Thursday, August 20, 2026
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Academic Fraud:रिसर्च पब्लिकेशन फ्रॉड और जालसाजी के मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी के दो प्रोफेसरों पर क्यों दिए FIR दर्ज करने के आदेश, पढ़िए केस

Academic Fraud: दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के दो एसोसिएट प्रोफेसरों और एक अन्य व्यक्ति पर लगे गंभीर जालसाजी के आरोपों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।

शालिमार बाग थाना पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश

न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate) गौरव कटारिया ने भारती कॉलेज की एक पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने आदेश में शालिमार बाग थाना पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने और 30 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) सौंपने का निर्देश दिया है। कहा, किसी भी कृत्य को आपराधिक रूप से उत्तरदायी (Criminally Liable) बनाने वाली सबसे मुख्य बात उसके पीछे छिपी ‘धोखाधड़ी की मंशा’ (Fraudulent Intention) होती है। इस मामले में, ऐसी मंशा शुरुआत से ही पूरी तरह स्पष्ट दिखाई दे रही है। जाली दस्तावेज तैयार करने का यह कथित कृत्य सभी तीनों आरोपियों के बेईमान और धोखाधड़ी से भरे दिमाग की ओर इशारा करता है।

मामला क्या है?: नौकरी लगवाने और फर्जी रिसर्च पेपर पब्लिश करने का सिंडिकेट

यह पूरा कानूनी विवाद दिल्ली विश्वविद्यालय के भीतर कथित तौर पर चल रहे एक अकादमिक फ्रॉड रैकेट (Academic Fraud Racket) से जुड़ा है।

आरोपियों की पहचान: शिकायत में नामित आरोपी संजीव कुमार (जिसने खुद को एम्स में सीनियर मेडिकल ऑफिसर बताया था), दयाल सिंह कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर प्रमोद कुमार, और भारती कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर ल्यूक खन्ना हैं।

भरोसा और कैश की वसूली: पीड़ित महिला अंकिता किलसेन के मुताबिक, साल 2021 में मुख्य आरोपी संजीव कुमार ने उनकी मुलाकात डीयू के इन दोनों प्रोफेसरों से कराई और आश्वासन दिया कि वे उन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर की स्थायी नौकरी दिलाने में मदद करेंगे। प्रोफेसरों ने रिसर्च पेपर प्रतिष्ठित पत्रिकाओं (Academic Journals) में पब्लिश कराने और यात्रा खर्च के नाम पर पीड़िता से 1 लाख रुपये कैश और उनके मूल रिसर्च पेपर ले लिए।

फर्जी सर्टिफिकेट और नौकरी जाना: बाद में आरोपियों ने पीड़िता को तीन पब्लिश्ड रिसर्च पेपर्स की फोटोकॉपी और पब्लिकेशन सर्टिफिकेट सौंप दिए। इन दस्तावेजों के आधार पर नवंबर 2023 में पीड़िता की नियुक्ति भारती कॉलेज के राजनीति विज्ञान (Political Science) विभाग में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर हो गई।

आरटीआई (RTI) से हुआ खुलासा: अगस्त 2024 में कॉलेज को एक आरटीआई के जरिए पता चला कि पीड़िता द्वारा जमा किए गए तीनों रिसर्च पब्लिकेशन पूरी तरह फर्जी थे। कॉलेज की जांच समिति की रिपोर्ट के बाद अक्टूबर 2024 में उनकी सेवाएं समाप्त (Terminate) कर दी गईं। आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने मामले को ‘रफा-दफा’ करने और नौकरी बचाने के एवज में पीड़िता से 25 लाख रुपये की मोटी रंगदारी मांगी।

अदालत का रुख: पुलिस की दलील खारिज, कोर्ट ने माना गंभीर अपराध

शालिमार बाग थाना पुलिस ने इससे पहले इस मामले में एक एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल की थी, जिसमें पुलिस ने इस पूरे विवाद को ‘दीवानी प्रकृति’ (Civil Nature) का बताते हुए मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने पुलिस के इस लचर रवैए को खारिज करते हुए निम्नलिखित मुख्य विधिक टिप्पणियां कीं:

संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) का प्रथम दृष्टया मामला

मजिस्ट्रेट गौरव कटारिया ने साफ किया कि शिकायत में लगाए गए आरोप पूरी तरह से धोखाधड़ी (Cheating) और जालसाजी (Forgery) के गंभीर संज्ञेय अपराधों को प्रकट करते हैं। ऐसे मामलों में पुलिस केवल इसे सिविल विवाद कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकती, बल्कि इसके पीछे के आपराधिक नेटवर्क को बेनकाब करने के लिए एक विस्तृत पुलिस जांच (Detailed Police Investigation) की सख्त जरूरत है।

अकादमिक साख से खिलवाड़

अदालत ने माना कि झूठे दस्तावेज और जाली सर्टिफिकेट तैयार करना किसी की नौकरी और करियर को बर्बाद करने के साथ-साथ विश्वविद्यालय की चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को भी सीधी चोट पहुंचाता है।

अदालत का अंतिम आदेश

मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट ने शालिमार बाग पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी (SHO) को निर्देश दिया कि वे 5 नवंबर 2024 को दी गई मूल शिकायत के आधार पर तीनों आरोपियों (संजीव कुमार, प्रोफेसर प्रमोद कुमार और प्रोफेसर ल्यूक खन्ना) के खिलाफ प्रासंगिक आपराधिक धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज करें। अदालत ने पुलिस को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगले 30 दिनों के भीतर कोर्ट में इस आदेश के अनुपालन की स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए। इस मामले में पीड़िता की ओर से एडवोकेट प्रदीप खत्री और एडवोकेट प्रांजल भास्कर ने पैरवी की।

केस मैट्रिक्स: दिल्ली अदालत का आदेश (जुलाई 2026)

विधिक और प्रशासनिक श्रेणियांदिल्ली जिला अदालत की विधिक स्थिति
संबंधित अदालतमुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट, रोहिणी/उत्तर-पश्चिम दिल्ली
माननीय न्यायाधीशमजिस्ट्रेट गौरव कटारिया
मुख्य शिकायतकर्ताअंकिता किलसेन (पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर, भारती कॉलेज)
आरोपी प्रोफेसर्सप्रो. प्रमोद कुमार (दयाल सिंह कॉलेज) और प्रो. ल्यूक खन्ना (भारती कॉलेज)
संबंधित पुलिस स्टेशनशालिमार बाग पुलिस थाना, दिल्ली
कथित वित्तीय धोखाधड़ीपब्लिकेशन के नाम पर 1 लाख रुपये कैश और मामला दबाने के लिए 25 लाख रुपये की मांग।
अदालत का अंतिम निर्णयपुलिस को 30 दिन के भीतर एफआईआर (FIR) दर्ज कर अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का आदेश।
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