Sunday, October 4, 2026
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Recuses From Hearing: सांसदों-विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामला…वर्ष 2016 की लंबित याचिका से जस्टिस वी. मोहना क्यों हुईं अलग? पढ़ें

Recuses From Hearing: मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
याचिकाकर्ताअश्विनी उपाध्याय (जनहित याचिका 2016)
एमिकस क्यूरीवरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया
सुप्रीम कोर्ट पीठCJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना
ताजा घटनाक्रमजस्टिस वी. मोहना ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया; मामला नई बेंच को भेजा जाएगा।
मुख्य मुद्दासांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित 4,000+ आपराधिक मुकदमों की फास्ट-ट्रैक सुनवाई।

Recuses From Hearing: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की न्यायाधीश जस्टिस वी. मोहना (Justice V Mohana) ने सांसदों और विधायकों (MPs & MLAs) के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के त्वरित निपटारे की मांग करने वाली 2016 की जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई से खुद को अलग (Recuse) कर लिया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant), जस्टिस जोयमाल्या बागची (Justice Joymalya Bagchi) और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष जैसे ही वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर इस जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू हुई, सीजेआई ने स्पष्ट किया कि जस्टिस मोहना ने वकील के रूप में इस मामले में पहले पैरवी की थी।

CJI ने कहा, “मेरी बहन (जस्टिस मोहना) इस मामले से खुद को अलग कर रही हैं। हम इसे किसी दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करेंगे।”

Recuses From Hearing: एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) द्वारा प्रस्तुत चौंकाने वाले आंकड़े

वरिष्ठ अधिवक्ता और मामले में न्याय मित्र (Amicus Curiae) विजय हंसारिया ने CJI से जल्द से जल्द नई पीठ गठित करने का अनुरोध किया। उन्होंने राजनीति के अपराधीकरण पर अपनी नवीनतम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की।

  • संसद में आपराधिक मामले
    • लोकसभा: 543 में से 251 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
    • राज्यसभा: 233 में से 75 सांसदों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं।
  • मुख्यमंत्रियों पर मामले: देश के 28 में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं।
    • तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी: 89 मामले (सबसे अधिक)।
    • पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी: 29 मामले।
    • कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार: 19 मामले।
  • कुल पेंडेंसी: देश भर में वर्तमान में सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,000 से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं। हंसारिया ने बताया कि शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालयों द्वारा लगातार निगरानी के बावजूद 2018 से इन लंबित मामलों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है।

Recuses From Hearing: नवंबर 2023 का ऐतिहासिक फैसला और दिशा-निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2023 को दिए अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में जनप्रतिनिधियों के मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए कई दिशानिर्देश जारी किए थे।

  1. विशेष पीठ का गठन: सभी उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया गया था कि वे सांसदों और विधायकों के मामलों की नियमित निगरानी के लिए विशेष पीठ का गठन करें।
  2. स्थगन पर रोक: विशेष अदालतों को आदेश दिया गया था कि वे “दुर्लभ और अनिवार्य कारणों” के बिना इन मामलों में सुनवाई को स्थगित (Adjourn) न करें।
  3. प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई: सांसदों, विधायकों (MLAs) और विधान परिषद सदस्यों (MLCs) के खिलाफ दर्ज मामलों को अदालतों में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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