी माना जाता है। स्थानीय लोग उन्हें “वॉलकिंग इनसाइक्लोपीडिया” भी कहते हैं।

पारिवारिक पृष्ठभूमि (Family Background)

पार्थिबन के इस सफर में उनके परिवार का बहुत बड़ा योगदान और प्रभाव रहा है।

मां से किया वादा: पार्थिबन अपने कॉलेज के शुरुआती दिनों में एक औसत छात्र थे और अपनी पहली डिग्री में बहुत मुश्किल से (barely) पास हुए थे। इसके बाद उन्होंने अपनी मां से वादा किया था कि वे अपनी पढ़ाई कभी नहीं छोड़ेंगे और लगातार सीखते रहेंगे। इसी एक वादे ने उनके भीतर डिग्रियां हासिल करने की एक अंतहीन जिद पैदा कर दी।

पत्नी भी हैं उच्च शिक्षित: उनकी पत्नी एम. सेल्वाकुमारी भी एक शिक्षाविद (Academic) हैं। वे पार्थिबन के इस जुनून को पूरी तरह समझती हैं और उनके पास खुद की 9 डिग्रियां हैं। वे उनके देर रात तक चलने वाले स्टडी सेशन्स में हमेशा उनके साथ सहयोग करती हैं।

बच्चों में शिक्षा के प्रति सम्मान: उनके बच्चे भी माता-पिता के इस शैक्षणिक माहौल में पले-बढ़े हैं और शिक्षा के प्रति गहरा सम्मान रखते हैं।

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