Advocates Amendment Bill, 2026: बार काउंसिल आफ इंडिया (Bar Council of India – BCI) ने एडवोकेट्स (संशोधन) विधेयक, 2026 (Draft Advocates Amendment Bill, 2026) का मसौदा सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किया है।
31 जुलाई 2026 (दोपहर 3:00 बजे तक) अपने सुझाव मांगे
BCI ने राज्यों के बार काउंसिल, कानूनी विशेषज्ञों और विश्वविद्यालयों के साथ विचार-विमर्श के बाद वकालत के पेशे और कानूनी शिक्षा में व्यापक बदलाव के उद्देश्य से यह मसौदा तैयार किया है। इस नए ड्राफ्ट में सबसे प्रमुख प्रस्ताव वकीलों के नामांकन शुल्क (Enrolment Fee) में 30 गुना वृद्धि का है, जिसे ₹750 से बढ़ाकर ₹22,500 करने का सुझाव दिया गया है। सभी हितधारकों (Stakeholders) को 31 जुलाई 2026 (दोपहर 3:00 बजे तक) अपने सुझाव draftadvact2026bill@gmail.com पर भेजने के लिए कहा गया है।
एनरोलमेंट फीस में भारी बढ़ोतरी (30 गुना इजाफा)
BCI ने एडवोकेट्स एक्ट, 1961 की धारा 24 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है।
नई प्रस्तावित फीस: कुल ₹22,500
₹18,000: संबंधित राज्य बार काउंसिल (State Bar Council) को।
₹4,500: भारतीय बार काउंसिल (BCI) को।
आरक्षित श्रेणियों को छूट: SC, ST और दिव्यांग (Persons with Benchmark Disabilities) उम्मीदवारों को निर्धारित फीस का केवल एक-चौथाई (1/4th) देना होगा।
BCI का तर्क: मौजूदा वैधानिक शुल्क 1993 में तय किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले (गौरव कुमार और पंकज सिन्हा मामले) के बाद नामांकन दस्तावेजों की भौतिक एवं डिजिटल सत्यापन, मेडिक्लेम, बीमा, और नेशनल लीगल अकादमी जैसी कल्याणकारी योजनाओं के लिए धन जुटाने हेतु यह बढ़ोतरी जरूरी है।
कानूनी शिक्षा में सुधार और ‘लीगल एजुकेशन कमेटी’ का विस्तार
कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए BCI को निम्नलिखित अधिकार देने का प्रस्ताव है।
लॉ डिग्री पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा (Entrance Test) आयोजित करना।
ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) के लिए नए नियम तय करना।
लीगल एजुकेशन कमेटी (LEC) का विस्तार 10 सदस्यों से बढ़ाकर 25 सदस्य करना। इस पुनर्गठित समिति में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, हाई कोर्ट के वर्तमान/पूर्व चीफ जस्टिस, अटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल, UGC प्रतिनिधि, लॉ यूनिवर्सिटीज के वीसी और वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल होंगे।
विदेशी वकीलों और फर्मों पर स्पष्ट प्रतिबंध (Foreign Lawyers/Law Firms)
प्रस्तावित धारा 47 के तहत भारतीय अदालतों में विदेशी वकीलों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
कहां प्रैक्टिस नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट्स, डिस्ट्रिक्ट/तालुका कोर्ट्स और किसी भी वैधानिक ट्रिब्यूनल में।
केवल एक अपवाद: अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता (International Commercial Arbitration) के मामलों में जहां विवाद पर विदेशी कानून लागू होता हो, केवल वहीं पेश होने की सीमित अनुमति होगी।
विदेशी फर्मों के नियम केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति से ही बनेंगे।
महिला प्रतिनिधित्व और युवा वकीलों के लिए कल्याणकारी योजनाएं
महिलाओं के लिए आरक्षण: राज्य बार कौंसिलों में मतदाता संख्या के आधार पर महिलाओं के लिए न्यूनतम 3 से 4 सीटें निर्वाचित और 2 से 3 सीटें सह-योजित (Co-opted) करने का प्रावधान।
स्टाइपेंड व पेंशन: राज्य बार कौंसिलों के माध्यम से कोष बनाकर युवा वकीलों के लिए स्टाइपेंड (Stipend), मेडिक्लेम, पेंशन और गरीब वकीलों के लिए आर्थिक सहायता की व्यवस्था।
भारतीय लॉ फर्मों को मान्यता: राज्य और जिला स्तर पर वकीलों को लॉ फर्म पंजीकृत करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
2025 के ड्राफ्ट से क्या-क्या बदला?
हड़ताल पर जुर्माने का नियम हटाया: 2025 के ड्राफ्ट में वकीलों की हड़ताल पर भारी पेनल्टी और 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव था, जिसे इस नए 2026 ड्राफ्ट से पूरी तरह हटा दिया गया है।
इन-हाउस वकीलों को बाहर रखा गया: ‘कानूनी पेशेवर’ (Legal Practitioner) की परिभाषा में निजी और सरकारी विभागों के लिए मुकदमेबाजी और ड्राफ्टिंग का काम करने वाले कानून स्नातकों को शामिल किया गया है, लेकिन कॉर्पोरेट के इन-हाउस वकीलों (In-house Corporate Lawyers) को इससे बाहर रखा गया है।
ड्राफ्ट बिल 2026: एक नज़र में (Summary Matrix)
| बिंदु | वर्तमान स्थिति | प्रस्तावित बदलाव (Draft Bill 2026) |
| नामांकन शुल्क (Enrolment Fee) | ₹750 (1993 से लागू) | ₹22,500 (SC/ST/दिव्यांगों के लिए 25%) |
| लीगल एजुकेशन कमेटी (LEC) | 10 सदस्य | 25 सदस्य (न्यायाधीश, शिक्षाविद व BCI) |
| विदेशी लॉ फर्म | अस्पष्टता | भारतीय अदालतों में पूर्ण प्रतिबंध (केवल विदेशी कानून मध्यस्थता अपवाद) |
| हड़ताल पर जुर्माना | 2025 ड्राफ्ट में ₹5 लाख | हटा दिया गया (No Heavy Penalty) |
| सुझाव भेजने की अंतिम तिथि | – | 31 जुलाई 2026, दोपहर 3:00 बजे तक |

