Tuesday, October 27, 2026
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Draft Amendment: इन-हाउस और जनरल काउंसिल वकीलों को भी मिले लीगल प्रैक्टिशनर का दर्जा…GCAI ने BCI को सौंपी सिफारिश, पढ़ेें यहां पर

Draft Amendment: जनरल काउंसल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (GCAI) ने बार काउंसिल आफ इंडिया (BCI) से अपील की है कि निजी, सार्वजनिक और संयुक्त क्षेत्र के संस्थानों में कार्यरत जनरल काउंसिल और ‘इन-हाउस’ वकीलों को भी वैधानिक रूप से “लीगल प्रैक्टिशनर” के रूप में मान्यता दी जाए।

GCAI के सह-संस्थापक संजीव गेमावत द्वारा 21 जुलाई 2026 को बीसीआई को सौंपे गए एक प्रतिनिधित्व (Representation) में ड्राफ्ट एडवोकेट्स (अमेंडमेंट) बिल, 2026 और BCI रूल्स के नियम 49 (Rule 49) में संशोधन की मांग की गई है।

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मुख्य मांगें और प्रस्तावित संशोधन

ड्राफ्ट एडवोकेट्स (अमेंडमेंट) बिल, 2026 में संशोधन

सरकारी संगठनों के साथ प्राइवेट सेक्टर का समावेश: प्रस्तावित ड्राफ्ट बिल में “सरकारी संगठन” में कार्यरत व्यक्तियों को ‘लीगल प्रैक्टिशनर’ की परिभाषा में शामिल किया गया है। GCAI ने सुझाव दिया है कि इसके साथ “निजी क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र या संयुक्त क्षेत्र के संगठन” शब्दों को भी जोड़ा जाए।

समान कार्य के लिए समान मान्यता: GCAI का तर्क है कि सरकारी संगठनों में किए जाने वाले कानूनी कार्य और कंपनियों, बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों या वैधानिक निगमों में किए जाने वाले कानूनी कार्य की प्रकृति समान होती है। इसलिए दोनों में भेदभाव का कोई तर्कसंगत आधार नहीं है।

BCI के नियम 49 (Rule 49) में बदलाव

वर्तमान में Rule 49 के तहत पूर्णकालिक (Full-time) वैतनिक नौकरी (Salaried Employment) लेने पर एक वकील का प्रैक्टिस करने का अधिकार/एनरोलमेंट निलंबित हो जाता है।

प्रस्ताव: GCAI ने मांग की है कि यदि किसी एडवोकेट का मुख्य कार्य प्रामाणिक कानूनी सलाह (Bona fide legal work) देना है, तो केवल पूर्णकालिक नौकरी के आधार पर उसकी वकालत/पेशेवर स्थिति (Professional Status) समाप्त नहीं होनी चाहिए।

धारा 29 और 33 (Advocates Act) में सुधार

Advocates Act की धारा 29 में संशोधन कर केवल ‘एडवोकेट्स’ के स्थान पर ‘लीगल प्रैक्टिशन्स’ को वकालत का अधिकार रखने वाले वर्ग के रूप में मान्यता देने की सिफारिश की गई है। इन-हाउस वकीलों को नौकरी में रहते हुए अपना ‘सनद/एनरोलमेंट’ (Certificate of Enrolment) बहाल करने की अनुमति दी जाए और उनकी नौकरी की अवधि को कानूनी प्रैक्टिस (Legal Practice) का ही हिस्सा माना जाए।

GCAI के प्रमुख तर्क

आधुनिक वकालत का बदलता स्वरूप: एसोसिएशन ने कहा कि आधुनिक कानूनी पेशा केवल अदालत के भीतर बहस (Courtroom Advocacy) तक सीमित नहीं है। इसमें विलय और अधिग्रहण (M&A), कॉर्पोरेट लॉ, बौद्धिक संपदा (IPR), प्रतिस्पर्धा कानून, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा गोपनीयता और नियामक अनुपालन (Compliance) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

लॉ फर्म्स के समान संस्थागत मान्यता: यदि कानून लॉ फर्मों को संस्थागत कानूनी प्रैक्टिस के रूप में मान्यता देता है, तो कॉर्पोरेट क्षेत्र के भीतर काम करने वाले वकीलों को भी यही मान्यता मिलनी चाहिए।

युवा वकीलों के लिए अवसर: इन-हाउस वकीलों को मान्यता मिलने से स्टार्टअप्स, बैंकों, टेक कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों में युवा अधिवक्ताओं के लिए संरचित रोजगार (Structured Employment) और करियर ग्रोथ के नए अवसर पैदा होंगे।

केस/विधेयक मैट्रिक्स: GCAI बनाम BCI प्रस्ताव

प्रक्रियात्मक और कानूनी बिंदुवर्तमान स्थिति / GCAI का प्रस्तावित संशोधन
संबंधित संस्थाएंBCI (Bar Council of India) एवं GCAI (General Counsels’ Association of India)
प्रस्तावित विधेयकDraft Advocates (Amendment) Bill, 2026
मुख्य विवादित नियमBCI Rule 49 (पूर्णकालिक नौकरी पर प्रैक्टिस लाइसेंस का निलंबन)
मुख्य मांगप्राइवेट व पब्लिक सेक्टर के इन-हाउस वकीलों को ‘Legal Practitioner’ का वैधानिक दर्जा दिया जाए।
प्रस्तावित समाधानBCI और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक वर्किंग ग्रुप का गठन किया जाए।
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