Tech Success Story: 3 नंबर से चूकने से लेकर AIR 19 रैंक पानेवाले अभय राघव के सफलता की कहानी सचमुच में प्रेरक है।
बिहार के सुपौल निवासी अभय राघव ने आईआईटी बीएचयू में पढ़ाई की
UPSC की कटऑफ से महज कुछ नंबर पीछे रह जाना किसी भी छात्र का दिल तोड़ सकता है, और कई लोग तो हार मानकर तैयारी ही छोड़ देते हैं। लेकिन बिहार के अभय राघव के लिए यह असफलता, दोगुनी मेहनत करने की एक बड़ी वजह बन गई। अभय मूल रूप से बिहार के सुपौल जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने IIT (BHU), वाराणसी से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद वे NVIDIA कंपनी में एक ‘जीपीयू आर्किटेक्ट’ (GPU Architect) के रूप में काम कर रहे थे। एक सुरक्षित और बेहतरीन सैलरी वाली नौकरी होने के बावजूद, समाज के लिए कुछ सार्थक करने की इच्छा ने उन्हें यूपीएससी की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया।
असफलता को बनाया सीखने का जरिया
अपने पहले प्रयास में अभय कटऑफ से सिर्फ 3 नंबर से चूक गए थे। उन्हें अहसास हुआ कि उनके वैकल्पिक विषय (Optional Paper) जियोलॉजी (भू-विज्ञान) में मिले 196 नंबर ही उनकी सबसे बड़ी कमजोरी थे। अपनी नाकामी पर रोने के बजाय अभय ने इसे सुधारने की रणनीति बनाई।
नंबरों में बड़ा उछाल: उन्होंने स्टैंडर्ड किताबों को पढ़ना शुरू किया, शॉर्ट नोट्स बनाए और कॉन्सेप्ट्स को गहराई से समझा। इसका नतीजा यह हुआ कि उनके ऑप्शनल सब्जेक्ट के मार्क्स 196 से बढ़कर सीधे 276 हो गए।
कोई शॉर्टकट नहीं, सिर्फ अनुशासन: अभय की तैयारी पूरी तरह से अनुशासित थी। उन्होंने प्रीलिम्स के लिए 100 से अधिक मॉक टेस्ट दिए।
एक्सेल शीट (Excel Sheet) से पकड़ी गलतियां: वे टेस्ट में होने वाली अपनी हर एक चूक का विश्लेषण करते थे और अपनी सभी गलतियों का रिकॉर्ड एक एक्सेल शीट में ट्रैक करते थे।
मेन्स और इंटरव्यू: मेन्स परीक्षा के लिए उन्होंने पिछले सालों के पेपर्स (PYQs), आंसर राइटिंग और टॉपर्स की कॉपियों पर फोकस किया, जबकि इंटरव्यू के लिए मॉक टेस्ट और दोस्तों के साथ ग्रुप डिस्कशन की मदद ली।
पढ़ाई के साथ मानसिक संतुलन भी जरूरी
तैयारी के भारी दबाव के बीच खुद को शांत रखने के लिए अभय ने एक बेहतर संतुलन बनाया। वे आत्म-निरीक्षण (Self-reflection) के लिए जर्नलिंग (डायरी लिखना) करते थे। दिमाग को एक्टिव और तरोताजा रखने के लिए वे रोज़ाना जॉगिंग (दौड़ना) भी करते थे।
सोच ने बदला पूरा खेल: भारतीय वन सेवा में लहराया परचम
अभय की इस सफलता के पीछे उनकी व्यावहारिक और मजबूत सोच का बहुत बड़ा हाथ रहा। उनका मानना है। “UPSC की डगर बेहद क्रूर और निर्मम है, लेकिन अगर कोई निरंतरता (Consistency) बनाए रखे, अपनी कमियों को लगातार सुधारे, तो सुरंग के उस पार उजाला जरूर मिलता है।”कटऑफ से 3 नंबर पीछे रहने वाले अभय राघव ने अपनी इसी जिद के दम पर भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 19 (AIR 19) हासिल कर इतिहास रच दिया। उनकी यह कहानी साबित करती है कि असफलताएं अंत नहीं, बल्कि सही दिशा में मुड़ने का सिर्फ एक इशारा होती हैं।
मानसिक संतुलन और दृष्टिकोण
तैयारी के दौरान मानसिक रूप से फिट रहना बहुत जरूरी है। अभय ने इसके लिए भी विशेष प्रबंध किए।
जर्नलिंग और जॉगिंग: खुद को मानसिक रूप से सक्रिय रखने के लिए वे नियमित रूप से जॉगिंग करते थे और आत्म-चिंतन (Reflection) के लिए जर्नलिंग (Journaling) का सहारा लेते थे।
सकारात्मक सोच: अभय का मानना है कि यूपीएससी एक बेहद कठिन और कठोर परीक्षा है, लेकिन यदि कोई निरंतर बना रहे, लगातार सुधार करे और अपनी कमियों को दूर करता रहे, तो उसे सफलता जरूर मिलती है।
असफलता से सफलता तक का सफर
- शुरुआती झटका: अपने पहले प्रयास में अभय यूपीएससी की कटऑफ से केवल 3 अंक चूक गए थे।
- कमियों पर काम: उन्होंने पाया कि उनका ‘जियोलॉजी’ (Geology) वैकल्पिक विषय उनका सबसे कमजोर पक्ष था, जिसमें उन्हें केवल 196 अंक मिले थे।
- बेहतर सुधार: अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए उन्होंने स्टैंडर्ड किताबों के अध्ययन, संक्षिप्त नोट्स बनाने और कॉन्सेप्ट्स को स्पष्ट करने पर ध्यान दिया। इसका नतीजा यह रहा कि उन्होंने अपने वैकल्पिक विषय के अंकों को 196 से बढ़ाकर 276 तक पहुँचा दिया।
