Loan Sanction: केरल हाईकोर्ट ने छात्रों की याचिकाओं के एक बैच को खारिज करते हुए बैंकों के पक्ष में यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनीज (रेगुलेशन) एक्ट के उद्देश्यों को दोहराया
हाईकोर्ट के जस्टिस एम. ए. अब्दुल हकीम की एकल पीठ ने आदेश दिया कि क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनीज (रेगुलेशन) एक्ट, 2005 (CIC Act) के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए बैंकों को सह-आवेदक का क्रेडिट स्कोर देखने से नहीं रोका जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने छात्रों को राहत देते हुए निर्देश दिया कि यदि वे एक संतोषजनक क्रेडिट हिस्ट्री वाला कोई अन्य पात्र को-बोरोअर (Co-Borrower) पेश करते हैं, तो बैंक उनके लोन आवेदनों पर पुनर्विचार करें।
CIBIL Score की समीक्षा करना सही, मगर बच्चे को लोन देने में यह वजह नहीं बनाएं
अदालत ने कहा, शैक्षणिक ऋण (Educational Loan) का आवेदन स्वीकार करते समय बैंक को सह-ऋणी (Co-Borrower/माता-पिता) के क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) और क्रेडिट रिपोर्ट की समीक्षा करने का पूरा अधिकार है। यह तर्क अमान्य है कि एजुकेशन लोन में केवल छात्र की भविष्य की कमाई की क्षमता देखी जानी चाहिए। यदि बैंक माता-पिता या को-बोरोअर के खराब क्रेडिट इतिहास के आधार पर लोन खारिज करता है, तो बैंकों का यह कदम पूरी तरह से वैध है।
मामला क्या है?: खराब क्रेडिट स्कोर पर रिजेक्ट हुए एजुकेशन लोन
याचिकाकर्ताओं की स्थिति: केरल के विभिन्न हिस्सों के छात्र (जो नर्सिंग से लेकर मैनेजमेंट तक के पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर रहे हैं) जिन्होंने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और इंडियन बैंक में एजुकेशन लोन के लिए आवेदन किया था।
विवाद का कारण: बैंकों ने इन आवेदनों को केवल इसलिए खारिज कर दिया था क्योंकि लोन में सह-आवेदक (Co-borrower) के रूप में शामिल उनके माता-पिता का क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) खराब या असंतोषजनक था।
छात्रों का मुख्य तर्क: एजुकेशन लोन का मुख्य आधार छात्र की भविष्य में कमाने की क्षमता (Future Earning Potential) होनी चाहिए, न कि माता-पिता का वित्तीय अतीत। क्रेडिट गारंटी फंड स्कीम फॉर एजुकेशन लोन्स (CGFSEL) के तहत केंद्र सरकार लोन डिफ़ॉल्ट पर गारंटी देती है, इसलिए माता-पिता का सिबिल स्कोर अप्रासंगिक हो जाता है। मेधावी लेकिन गरीब छात्रों को लोन न देना ‘इंडियन बैंक्स एसोसिएशन’ (IBA) की मॉडल एजुकेशन लोन स्कीम की भावना के खिलाफ है।
हाई कोर्ट के 3 मुख्य विधिक निष्कर्ष (Key Legal Principles)
IBA मॉडल एजुकेशन लोन स्कीम 2021 और बैंकों के नियम
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुरानी 2001 की स्कीम में क्रेडिट स्कोर को लेकर स्पष्ट नियम नहीं थे, लेकिन 2021 की IBA मॉडल स्कीम और बैंकों के ‘मास्टर सर्कुलर’ में सह-आवेदक (Co-borrower) के क्रेडिट स्कोर की जांच अनिवार्य की गई है। याचिकाकर्ताओं में से किसी ने भी इस स्कीम या सर्कुलर की वैधता को चुनौती नहीं दी थी, इसलिए बैंकों द्वारा नियमों का पालन करना बिल्कुल सही था।
क्रेडिट गारंटी स्कीम (CGFSEL) कोई लोन बांटने की योजना नहीं
कोर्ट ने निज़ामुद्दीन पी. बनाम भारत संघ मामले का हवाला देते हुए साफ किया कि CGFSEL केंद्र सरकार की एक गारंटी प्रणाली है, जो डिफ़ॉल्ट होने पर बैंकों के नुकसान की भरपाई करती है। यह योजना IBA लोन पात्रता मानदंडों या बैंकों के क्रेडिट असेसमेंट नियमों को ओवरराइड (अमान्य) नहीं कर सकती।
एजुकेशन लोन कोई ‘मौलिक अधिकार’ नहीं
बैंकिंग सिद्धांतों का समर्थन करते हुए कोर्ट ने डिवीजन बेंच के लैंडमार्क फैसले (आर्या बनाम आरबीआई, 2015) का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि उच्च शिक्षा या एजुकेशन लोन प्राप्त करना कोई संवैधानिक मौलिक अधिकार (Fundamental Right) नहीं है। बैंक वित्तीय जोखिमों का आकलन करने के लिए वैधानिक रूप से स्वतंत्र हैं।
अदालत का अंतिम आदेश (Court’s Directions)
केरल हाई कोर्ट ने सभी रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया, लेकिन छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित निर्देश जारी किए।
सह-आवेदक बदलने की छूट: यदि याचिकाकर्ता छात्र अपने माता-पिता के स्थान पर किसी ऐसे अन्य पात्र सह-बोरोअर (जैसे रिश्तेदार या अभिभावक) को प्रस्तुत करते हैं जिनका क्रेडिट स्कोर/रिपोर्ट संतोषजनक हो, तो बैंक उनके एजुकेशन लोन आवेदनों पर पुनर्विचार (Reconsider) करें।
बैंकिंग नियमों का सम्मान: बैंकों द्वारा को-बोरोअर के खराब सिबिल स्कोर के आधार पर लोन निरस्त करने की कार्रवाई को पूरी तरह से कानूनी और बरकरार (Sustained) रखा गया।
केस मैट्रिक्स: केरल हाई कोर्ट का फैसला
| कानूनी और प्रक्रियात्मक बिंदु | अदालत द्वारा तय की गई विधिक स्थिति |
| संबंधित अदालत | केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस एम. ए. अब्दुल हकीम (Justice M.A. Abdul Hakhim) |
| मूल विधिक मुद्दा | क्या माता-पिता (Co-Borrower) के खराब CIBIL स्कोर पर एजुकेशन लोन खारिज किया जा सकता है? |
| संबंधित कानून/योजना | CIC Act, 2005 और IBA मॉडल एजुकेशन लोन स्कीम 2021 |
| अदालत का फैसला | याचिकाओं का बैच खारिज; बैंकों का निर्णय वैध ठहराया गया। |
| छात्रों को राहत | नया संतोषजनक क्रेडिट स्कोर वाला Co-Borrower देने पर बैंक लोन पर पुनर्विचार करेंगे। |

