Govt Pleaders: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद जिला स्तर पर सरकारी वकीलों की नियुक्ति न होने से न्यायिक कामकाज में आ रही रुकावटों पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है।
नई सरकार को सरकारी वकीलों के पैनल नियुक्ति करने पर जोर
हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपाब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी की खंडपीठ ने राज्य के लीगल रिमेंबरेंसर (Legal Remembrancer) को आगामी 20 जुलाई तक राज्य के सभी पैनल वकीलों की पूरी सूची अदालत के समक्ष पेश करने का सख्त निर्देश दिया है। कहा, राज्य में नई सरकार के गठन को 50 से अधिक दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक जिला और उप-मंडलीय (Sub-divisional) अदालतों में सरकारी वकीलों के पैनल नियुक्त नहीं किए गए हैं। सरकारी वकीलों (Govt Pleaders) की अनुपस्थिति के कारण अलीपुर, बारासात और बसीरहाट जैसी महत्वपूर्ण अदालतों में राज्य सरकार से जुड़े मुकदमों की कार्यवाही पूरी तरह ठप पड़ी है। न्याय व्यवस्था को इस तरह प्रशासनिक ढिलाई के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
मामला क्या है?: नई सरकार के 50 दिन बाद भी लटकी नियुक्तियां
यह पूरा मामला अधिवक्ता मनोज कुमार रॉय द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने खुद अदालत के समक्ष पेश होकर जिला अदालतों की जमीनी हकीकत रखी।
ठप पड़ा कामकाज: याचिकाकर्ता ने पीठ को बताया कि 9 मई 2026 को राज्य में नई सरकार के शपथ लेने के बाद से जिला स्तर पर सरकारी वकीलों (GPs/PPs) के नए पैनलों का गठन नहीं हुआ है। इसके चलते अलीपुर कोर्ट, बारासात कोर्ट और बसीरहाट कोर्ट जैसे बड़े न्यायिक केंद्रों में सरकार से संबंधित मामलों की सुनवाई पूरी तरह बाधित हो रही है।
प्रशासनिक दलील: लीगल रिमेंबरेंसर के वकील ने अदालत को सूचित किया कि राज्य के 17 जिलाधिकारियों (District Magistrates) ने पहले ही अपने-अपने जिलों से वकीलों के नामों की सिफारिशें भेज दी हैं। बाकी बचे जिलों की सिफारिशें अभी प्रक्रिया (Under Process) में हैं और जल्द ही सभी पैनलों का गठन पूरा कर लिया जाएगा।
हाई कोर्ट का विधिक रुख: न्याय व्यवस्था में रुकावट बर्दाश्त नहीं
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपाब्रत चक्रवर्ती की अगुवाई वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि लोक अभियोजकों और सरकारी वकीलों की अनुपस्थिति सीधे तौर पर नागरिकों के त्वरित न्याय पाने के अधिकार को प्रभावित करती है।
समय सीमा तय: अदालत ने सरकार को और अधिक समय देने से इनकार करते हुए 20 जुलाई की अंतिम तारीख तय कर दी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सोमवार तक अदालत के पास पूरी सूची उपलब्ध हो।
प्रशासनिक जवाबदेही: अदालत का यह हस्तक्षेप इस बात को रेखांकित करता है कि राजनीतिक बदलावों या चुनावी प्रक्रियाओं के कारण अदालतों के दैनिक कामकाज और न्याय वितरण प्रणाली (Justice Delivery System) की गति धीमी नहीं होनी चाहिए।
विधिक केस शीट: कलकत्ता हाई कोर्ट जिला न्यायालय वकील नियुक्ति समीक्षा
| कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियां | उच्च न्यायालय की विधिक स्थिति और वर्तमान निर्णय |
| संबंधित अदालत | कलकत्ता उच्च न्यायालय, कोलकाता |
| माननीय न्यायाधीश | कार्यवाहक सीजे तपाब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी |
| मुख्य कानूनी विसंगति | 2026 विधानसभा चुनाव के 50 दिनों बाद भी जिला वकीलों के पैनलों का अभाव |
| सर्वाधिक प्रभावित अदालतें | अलीपुर कोर्ट, बारासात कोर्ट और बसीरहाट कोर्ट |
| अदालत का अंतरिम निर्देश | लीगल रिमेंबरेंसर 20 जुलाई तक वकीलों की अंतिम सूची सौंपें |
| वर्तमान प्रशासनिक स्थिति | 17 जिलाधिकारियों (DMs) की सूची प्राप्त, शेष पर कार्य जारी |
अक्सर देखा जाता है कि राज्यों में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकारें अपने अनुकूल वकीलों का पैनल बनाने में महीनों का समय लगा देती हैं, जिसका खामियाजा उन कैदियों और मुकदमों को भुगतना पड़ता है जो जेलों में बंद हैं या जिनकी सुनवाई सिर्फ इसलिए टल जाती है क्योंकि सरकारी पक्ष रखने के लिए कोई वकील ही मौजूद नहीं होता। 20 जुलाई 2026 तक सूची सौंपने का हाई कोर्ट का यह कड़ा आदेश नौकरशाही को नींद से जगाने और अदालतों को सुचारू रूप से चलाने के लिए बेहद जरूरी कदम है।

