Sunday, October 4, 2026
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Gautam Adani: सिर्फ बदनाम करने के लिए लाया गया था अडानी मामला; अमेरिकी न्याय विभाग के हलफनामे में किए दावे का खुलासा सिर्फ यहां…पढ़ें

Gautam Adani: भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे बहुचर्चित कथित रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के मामले में अमेरिकी न्याय विभाग ने वहां की संघीय अदालत के समक्ष यह चौंकाने वाला और बेहद तीखा रुख अपनाया है।

बाइडन प्रशासन ने विधिक दलदल में डालने का किया था काम

अदालत को दिए हलफनामे में अमेरिकी न्याय विभाग ने उल्लेख किया कि “गौतम अडानी और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया आपराधिक मामला केवल एक ‘नाम और बदनाम करने’ (Name and Shame) की कवायद थी, जिसे मुकदमे की किसी वास्तविक उम्मीद के बिना जानबूझकर लाया गया था। बाइडन प्रशासन ने अपने अंतिम दिनों में इस बेबुनियाद मामले को उजागर (Unseal) कर आने वाले नए प्रशासन की गोद में एक विधिक दलदल (Potential Quagmire) डालने का काम किया था।

10 पन्नों के हलफनामे में किया गया खुलासा

4 जुलाई 2026 को अमेरिका के न्यूयॉर्क पूर्वी जिला न्यायालय के जज निकोलस जी. गरौफिस के समक्ष दायर 10 पन्नों के हलफनामे में, डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के अधीन न्याय विभाग ने अडानी और अन्य के खिलाफ सभी आरोपों को पूरी तरह और हमेशा के लिए खारिज (Dismiss with prejudice) करने के अपने फैसले का पुरजोर बचाव किया है। इससे पहले जज ने न्याय विभाग के मूल क्लोजर प्रस्ताव को “बहुत संक्षिप्त, नीरस और निष्कर्षात्मक” बताते हुए इस यू-टर्न के पीछे का ठोस कारण मांगा था।

पृष्ठभूमि: क्या था पूरा विवाद?

बाइडन प्रशासन के दौरान न्यूयॉर्क (ब्रुकलिन) के अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि गौतम अडानी, सागर अडानी, विनीत जैन और अन्य ने भारत में 7 गीगावाट सौर ऊर्जा (Solar Power) की आपूर्ति के ठेके हासिल करने के लिए भारतीय राज्य सरकार के अधिकारियों (विशेष रूप से आंध्र प्रदेश में) को करीब ₹2,029 करोड़ (लगभग 265 मिलियन डॉलर) की रिश्वत देने या उसका वादा करने की योजना बनाई थी। अमेरिकी न्याय विभाग ने तब इसे विदेशी भ्रष्टाचार व्यवहार अधिनियम (FCPA) और अमेरिकी प्रतिभूति (Securities) कानूनों के उल्लंघन के तौर पर दर्ज किया था।

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) की अदालत में मुख्य दलीलें

प्रिंसिपल एसोसिएट डिप्टी अटॉर्नी जनरल आर. ट्रेंट मैकॉटर द्वारा हस्ताक्षरित इस नए सबमिशन में, विभाग ने मामले को तुरंत बंद करने के लिए कई कड़े विधिक और कूटनीतिक तर्क दिए हैं।

बाइडन प्रशासन पर ‘पॉलिटिकल स्टंट’ का आरोप

न्याय विभाग ने सीधे तौर पर पिछली सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा, यह आरोप पत्र पिछली सरकार (बाइडन प्रशासन) के अंतिम दिनों में केवल ‘नाम और बदनाम करने’ की नीयत से खोला गया था, जिसका उद्देश्य बिना किसी वास्तविक ट्रायल की संभावना के केवल आरोप मढ़ना था। उस समय विभाग का नेतृत्व निश्चित रूप से इस बात से वाकिफ था कि वे आने वाले प्रशासन की गोद में एक विधिक दलदल छोड़ रहे हैं, और शायद यह एक जानबूझकर किया गया फैसला था।

“अमेरिका दुनिया का पुलिसकर्मी नहीं है”

न्याय विभाग ने क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) और संप्रभुता का हवाला देते हुए अमेरिकी अभियोजकों की खिंचाई की। विभाग ने कहा कि यह मामला पूरी तरह से विदेशी प्रकृति का है। यह मामला पूरी तरह से भारतीय नागरिकों द्वारा भारतीय अनुबंधों और भारतीय बिजली की आपूर्ति के लिए भारतीय अधिकारियों को (भारत के ही रीबेट कार्यक्रमों के माध्यम से) प्रभावित करने की कोशिशों से जुड़ा है। अमेरिका का दुनिया का पुलिसकर्मी (World Police) बनने का ढोंग करना केवल राजनयिक विवाद (Diplomatic Strife) पैदा करता है और उन संसाधनों को बर्बाद करता है जिनका उपयोग घरेलू चिंताओं पर किया जा सकता है। ब्रुकलिन और वाशिंगटन के अभियोजकों की तुलना में भारत अपनी आंतरिक व्यवस्था को बेहतर ढंग से संभाल सकता है।”

