Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक से SCBA और कपिल सिब्बल की भावुक अपील…टूटे हुए सिस्टम के लिए जान गंवाना समाधान नहीं”
दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठे प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक से सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने अनशन खत्म करने की भावुक अपील की है।
SCBA के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह जंतर-मंतर गए
SCBA के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने खुद जंतर-मंतर जाकर वांगचुक से मुलाकात की और उन्हें एसोसिएशन का आधिकारिक पत्र सौंपा। दरअसल, नीट (NEET-UG 2026) परीक्षा में कथित धांधलियों और देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर बैठे आंदोलनकारी से कहा कि इस टूटे हुए सिस्टम के लिए देश को आपकी जान की कुर्बानी नहीं चाहिए। भारत को आवश्यकता है कि आप जीवित रहें, सक्रिय रहें और अग्रिम पंक्ति से हमारा नेतृत्व करें। देश की अंतरात्मा को जगाने का यह सफर बहुत लंबा है और इसके लिए समय चाहिए, जिसका मतलब है कि आपका हमारे बीच स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ और NEET का विवाद
सोनम वांगचुक देश के युवाओं और छात्रों के हक में इस आंदोलन से जुड़े हैं।
शुरुआत कब हुई: नीट परीक्षा पेपर लीक और अनियमिताओं के खिलाफ युवाओं और छात्रों के नेतृत्व वाले देश के बड़े डिजिटल आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने 20 जून से जंतर-मंतर पर मोर्चा खोल रखा है।
वांगचुक का समर्थन: सोनम वांगचुक 28 जून को इस सत्याग्रह में शामिल हुए और तब से वे केवल पानी, नमक और मिनरल्स के सहारे अनिश्चितकालीन उपवास पर हैं।
मुख्य मांगें: आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि नीट परीक्षा में हुई भारी विसंगतियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भंग किया जाए और परीक्षा प्रणाली में व्यापक विधिक सुधार किए जाएं।
SCBA का संकल्प: “हम देंगे कानूनी और रिसर्च सपोर्ट”
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की कार्यकारी समिति ने इस संबंध में एक विशेष प्रस्ताव (Resolution) पारित कर वांगचुक के प्रति अपनी संवेदना और समर्थन व्यक्त किया है।
संस्थागत संवेदनहीनता पर खेद: SCBA ने दुख जताया कि सोनम वांगचुक जैसी बेदाग छवि और ईमानदारी वाले व्यक्तित्व को देश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए अपने प्राण दांव पर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन शासन और सार्वजनिक संस्थानों की अंतरात्मा इस पर संवेदनशील रूप से नहीं जाग रही है।
नेताओं के मौन पर तीखा हमला: विकास सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि जब देश के लाखों बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हो और एक प्रतिष्ठित नागरिक अनशन पर हो, तब मंत्रियों और राजनेताओं की चुप्पी उनके विधिक और नैतिक चरित्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है. उन्होंने कहा कि आज के राजनेताओं का नैतिक स्तर इतना गिर चुका है कि उनसे नैतिक जिम्मेदारी की उम्मीद करना बेमानी है।
विधिक सहायता का वादा: SCBA ने औपचारिक घोषणा की है कि वह अपने अधिकार क्षेत्र के दायरे में रहकर उन सभी पहलों को विधिक (Legal) और अनुसंधान (Research) सहायता प्रदान करेगा, जो देश की शैक्षणिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही तय करने के लिए काम कर रही हैं।
सेहत को लेकर बढ़ी चिंता, पर वांगचुक झुकने को तैयार नहीं
19वें दिन तक आते-आते सोनम वांगचुक का वजन 9 किलो से अधिक घट चुका है. दिल्ली हाई कोर्ट ने भी उनकी लगातार गिरती सेहत पर संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को सरकारी डॉक्टरों द्वारा दैनिक मेडिकल बुलेटिन और निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
कपिल सिब्बल की अपील: वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी वांगचुक से अपना अनशन तोड़ने की गुहार लगाते हुए कहा कि “यह सरकार सुनने वाली नहीं है, इसलिए अपनी सेहत खराब न करें।”
सोनम वांगचुक का जवाब: बेहद कमजोर होने के बावजूद वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उनके दिल और अंदरूनी अंग ठीक काम कर रहे हैं. उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे उनसे अनशन तोड़ने के लिए न कहें, बल्कि 20 जुलाई को होने वाले ‘संसद मार्च’ (Chalo Sansad) में भारी संख्या में शामिल होकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाएं।
विधिक एवं आंदोलन केस शीट: सोनम वांगचुक अनशन (2026)
सोनम वांगचुक से SCBA और कपिल सिब्बल की भावुक अपील…टूटे हुए सिस्टम के लिए जान गंवाना समाधान नहीं”
| कानूनी और सामाजिक श्रेणियां | वर्तमान स्थिति और विधिक अपडेट |
| आंदोलन स्थल | जंतर-मंतर, नई दिल्ली (अनशन का 19वां दिन) |
| समर्थित संगठन | कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) |
| समर्थन देने वाली विधिक संस्था | सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) |
| अदालती हस्तक्षेप | दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा रोजाना मेडिकल जांच कराने के निर्देश |
| प्रमुख राजनीतिक समर्थन | कपिल सिब्बल, शशि थरूर, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव व अन्य |
| भावी रणनीति | 20 जुलाई 2026: जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च |
वांगचुक के इस सत्याग्रह ने देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है. हालांकि, वरिष्ठ वकीलों और सिविल सोसायटी की यह चिंता पूरी तरह जायज है कि भारत को खोखले हो चुके सिस्टम में सुधार करने के लिए सोनम वांगचुक जैसे जमीन से जुड़े दूरदर्शी नायकों के बलिदान की नहीं, बल्कि उनके दीर्घकालिक विधिक और जमीनी संघर्ष के नेतृत्व की जरूरत है।

