मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| याचिकाकर्ता | FAIMA (Federation of All India Medical Association) |
| मुख्य आपत्ति | राधाकृष्णन पैनल की 101 सिफारिशें लागू किए बिना नया नीलेकणी टास्क फोर्स गठित करना। |
| कानूनी खामी | Public Examinations Act, 2026 में पेपर सेट करने वाले अधिकारियों पर सीधी आपराधिक जवाबदेही का अभाव। |
| सर्वोच्च न्यायालय का रुख | SC ने भी माना कि सरकार को समिति-दर-समिति बदलने (Committee-hopping) के बजाय NTA को एक स्थायी संस्था (Institutionalisation) बनाना चाहिए। |
NEET-UG: फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) के समक्ष एक विस्तृत हलफनामा दायर कर National Testing Agency (NTA) और केंद्र सरकार द्वारा परीक्षा सुधारों पर उठाए गए कदमों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
FAIMA का तर्क है कि डॉ. के. राधाकृष्णन समिति की मुख्य सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने के बजाय सरकार नए कार्यबल (Task Force) का गठन कर रही है, जो समस्या के मूल समाधान से ध्यान भटकाता है।
NEET-UG: FAIMA द्वारा सुप्रीम कोर्ट में उठाए गए 5 प्रमुख बिंदु
- समिति दर समिति बनाने (‘Committee-Hopping’) पर सवाल
- FAIMA ने पूछा कि जब डॉ. के. राधाकृष्णन समिति पहले ही 101 सिफारिशें सौंप चुकी है, तो नंदन नीलेकणी (Nandan Nilekani) की अध्यक्षता में एक नया हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का क्या कारण है?
- छात्रों के भविष्य के साथ बार-बार खिलवाड़ नहीं हो सकता और न ही हर साल पेपर लीक के बाद एक नई समिति का गठन किया जा सकता है।
- कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT Mode) लागू न करना
- राधाकृष्णन समिति ने स्पष्ट रूप से ‘पेन और पेपर’ (Pen-and-Paper) मोड से CBT मोड पर स्विच करने का सुझाव दिया था, क्योंकि इसमें प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन और पैकेजिंग जैसी कमजोर कड़ियां खत्म हो जाती हैं।
- NTA जब IIT जैसी परीक्षाओं का संचालन CBT मोड में करता है, तो NEET-UG के लिए इसे लागू करने से परहेज क्यों किया जा रहा है?
- अनुवाद प्रक्रिया और गोपनीयता (NDA) में खामियां
- AI या मशीन लर्निंग से अनुवाद (Translation) कराना पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। FAIMA के अनुसार, NTA ने प्रश्नपत्र सेट करने वालों की तरह अनुवादकों (Translators) के लिए अनिवार्य Non-Disclosure Agreement (NDA) लागू करने का कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया है।
- नया कानून (Public Examinations Act 2026) NTA अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं करता
- FAIMA ने तर्क दिया कि हालिया कानून (सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2026) पेपर लीक में शामिल बाहरी तत्वों को तो सजा देता है, लेकिन प्रश्नपत्र सेट करने वालों, वेटर्स (Vetters) और गोपनीय सामग्री तक पहुंच रखने वाले NTA के आंतरिक अधिकारियों की आपराधिक जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय नहीं करता।
- विश्वास का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानून के तहत ‘अग्रवेटेड ऑफेंस’ (Aggravated Offense) का प्रावधान होना चाहिए।
- सेंटर चयन, लाइव सीसीटीवी और निरस्त प्रश्नपत्रों का निस्तारण
- परीक्षा केंद्रों पर लाइव सीसीटीवी, बायोमेट्रिक चेकिंग और OMR शीट्स के त्वरित अपलोड की सिफारिशों पर स्पष्टता का अभाव है।
- इसके अतिरिक्त, छपाई में खराबी वाले (Misprinted) या निरस्त किए गए प्रश्नपत्रों को NTA द्वारा नष्ट करने के लिए किसी पारदर्शी ऑडिट प्रोटोकॉल का उल्लेख नहीं किया गया है।

