Tuesday, September 1, 2026
HomeLatest NewsPunjab CM Mann: लोकतंत्र में नारेबाजी तो हर कोई करता है…भगवंत मान...

Punjab CM Mann: लोकतंत्र में नारेबाजी तो हर कोई करता है…भगवंत मान केस में चंडीगढ़ प्रशासन को क्यों लगाई फटकार? यहां विस्तार से जानें

Punjab CM Mann: साल 2020 के एक बिजली बिल विरोधी प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन की खिंचाई करते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने साफ कर दिया कि यदि प्रशासन के पास मामले में कोई वास्तविक मेरिट नहीं है, तो कोर्ट हाई कोर्ट के फैसले में कोई दखल (Interfere) नहीं देगा। “लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी करना नागरिकों का बुनियादी अधिकार है। हर राजनीतिक आंदोलन को क्रिमिनल केस नहीं बनाया जा सकता। अगर चंडीगढ़ प्रशासन के पास पंजाब के सीएम भगवंत मान (Bhagwant Maan) के खिलाफ कोई पुख्ता और ठोस कानूनी दलील (Merits) है, तो ही अदालत इस पर सुनवाई करेगी। वरना, तकनीकी खामियों के बहाने एक पुराने राजनीतिक प्रदर्शन के मामले को जिंदा रखकर कोर्ट का समय बर्बाद करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

मामला क्या है?: 2020 का बिजली आंदोलन और पुलिस से झड़प

यह पूरा विवाद साल 2020 का है, जब भगवंत मान मुख्यमंत्री नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी (AAP) के लोकसभा सांसद थे।

प्रदर्शन: आम आदमी पार्टी ने पंजाब में बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ चंडीगढ़ में एक बड़ा मार्च निकाला था। आरोप था कि भगवंत मान, हरपाल सिंह चीमा और अमन अरोड़ा सहित वरिष्ठ नेताओं ने करीब 750-800 कार्यकर्ताओं को तत्कालीन मुख्यमंत्री के आवास की तरफ बढ़ने के लिए उकसाया।

पुलिस की एफआईआर: पुलिस बैरिकेड्स तोड़ने और वाटर कैनन (पानी की बौछार) के बाद हुए पथराव में कुछ पुलिसकर्मियों को मामूली चोटें आईं। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस ने आप नेताओं के खिलाफ दंगा भड़काने (IPC 147), गैरकानूनी सभा (IPC 149), और सरकारी कर्मचारी पर हमला करने (IPC 332/353) जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी।

हाई कोर्ट का यू-टर्न: पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस एफआईआर और चार्जशीट को यह कहते हुए पूरी तरह रद्द (Quash) कर दिया था कि नेताओं के खिलाफ कोई भी प्रथम दृष्टया (Prima Facie) सबूत नहीं है। इसी फैसले को चंडीगढ़ प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को क्यों घेरा? 4 मुख्य कारण

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस.वी. राजू ने जब कोर्ट से तकनीकी कमियों को सुधारने के लिए और समय मांगा, तो सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई अहम विधिक टिप्पणियां कीं।

  1. नारेबाजी लोकतंत्र का हिस्सा है: सीजेआई सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा, “लोकतंत्र में ‘नाारेबाजी’ तो हर कोई करता है।” कोर्ट ने माना कि शांतिपूर्ण मार्च और नारेबाजी को सीधे तौर पर आपराधिक हिंसा या दंगे की श्रेणी में नहीं डाला जा सकता। सीजेआई ने यह भी जोड़ा कि चूंकि मान अब एक संवैधानिक पद (मुख्यमंत्री) पर हैं, तो वे अपनी जिम्मेदारी को अच्छी तरह समझते हैं।
  2. उकसाने का कोई सीधा सबूत नहीं: हाई कोर्ट के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए यह बात सामने आई कि पूरी चार्जशीट में एक भी ऐसा भाषण या सबूत नहीं था जो यह साबित करे कि भगवंत मान या अन्य नेताओं ने भीड़ को हिंसा के लिए भड़काया था।
  3. धारा 144 लागू नहीं थी: प्रदर्शन के समय उस इलाके में धारा 144 (निषेधाज्ञा) लागू नहीं की गई थी। इसलिए, मुख्यमंत्री आवास की तरफ मार्च करने की कोशिश को शुरुआत से ही ‘गैरकानूनी सभा’ नहीं माना जा सकता।
  4. मामूली धक्का-मुक्की को गंभीर अपराध बनाना गलत: पुलिस ने नेताओं पर सरकारी कर्मचारियों पर हमले की गंभीर धाराएं लगाई थीं, जबकि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार पुलिसकर्मियों को भीड़ की सामान्य धक्का-मुक्की (Jostling) के कारण बेहद मामूली चोटें आई थीं। कोर्ट ने इसे कानूनी अतिरेक (Overreach) माना।

अदालत का अंतिम रुख: “मेरिट पर बात करो, वरना केस बंद”

सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को किसी भी तरह की ढील देने से इनकार करते हुए स्पष्ट कर दिया है।

तथ्यों पर आएं: प्रशासन को अगली सुनवाई में केवल केस की कानूनी मेरिट और ठोस सबूतों पर ही बहस करनी होगी।

शॉर्टकट बंद: तकनीकी आपत्तियों या तारीख पर तारीख लेने के बहाने इस केस को लंबा खींचने की अनुमति नहीं मिलेगी। अगर पुख्ता सबूत नहीं मिले, तो हाई कोर्ट द्वारा एफआईआर रद्द करने का फैसला कायम रहेगा।

विधिक केस शीट: सुप्रीम कोर्ट बनाम चंडीगढ़ प्रशासन (भगवंत मान केस)

कानूनी और प्रशासनिक श्रेणियांउच्चतम न्यायालय की विधिक स्थिति और वर्तमान निर्देश
संबंधित अदालतसुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया (CJI बेंच)
मुख्य आरोपी पक्षभगवंत मान (वर्तमान मुख्यमंत्री, पंजाब) व अन्य AAP नेता
प्रशासनिक अपीलकर्ताचंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन
रद्द की गई धाराएंIPC 147 (दंगा), 149 (गैरकानूनी सभा), 353 (सरकारी कर्मचारी पर हमला)
न्यायालय का विधिक संदेशराजनीतिक और लोकतांत्रिक प्रदर्शनों को दुर्भावनापूर्ण आपराधिक रंग न दिया जाए

अदालत ने बहुत स्पष्ट संदेश दिया है कि जजों का कीमती समय तकनीकी दांव-पेचों के जरिए राजनीतिक हिसाब-किताब चुकता करने के लिए नहीं है। अगर पुलिस के पास नेताओं के खिलाफ हिंसा भड़काने के सीधे और अकाट्य सबूत (Merits) हैं, तभी अदालतें दखल देंगी, वरना लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाने पर जेल का डर दिखाना बंद होना चाहिए।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Patna
light rain
28 ° C
28 °
28 °
89 %
5.7kmh
100 %
Tue
32 °
Wed
28 °
Thu
32 °
Fri
33 °
Sat
32 °

Recent Comments