केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक श्रेणियां / बिंदु | पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का निर्णय (2026) |
| मामले का संदर्भ | 2026 LiveLaw (PH) 249 (51 कनेक्टेड LPA पर फैसला) |
| माननीय न्यायाधीश | जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी एवं जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल |
| संबंधित संस्था | हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) |
| मुख्य विधिक प्रश्न | क्या केवल पिता की मृत्यु पर अभ्यर्थी ‘अनाथ’ कोटे (5 अंक) का हकदार है? |
| अदालत का फैसला | नहीं। केवल पिता की मृत्यु पर लाभ नहीं मिलेगा; माता और पिता दोनों का मृत होना अनिवार्य है। |
| अपात्र उम्मीदवारों पर प्रभाव | गलत तरीके से दिए गए 5 अंकों का लाभ वापस लिया जाएगा और मेरिट सूची संशोधित होगी। |
Definition Of Orphan: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने अपने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसले में माना है कि हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) की भर्ती प्रक्रियाओं के तहत केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को “अनाथ” (Orphan) श्रेणी के तहत 5 अतिरिक्त अंकों का लाभ मिलेगा, जिनके माता और पिता दोनों का निधन हो चुका हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी अभ्यर्थी के पिता की मृत्यु हो चुकी है लेकिन उसकी मां जीवित है, तो उसे ‘अनाथ’ नहीं माना जा सकता।
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने एकल पीठ (Single Judge) के उस पुराने आदेश को पूरी तरह खारिज (Set Aside) कर दिया, जिसमें केवल पिता की मृत्यु होने वाले अभ्यर्थियों को भी यह लाभ देने और मेरिट सूची पुनर्गठित करने का निर्देश दिया गया था।
मामला क्या था? (Case Background)
- यह विवाद HSSC द्वारा विज्ञापित पुलिस कांस्टेबल और सब-इंस्पेक्टर (SI) के हजारों पदों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था।
- विज्ञापन का प्रावधान: HSSC ने ‘अनाथ/विधवा’ श्रेणी के तहत 5 अतिरिक्त वेटेज अंक देने का प्रावधान किया था। इसमें शर्त थी कि ऐसे बच्चे के पिता की मृत्यु तब हुई हो जब पिता की आयु 42 वर्ष से कम थी या अभ्यर्थी की आयु 15 वर्ष से कम थी।
- HSSC का रुख: आयोग का स्पष्ट मानना था कि इस प्रावधान के तहत ‘अनाथ’ का लाभ पाने के लिए दोनों माता-पिता (Both Parents) का निधन होना अनिवार्य है।
- एकल पीठ का 2023 का आदेश: जिन अभ्यर्थियों के केवल पिता की मृत्यु हुई थी, उन्होंने इसे चुनौती दी। एकल पीठ ने 16 मई 2023 को HSSC के रुख को सख्त मानते हुए याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला दिया और मेरिट सूची दोबारा बनाने का आदेश दिया।
- डिवीजन बेंच में अपील: इस फैसले से प्रभावित होकर HSSC और चयनित उम्मीदवारों ने 51 विशेष अपीलें (Letters Patent Appeals – LPA) दायर कीं।
हाई कोर्ट का विधिक विश्लेषण एवं आधार
डिवीजन बेंच ने एकल पीठ के फैसले को रद्द करते हुए निम्नलिखित मुख्य कानूनी बिंदु तय किए।
“अनाथ” की वास्तविक अवधारणा और उद्देश्य
हाई कोर्ट ने कहा कि अनाथ अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अंक देने का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों की भरपाई करना है जो माता-पिता दोनों के स्नेहाश्रय से वंचित हो चुके हैं।
“जिस अभ्यर्थी के पास मां का सहारा और देखभाल मौजूद है, उसकी स्थिति की तुलना उस अनाथ अभ्यर्थी से कतई नहीं की जा सकती जिसके दोनों माता-पिता इस दुनिया में नहीं हैं।”
हरियाणा 2003 नियम’ और विधिक परिभाषा का संदर्भ
पीठ ने ‘हरियाणा डिसीज्ड गवर्नमेंट एम्प्लॉइज रूल्स, 2003’ के नियम 3(k) और ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015’ का हवाला दिया। हरियाणा के वैधानिक ढांचे के तहत ‘अनाथ’ की स्थापित परिभाषा वही है जिसमें बच्चे के दोनों माता-पिता की मृत्यु हो चुकी हो।
विज्ञापनकर्ता/आयोग के अधिकार का सम्मान
उच्च न्यायालय ने सर्वोच्च न्यायालय के ‘बी. प्रेमानंद बनाम मोहन कोइकल’ और ‘यूनियन ऑफ इंडिया बनाम मनप्रीत सिंह पूनम’ फैसलों का संदर्भ दिया। अदालत ने माना कि यदि किसी नियम में स्पष्टता का अभाव लगे, तो उसकी व्याख्या का प्राथमिक अधिकार भर्ती करने वाली संस्था (आयोग) का होता है। अदालतें व्याख्या के नाम पर भर्ती नियमों में बदलाव (Judicial Legislation) नहीं कर सकतीं।
उच्च न्यायालय का अंतिम आदेश (Court Directives)
- एकल पीठ का आदेश रद्द: 16 मई 2023 का सिंगल जज का आदेश रद्द कर दिया गया।
- पात्रता की शर्तें सख्त: 5 वेटेज अंक पाने के लिए अभ्यर्थी को दो शर्तें पूरी करनी होंगी:
- आवेदन की अंतिम तिथि से पहले माता और पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी हो।
- पिता की मृत्यु पिता के 42 वर्ष की आयु प्राप्त करने से पहले या अभ्यर्थी के 15 वर्ष की आयु प्राप्त करने से पहले हुई हो।
- गलत लाभ की वापसी: जिन अपात्र अभ्यर्थियों (जिनकी मां जीवित थीं) को गलती से यह लाभ मिला है, उनका लाभ वापस लिया जाएगा और आयोग वास्तविक हकदार अनाथ उम्मीदवारों के नाम पर पुनर्विचार करेगा।

