Sunday, October 4, 2026
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Child Witness: पत्नी ने पति को फंसाने के लिए गढ़ी झूठी कहानी; 6 साल की बेटी से दुष्कर्म के आरोपी डॉक्टर को बरी किया…रोचक केस को जरूर देखें

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठन्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय (Allahabad High Court)
संबंधित कानूनPOCSO Act, 2012 & IPC (Rape & Sexual Assault)
मुख्य सिद्धांतवैवाहिक कलह में POCSO का दुरुपयोग चिंताजनक; मां द्वारा सिखाए गए बच्चे (Tutored Child Witness) का बयान विश्वसनीय नहीं।
अंतिम आदेशट्रायल कोर्ट की आजीवन कारावास की सजा रद्द, डॉक्टर और उनके भाई सम्मानजनक बरी।

Child Witness: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने एक डॉक्टर को अपनी 6 साल की बेटी के साथ बलात्कार (Rape & POCSO) के मामले में दी गई आजीवन कारावास की सजा को रद्द करते हुए सम्मानजनक बरी (Honourably Acquitted) कर दिया है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा (Justice Siddhartha Varma) और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय (Justice Jai Krishan Upadhyay) की खंडपीठ ने वाराणसी की ट्रायल कोर्ट द्वारा पिछले साल सुनाए गए फैसले को पलटते हुए डॉक्टर और उनके भाई (जिन्हें भी मामले में आरोपी बनाया गया था) दोनों को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जेल में बंद डॉक्टर को तुरंत रिहा किया जाए।

Child Witness: अदालत की मुख्य टिप्पणियां और कानूनी निष्कर्ष

  • बच्ची को मां द्वारा सिखाया-पढाया गया (Tutored Witness):“कोर्ट ने पाया कि बच्ची को उसकी मां द्वारा सिखाया-पढाया (Tutored) गया था, जो अपने पति से अलग रह रही थी। मां ने अपने पति को ऐसे अपराधों में फंसाने के लिए पूरी झूठी कहानी गढ़ी, जिससे उसे आजीवन कारावास की सजा हो सके।”
  • POCSO मामलों में बाल गवाह (Child Witness) पर सतर्कता:
    • हाई कोर्ट ने विशेष रूप से टिप्पणी की कि जिन मामलों में माता-पिता के आपसी विवाद में पोक्सो (POCSO Act) को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है, वहां बच्चे की गवाही का मूल्यांकन बेहद सावधानी और बुद्धिमत्ता (Great Sagacity & Caution) के साथ किया जाना चाहिए।

Child Witness: मामले की पृष्ठभूमि और साक्ष्यों का विश्लेषण

  • मामले की शुरुआत (2018): शिकायतकर्ता (जो स्वयं एक डॉक्टर हैं) ने मार्च 2018 में अपने पति पर आरोप लगाया कि उन्होंने उत्तराखंड के हल्द्वानी में अपनी 6 साल की बेटी का यौन शोषण किया। वाराणसी पुलिस ने पति और उनके भाई के खिलाफ IPC और POCSO अधिनियम के तहत केस दर्ज किया था।
  • अदालत द्वारा पाए गए प्रमुख विरोधाभास:
    1. खुशनुमा माहौल और फोटो साक्ष्य: कोर्ट ने पाया कि जब बच्ची अपने पिता के साथ 10 दिनों के लिए हल्द्वानी गई थी, तब वह रोज अपनी मां से बात करती थी। रिकॉर्ड पर रखी गई तस्वीरों में बच्ची अपने पिता से गले मिलती और स्नेहपूर्वक देखती नजर आ रही थी।
    2. कहानी में बदलाव और ईमेल साक्ष्य: मां द्वारा भेजे गए एक शुरुआती ईमेल में केवल ‘बैड टच’ का उल्लेख था, जिसमें अधिकतम 3 से 5 साल की सजा हो सकती थी। समय बीतने (2 महीने) और तलाक की अर्जी दाखिल होने के बाद यौन उत्पीड़न (Penetrative Sexual Assault) की झूठी कहानी गढ़ी गई।
    3. भाई को बेवजह घसीटना: कोर्ट ने पाया कि डॉक्टर के भाई के खिलाफ कोई सबूत नहीं था और उन्हें केवल परेशान करने के लिए मामले में घसीटा गया था।

Child Witness: अंतिम निर्णय

हाई कोर्ट ने माना कि बच्ची 2017 से (जब वह केवल 5 साल की थी) अपनी मां के साथ रह रही थी और अपने माता-पिता के बिगड़े रिश्तों का प्रभाव उस पर था, जिसके कारण वह अपनी मां के सिखाए अनुसार बयान दे रही थी। साक्ष्यों में गंभीर संदेह और विरोधाभास के आधार पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दोनों आरोपियों को पूरी तरह निर्दोष मानते हुए बरी कर दिया।

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