भारत में जांच और क्लीन चिट का हवाला

अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत को सूचित किया कि भारत की अपनी संबंधित संस्थाओं ने इन आरोपों में से कई की गहन जांच की है और वर्ष 2026 में जारी की गई विभिन्न रिपोर्टों और निर्णयों में अडानी समूह के खिलाफ किसी भी प्रकार के ‘कार्रवाई योग्य कदाचार’ (No Actionable Misconduct) की बात को खारिज किया है। विभाग ने कहा कि जिस देश का हित इससे सबसे ज्यादा जुड़ा है, जब उसने ही निष्कर्ष निकाल लिया है कि कुछ गलत नहीं हुआ, तो अमेरिकी अदालतों को इसमें पड़ने की जरूरत नहीं है।

प्रतिभूति (Securities) के आरोप कभी लगने ही नहीं चाहिए थे

गौतम अडानी, सागर अडानी और विनीत जैन पर लगे अमेरिकी प्रतिभूति कानून के उल्लंघनों को लेकर विभाग ने बेहद सख्त टिप्पणी की।

कोई नुकसान नहीं: विभाग ने कहा कि अमेरिकी निवेशकों को इन प्रतिभूतियों (Securities) पर एक भी पैसे का नुकसान नहीं हुआ है। दो बॉन्ड नोटों का पूरा भुगतान किया जा चुका है और बाकी दो चालू (Current) हैं।

व्यापारिक छूट या रिश्वत?: न्याय विभाग ने कहा कि यह पूरी तरह से अस्पष्ट है कि क्या ये भुगतान वाकई रिश्वत थे या वे केवल ‘कस्टमर रीबेट्स’ (व्यापारिक छूट) थे, जो कॉर्पोरेट जगत में एक सामान्य और स्वीकार्य व्यावसायिक प्रक्रिया है। अमेरिकी अदालतों ने हमेशा ऐसी सामान्य कानूनी अनुपालन घोषणाओं को प्रतिभूति मामलों में ‘पफ्री’ (Puffery – बढ़ा-चढ़ाकर की गई सामान्य बातें) माना है, न कि कोई धोखाधड़ी।

ब्लैंश मेमोरेंडम का उल्लंघन: विभाग ने कहा कि शेष आरोपियों पर लगाए गए FCPA (विदेशी भ्रष्टाचार) के आरोप न्याय विभाग की अपनी ‘ब्लैंश मेमोरेंडम’ प्रवर्तन नीति के खिलाफ थे। यह नीति मानती है कि अमेरिकी राष्ट्रीय हितों को सीधे प्रभावित न करने वाले विदेशी मामलों पर समय बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए।

‘निवेश के बदले राहत’ के दावों को किया खारिज

न्याय विभाग ने उन मीडिया रिपोर्टों और आंतरिक लीक को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि अडानी समूह द्वारा अमेरिका में अरबों डॉलर (लगभग 10 बिलियन डॉलर) के निवेश के वादे के दबाव में ट्रम्प प्रशासन ने यह केस वापस लिया है। विभाग ने कहा, विभाग के कुछ वर्तमान या पूर्व वकीलों ने अनैतिक रूप से मीडिया को यह झूठी कहानियां दी हैं कि मैंने अमेरिका में निवेश के वादे के कारण यह मामला वापस लिया। यह पूरी तरह झूठ है। न्याय विभाग ने निवेश का मुद्दा उठने से बहुत पहले ही कानूनी मेरिट के आधार पर इस केस को खारिज करने का मन बना लिया था।

केस मैट्रिक्स: अमेरिकी संघीय अदालत (जुलाई 2026)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांअमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) की वर्तमान स्थिति
संबंधित अदालतअमेरिकी जिला न्यायालय, न्यूयॉर्क का पूर्वी जिला (EDNY)
माननीय न्यायाधीशसीनियर जज निकोलस जी. गरौफिस
मुकदमे का नामयूनाइटेड स्टेट्स बनाम गौतम एस. अडानी और अन्य
DOJ का अंतिम अनुरोधसभी आरोपों को ‘विथ प्रिज्युडिस’ (हमेशा के लिए) खारिज कर केस बंद किया जाए।
अडानी के मुख्य अमेरिकी वकीलरॉबर्ट जे. गिउफ्रा जूनियर (जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निजी वकील भी हैं)
मामले की विधिक स्थितिविभाग ने माना कि प्रतिवादी विदेशी नागरिक हैं, उनके प्रत्यर्पण या गिरफ्तारी की कोई संभावना नहीं है और यह केस एक ‘विधिक दलदल’ है।
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