केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| मामला | Anuradha Singh and Others v. State of UP and Others |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान एवं न्यायमूर्ति राजीव भारती |
| संबंधित निकाय | लखनऊ नगर निगम, लखनऊ पुलिस एवं जिला प्रशासन |
| अगली सुनवाई तिथि | 10 सितंबर 2026 |
| मुख्य आदेश | 72 अवैध चेंबरों को नोटिस देकर रविवार को ध्वस्त करने का आदेश; बाधा डालने पर कार्रवाई की चेतावनी। |
Lawyers’ Chambers in Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लखनऊ जिला एवं सत्र न्यायालय के पास बने लगभग 72 अवैध वकीलों के चेंबर और दुकानों को ध्वस्त करने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ ने [अनुराधा सिंह और अन्य बनाम यूपी राज्य व अन्य] मामले में यह निर्देश जारी किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक रास्तों पर अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि कोई वकील या उनका सहयोगी इस कार्रवाई में बाधा डालता है, तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
हाई कोर्ट के मुख्य निर्देश और व्यवस्था
- रविवार को चलाई जाएगी डिमोलिशन ड्राइव: अदालत ने निर्देश दिया कि वकीलों के अवैध चेंबरों को गिराने की यह कार्रवाई रविवार के दिन की जाए, ताकि अदालत का नियमित न्यायिक कार्य प्रभावित न हो।
- खाली करने का अंतिम मौका (Fresh Notice): निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कोर्ट ने आदेश दिया कि अवैध चेंबरों का इस्तेमाल कर रहे वकीलों को 1 सप्ताह के भीतर नए सिरे से लिखित नोटिस दिया जाए। उन्हें चेंबर खाली करने या अपने कब्जे का वैध दावा प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया जाएगा।
- पुलिस और प्रशासन का समन्वय: लखनऊ नगर निगम के वकील शैलेंद्र सिंह चौहान द्वारा पुलिस सहायता मांगे जाने पर, कोर्ट ने पुलिस आयुक्त (CP लखनऊ), जिलाधिकारी (DM) और नगर आयुक्त को मिलकर आवश्यक कदम उठाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि और पिछला विवाद
- मई में हुई थी झड़प: मई महीने में लखनऊ के कैसरबाग इलाके में स्थित इन अवैध चेंबरों को हटाने गई उत्तर प्रदेश पुलिस और जिला कोर्ट के वकीलों के बीच तीखी झड़प हुई थी।
- अवैध कब्जे की स्थिति: 4 अगस्त को नगर निगम ने कोर्ट को बताया कि अब तक 100 से अधिक अवैध निर्माण ध्वस्त किए जा चुके हैं। हालांकि, जिन 72 वकीलों/दुकानदारों को शुरुआती नोटिस दिया गया था, उनमें से केवल 14 के निर्माण हटाए गए थे, लेकिन उन पर फिर से अतिक्रमण कर लिया गया है।
- सार्वजनिक असुविधा: अप्रैल में दिए गए आदेश में कोर्ट ने कहा था कि जिला न्यायालय के पास आम जनता और वादकारियों को इस अवैध अतिक्रमण के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लखनऊ के कैसरबाग स्थित सिविल कोर्ट/पुराने हाईकोर्ट परिसर के बाहर अवैध चेंबर
17 मई 2026 को लखनऊ के कैसरबाग स्थित सिविल कोर्ट/पुराने हाईकोर्ट परिसर के बाहर अवैध चेंबरों और अस्थायी दुकानों को हटाने गई पुलिस और वकीलों के बीच भारी झड़प हुई थी।
पूरी घटना की पृष्ठभूमि और झड़प का मुख्य कारण
- हाईकोर्ट का आदेश: इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) की न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ के निर्देश पर लखनऊ नगर निगम और स्थानीय प्रशासन ने यह अभियान चलाया था।
- बुलडोजर कार्रवाई और विरोध: 17 मई को सुबह 10 से अधिक बुलडोजरों और भारी पुलिस बल (PAC सहित) की मौजूदगी में अवैध अतिक्रमण ढहाने का काम शुरू किया गया।
- विवाद की वजह: नगर निगम ने न्यायालय में 72 अवैध कब्जों की सूची प्रस्तुत की थी। हालांकि, कार्रवाई के दौरान लगभग 200 से 240 चेंबरों व ढांचों को तोड़ा जाने लगा, जिसका अधिवक्ताओं ने विरोध किया। वकीलों का आरोप था कि उन्हें बिना पूर्व सूचना या पर्याप्त समय दिए चेंबर ध्वस्त किए जा रहे हैं।
- झड़प और लाठीचार्ज: विरोध दर्ज करा रहे वकीलों और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी बहस के बाद स्थिति बिगड़ गई। झड़प और पथराव के बीच पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसमें दर्जनों वकील और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
इसके बाद की कानूनी प्रक्रिया और घटनाक्रम
1. कार्य बहिष्कार और वकीलों का विरोध
- घटना के विरोध में स्थानीय बार एसोसिएशन और अधिवक्ताओं ने 18 से 20 मई 2026 तक न्यायिक कार्यों के बहिष्कार की घोषणा की।
- वकीलों ने संबंधित पुलिस अधिकारियों (जैसे थानाध्यक्ष/एसएचओ) के निलंबन और घायल वकीलों के लिए मुआवजे की मांग की।
2. उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग (UPHRC) में शिकायत
- इस कार्रवाई को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता द्वारा उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग में याचिका/शिकायत दाखिल की गई।
- याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रशासनिक अधिकारियों ने बिना कानूनी प्रक्रिया (Notice and Hearing) और बिना किसी पुनर्वास व्यवस्था के चेंबर तोड़े हैं, जो कि संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इसमें बल प्रयोग की स्वतंत्र जांच की मांग की गई।
3. प्रशासनिक और न्यायिक रुख
- पुलिस प्रशासन (DCP वेस्ट) और नगर निगम का रुख था कि कार्रवाई पूरी तरह से हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की गई। सरकारी जमीन और नालों के ऊपर बने अनधिकृत कब्जों को हटाने के लिए अभियान चलाया गया था।
- मामला हाईकोर्ट की निगरानी में होने के कारण प्रशासन ने आगामी रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौंपी।

