Sexual Harassment: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महिला वकील का यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) करने के आरोपी वकील की अंतरिम जमानत को तुरंत रद्द कर दिया है।
उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को वकील के आचरण पर लिखा पत्र
हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने आरोपी वकील के आचरण पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल (Bar Council of UP) को उसके खिलाफ अनुशासनात्मक जांच करने और उसकी वकालत करने की पात्रता पर कार्रवाई का निर्देश दिया है। अदालत में व्यक्तिगत रूप से हलफनामा और वचनबद्धता (Undertaking) देने के बावजूद उसका उल्लंघन करना, सीधे जज के कक्ष में अनुमति पत्र भेजकर प्रभाव डालने की कोशिश करना और मनाही के बाद भी अदालत कक्ष में उपस्थित रहना एक वकील का ऐसा आचरण पूरी तरह से पेशेवर और अदालत की अवहेलना करने वाला है। मामले में आरोपी की ओर से एडवोकेट बसंत कुमार चौहान और श्याम चंद्र पांडे, पीड़िता की ओर से एडवोकेट सत्यम सिंह और अभिजीत वर्मा, तथा राज्य की ओर से AGA रोशन कुमार सिंह ने पैरवी की।
मामला क्या है?: महिला वकील से छेड़छाड़ और पीछा करने का आरोप
घटना की पृष्ठभूमि: प्रयागराज पुलिस ने 2025 में आरोपी वकील के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत यौन उत्पीड़न, पीछा करने (Stalking), गलत तरीके से रोकने और आपराधिक धमकी का मामला दर्ज किया था।
आरोप: पीड़िता (महिला वकील) ने आरोप लगाया था कि आरोपी उसे कोर्ट कॉरिडोर या लेडीज टॉयलेट के पास रोकता था, उसकी अनिच्छा के बावजूद जबरन संपर्क करने की कोशिश करता था और भद्दी टिप्पणियां पास करता था।
मानसिक जांच और जमानत की शर्त: आरोपी अगस्त 2025 से जेल में था। फरवरी में कोर्ट ने नैनी जेल और सीएमओ से उसकी मानसिक जांच कराई, जिसमें वह पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। इसके बाद 16 मार्च को उसने बिना शर्त माफी मांगी और वचन दिया कि वह अदालत की अनुमति के बिना हाई कोर्ट परिसर में नहीं आएगा और न ही पीड़िता से संपर्क करेगा। इस आधार पर उसे अंतरिम जमानत मिली थी।
जमानत रद्द होने के 3 मुख्य कारण
वचनबद्धता (Undertaking) का उल्लंघन
कोर्ट ने पाया कि हाई कोर्ट परिसर में प्रवेश न करने के स्पष्ट वचन के बावजूद आरोपी वकील न केवल परिसर में घूम रहा था, बल्कि अपने वकील के मौजूद होने के बावजूद खुद कोर्ट रूम के भीतर उपस्थित था।
जज को सीधे आवेदन भेजकर प्रभाव डालने का प्रयास
आरोपी ने हाई कोर्ट की रजिस्ट्री के माध्यम से आवेदन करने के बजाय, सीधे रोस्टर पर बैठे जज को व्यक्तिगत रूप से प्रार्थना पत्र भेजा।
अदालत की टिप्पणी: “प्रथम दृष्टया, आवेदक का यह कृत्य मुझ पर दबाव बनाने या प्रभाव डालने का एक प्रयास प्रतीत होता है, जो न्याय प्रशासन में सीधे हस्तक्षेप के समान है।”
वकील के रूप में पेशेवर मापदंडों का हनन
न्यायाधीश ने आरोपी की मौजूदगी और उसके आचरण को “अदालत की अवमानना (Contemptuous) और पूरी तरह से अव्यवसायिक” करार दिया।
अदालत का अंतिम आदेश (Court’s Directions)
अंतरिम जमानत तुरंत रद्द: आरोपी वकील को दी गई अंतरिम जमानत निरस्त कर दी गई है।
UP बार काउंसिल को जांच के निर्देश: उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को निर्देश दिया गया है कि वह आरोपी वकील के आचरण की उचित जांच करे और तय करे कि क्या वह कानून के पेशे में बने रहने के योग्य है या नहीं।
पीड़िता को सुरक्षा: कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि मुकदमे (Trial) के समापन तक पीड़िता महिला वकील को दी गई सुरक्षा लगातार जारी रखी जाए।
केस मैट्रिक्स: इलाहाबाद हाई कोर्ट
| कानूनी और प्रक्रियात्मक पहलू | मामला और अदालत का रुख |
| संबंधित अदालत | इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल (Justice Arun Kumar Singh Deshwal) |
| संबंधित कानून | भारतीय न्याय संहिता (BNS) – यौन उत्पीड़न और पीछा करना |
| मुख्य निर्णय | अंतरिम जमानत रद्द; आरोपी पर कोर्ट रूम में घुसने का उल्लंघन सिद्ध। |
| अनुशासनात्मक कार्रवाई | बार काउंसिल ऑफ यूपी को लाइसेंस/पात्रता की जांच का आदेश। |

