केस मैट्रिक्स: Supreme Court Ruling on IAF Personnel Resignation / NOC
| पहलू | विवरण |
| संबंधित अदालत | सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) |
| माननीय पीठ | जस्टिस उज्ज्वल भुयान एवं जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर |
| याचिकाकर्ता | नखत सिंह (कॉर्पोरल, भारतीय वायुसेना) |
| मुख्य विषय | सिविल पद पर चयन के बाद IAF से NOC और डिस्चार्ज की मांग |
| संबद्ध नियम | एयर फोर्स ऑर्डर 2017 (सिविल जॉब्स हेतु पूर्व अनुमति का नियम) |
| अदालत का फैसला | याचिकाकर्ता की अपील खारिज; पूर्व अनुमति के बिना डिस्चार्ज का अधिकार नहीं। |
IAF Personnel Resignation: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में फैसला सुनाया है कि भारतीय वायुसेना (IAF – Indian Air Force) के कर्मियों के पास नागरिक नौकरियों (Civil Posts) में शामिल होने के लिए अपनी मर्जी से सेवा छोड़ने का “असीमित या अनियंत्रित अधिकार” (Unqualified Right) नहीं है।
जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कहा कि वायुसेना की परिचालन तैयारियों (Operational Preparedness) और अनुशासन को बनाए रखने के लिए इन नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि सिविल पदों के लिए आवेदन करने से पहले पूर्व अनुमति (Prior Permission) लेना केवल एक औपचारिक प्रक्रियात्मक नियम नहीं है, जिसे अपनी मर्जी से छोड़ा जा सके।
सुप्रीम कोर्ट (जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर द्वारा लिखित फैसला) की मुख्य टिप्पणियां
अदालत ने वायुसेना के नियमों की व्याख्या करते हुए सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय, इन आवश्यकताओं को निर्धारित करने के पीछे का उद्देश्य IAF से वायु योद्धाओं (Air Warriors) के असामयिक डिस्चार्ज (Premature Discharge) को नियंत्रित करना है। यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि एयरमैन एक अनुशासित बल, IAF के सदस्य हैं। सिविल पद के लिए आवेदन करने का प्रयास करने से पहले पूर्व अनुमति प्राप्त करना और चयन के बाद सक्षम प्राधिकारी द्वारा एनओसी (NOC) जारी करना केवल साधारण प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं नहीं हैं जिन्हें संबंधित एयरमैन अपनी मर्जी से दरकिनार कर सके।
मामला क्या था?: कॉर्पोरल नखत सिंह बनाम भारतीय वायुसेना
- पृष्ठभूमि: याचिकाकर्ता नखत सिंह, भारतीय वायुसेना में कॉर्पोरल (Corporal) के पद पर कार्यरत थे और 7 साल की सेवा पूरी कर चुके थे। नवंबर 2020 में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा निकाली गई भर्ती के तहत उन्होंने सहायक प्रोफेसर (हिंदी) पद के लिए आवेदन किया था।
- सफलता और NOC से इनकार: परीक्षा और साक्षात्कार में सफल होने के बाद उन्होंने अक्टूबर 2022 में अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और डिस्चार्ज के लिए आवेदन किया। हालांकि, एयर ऑफिसर कमांडिंग द्वारा उनके आवेदन को खारिज कर दिया गया।
- नियमों का उल्लंघन: वायुसेना प्राधिकरण ने एयर फोर्स ऑर्डर 2017 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी सिविल पद के लिए आवेदन करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से लिखित पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है, जो नखत सिंह ने नहीं लिया था।
- अपील खारिज: नखत सिंह ने इस इनकार को सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) और दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी, जहां उनकी याचिकाएं खारिज हो गईं। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जिसे शीर्ष अदालत ने भी खारिज कर दिया।