तैयारी की सटीक रणनीति (Preparation Strategy)
अभय का मानना है कि तैयारी में अनुशासन का कोई विकल्प नहीं होता। उन्होंने अपनी तैयारी को निम्न चरणों में बांटा था।
- प्रीलिम्स (Prelims): उन्होंने 100 से अधिक मॉक टेस्ट पेपर हल किए। अपनी गलतियों को सुधारने के लिए उन्होंने एक अनोखा तरीका अपनाया और एक्सेल शीट (Excel sheets) के जरिए अपनी हर छोटी-बड़ी गलती को ट्रैक किया।
- मेन्स (Mains): मेन्स परीक्षा के लिए उनका पूरा ध्यान पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs), उत्तर लेखन (Answer writing) और टॉपर्स की कॉपियों को समझने पर केंद्रित रहा।
- इंटरव्यू: साक्षात्कार की तैयारी के लिए उन्होंने मॉक इंटरव्यू दिए और साथियों के साथ चर्चा (Peer discussion) पर जोर दिया।
एक नजर में जानिए अभय राघव का सफर
शानदार कॉर्पोरेट करियर को छोड़ना (NVIDIA की नौकरी)
प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ाई: अभय राघव ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों में से एक, IIT (BHU) वाराणसी से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की थी।
NVIDIA में हाई-प्रोफाइल जॉब: ग्रेजुएशन के बाद उनका चयन दुनिया की सबसे बड़ी टेक और एआई (AI) कंपनियों में से एक, NVIDIA में बतौर GPU आर्किटेक्ट हो गया था। वहां उन्हें बेहद शानदार पैकेज और एक स्थिर करियर मिला हुआ था।
नौकरी छोड़ने का फैसला: कॉर्पोरेट लाइफ में सब कुछ सही होने के बावजूद, उनके मन में हमेशा से समाज के लिए सीधे तौर पर कुछ बड़ा और सार्थक करने की इच्छा थी। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी इतनी बड़ी नौकरी को छोड़ने या उसके साथ समझौता कर यूपीएससी (UPSC) की क्रूर डगर पर चलने का एक बड़ा रिस्क लिया।
एक्सेल शीट (Excel Sheet) वाली अनूठी रणनीति
अभय की सफलता का सबसे बड़ा राज उनका वैज्ञानिक और डेटा-संचालित (Data-Driven) दृष्टिकोण था, जो उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग के दिनों से सीखा था।
गलतियों का डेटाबेस: जब वे प्रीलिम्स के लिए 100 से अधिक मॉक टेस्ट दे रहे थे, तब वे केवल टेस्ट देकर छोड़ नहीं देते थे। उन्होंने अपने लैपटॉप में एक एक्सेल शीट बनाई हुई थी।
कमियों पर वार: उस एक्सेल शीट में वे लिखते थे कि किस विषय के, किस टॉपिक का सवाल उनसे गलत हुआ, गलती का कारण क्या था (क्या कॉन्सेप्ट की कमी थी या सिली मिस्टेक थी)। हर अगले टेस्ट से पहले वे उस शीट को देखते थे ताकि पुरानी गलती दोबारा न हो। इसी वजह से वे कटऑफ से 3 नंबर पीछे रहने की कमजोरी को दूर कर सके।
जियोलॉजी (भू-विज्ञान) को कमजोरी से ताकत बनाना
भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में दो वैकल्पिक विषय (Optional Subjects) चुनने होते हैं, जिसमें अभय ने जियोलॉजी (Geology) को चुना था। पहले प्रयास में इसी विषय में कम नंबर (196 मार्क्स) आने के कारण वे अंतिम चयन से चूक गए थे। उन्होंने इसे अपनी सबसे बड़ी कमजोरी माना। अगले प्रयास के लिए उन्होंने अपनी पूरी रणनीति बदली, स्टैंडर्ड बुक्स को बार-बार पढ़ा, खुद के क्रिस्प शॉर्ट नोट्स तैयार किए और कॉन्सेप्ट को इतना मजबूत किया कि उनके नंबर सीधे 196 से उछलकर 276 पहुंच गए। इसी छलांग ने उन्हें टॉपर्स की लिस्ट में ला खड़ा किया।
मानसिक स्वास्थ्य और संतुलन (Mental Wellness)
यूपीएससी की तैयारी के दौरान अवसाद (Depression) और अकेलेपन से बचने के लिए अभय ने दो बेहतरीन आदतें अपनाई थीं, जो हर एस्पिरेंट के लिए जरूरी हैं।
जर्नलिंग (Journaling): वे रोज डायरी लिखते थे. दिनभर में पढ़ाई कैसी रही, मन में क्या विचार आ रहे हैं, उन्हें पन्नों पर उतारने से उनका मानसिक तनाव काफी कम हो जाता था।
जॉगिंग (Joging): शारीरिक और मानसिक रूप से एक्टिव रहने के लिए वे नियमित दौड़ने जाते थे, जिससे दिमाग में एंडोर्फिन (ह्यापी हार्मोन्स) रिलीज होते थे और वे दोबारा दोगुनी ऊर्जा से पढ़ पाते थे।
अभय राघव का संक्षिप्त प्रोफाइल
| विवरण | जानकारी |
| गृह राज्य | सुपौल, बिहार |
| शिक्षा | इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, IIT (BHU), वाराणसी |
| पूर्व अनुभव | NVIDIA में GPU आर्किटेक्ट के रूप में कार्यरत थे |
| उपलब्धि | भारतीय वन सेवा परीक्षा (IFS) 2025 में AIR 19 |

