Friday, October 16, 2026
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Vexatious Litigation: अदालतें व्यक्तिगत खुन्नस निकालने का मंच नहीं…अदालत का समय क्यों बर्बाद करते हैं, आपको जुर्माना तो देना होगा, पढ़िए केस

Vexatious Litigation: अदालतों में निजी दुश्मनी के तहत झूठे या दुर्भावनापूर्ण मुकदमे (Vexatious Litigation) दायर करने वालों को तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक कड़ा और सख्त संदेश दिया है।

न्यायपालिका का Time बेहद कीमती:हाईकोर्ट

हाईकोर्ट के जस्टिस ई.वी. वेणुगोपाल (Justice EV Venugopal) की एकल पीठ ने एक सेवानिवृत्त सरकारी हेडमास्टर की याचिका को न केवल खारिज किया, बल्कि अदालत से महत्वपूर्ण तथ्य छुपाने (Suppression of Material Facts) के लिए उन पर ₹1 लाख का भारी जुर्माना भी ठोक दिया। कहा, अदालतों को व्यक्तिगत प्रतिशोध या आपसी खुन्नस (Personal Vendetta) निकालने का मंच नहीं बनने दिया जा सकता। ऐसे मुकदमों से न्यायपालिका का बेहद कीमती समय बर्बाद होता है। जो याचिकाकर्ता अदालत के समक्ष तथ्यों को छुपाकर आता है, वह किसी भी राहत का हकदार नहीं है।

मामला क्या है?: रिटायरमेंट के 5 साल बाद जागी ‘अधिकार चेतना’ और आपसी शिकायतें

यह मामला निर्मल जिले के भैंसा मंडल का है, जहां एक रिटायर्ड हेडमास्टर और उनके पूर्व अधीनस्थ (Subordinate) के बीच का विवाद कोर्ट पहुंचा था।

याचिकाकर्ता: पी. श्रीनिवास, जो भैंसा के पंगरी स्थित मंडल परिषद अपर प्राइमरी स्कूल में हेडमास्टर थे और साल 2017 में सेवानिवृत्त हुए थे।

देर से शिकायत: श्रीनिवास ने साल 2022 और 2023 में अपने पुराने अधीनस्थ कर्मचारी प्रभुराज के खिलाफ अनुशासनहीनता और काम में लापरवाही बरतने के आरोप लगाते हुए शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई। दिलचस्प बात यह थी कि जिन घटनाओं के आधार पर शिकायत की गई, वे साल 2016 की थीं।

हाई कोर्ट का रुख: जब विभाग ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो श्रीनिवास ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि शिकायतों पर विभागीय जांच पहले से ही चल रही है।

हाई कोर्ट की तीखी टिप्पणी: साफ हाथों से नहीं आए याचिकाकर्ता

दोनो पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड की जांच करने के बाद जस्टिस ई.वी. वेणुगोपाल ने याचिकाकर्ता की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए।

5 साल की लंबी खामोशी क्यों?: कोर्ट ने हैरानी जताते हुए पूछा कि जब दोनों कर्मचारी 2016 में एक ही स्कूल में कार्यरत थे, तब हेडमास्टर ने कोई शिकायत क्यों नहीं की? साल 2017 में रिटायर होने के बाद, अचानक 5 साल बाद 2022 में शिकायत दर्ज कराने का क्या औचित्य था?

तथ्यों को छुपाना (Suppression of Facts): अदालत ने जांच में पाया कि यह मामला एकतरफा नहीं था। दोनों कर्मचारियों ने एक-दूसरे के खिलाफ आपसी शिकायतें (Mutual Complaints) दर्ज करा रखी थीं। याचिकाकर्ता श्रीनिवास ने अदालत में दाखिल अपने हलफनामे (Affidavit) में इस बेहद महत्वपूर्ण तथ्य को जानबूझकर छुपाया।

विधिक सिद्धांत: कोर्ट ने कहा कि न्याय का यह बुनियादी सिद्धांत है कि जो भी अदालत से राहत चाहता है, उसे साफ हाथों से (Clean Hands) और बिना कुछ छुपाए आना चाहिए।

जुर्माने की राशि नेत्रहीन बालिकाओं के स्कूल को जाएगी

अदालत ने याचिकाकर्ता के इस आचरण को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना और उन पर ₹1 लाख का जुर्माना (Costs) लगाया।

अदालत का निर्देश: जुर्माने की यह ₹1 लाख की राशि मलकापेट स्थित ‘नेत्रहीन बालिकाओं के सरकारी स्कूल’ (Government Girls’ School for the Blind, Malakpet) को भुगतान करने का निर्देश दिया गया है, ताकि इस राशि का उपयोग सामाजिक कल्याण में हो सके।

विधिक केस शीट: तेलंगाना हाई कोर्ट विधिक दुरुपयोग एवं जुर्माना समीक्षा

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और वर्तमान निर्णय
संबंधित अदालततेलंगाना उच्च न्यायालय, हैदराबाद
माननीय न्यायाधीशजस्टिस ई.वी. वेणुगोपाल
याचिकाकर्तापी. श्रीनिवास (सेवानिवृत्त हेडमास्टर, भैंसा)
मुख्य कानूनी विसंगति5 साल की देरी से शिकायत और ‘आपसी मुकदमों’ के तथ्यों को छुपाना
न्यायालय का विधिक निष्कर्षव्यक्तिगत खुन्नस के लिए न्यायिक मंच का दुरुपयोग किया गया
जुर्माना राशि और गंतव्य₹1 लाख, नेत्रहीन बालिकाओं का सरकारी स्कूल, मलकापेट

भारतीय अदालतों में पहले से ही करोड़ों मुकदमे लंबित हैं। ऐसे में निजी द्वेष के कारण अदालतों को व्यक्तिगत युद्ध का मैदान बनाना न्याय प्रणाली के साथ क्रूर मजाक है। तथ्यों को छुपाने पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाने और उसे एक जन-कल्याणकारी संस्था (नेत्रहीन बालिकाओं के स्कूल) को देने का फैसला बेहद सराहनीय है, जो भविष्य में ऐसे मुकदमों पर लगाम लगाएगा।

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