केस मैट्रिक्स एवं विधिक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| संबंधित न्यायिक अधिकारी | न्यायाधीश गायत्री (पूर्व प्रधान सिविल जज, मालूर, कोलार) |
| नया पदस्थापना स्थान | हुमनाबाद (बीदर जिला, कर्नाटक) |
| उच्च न्यायालय पीठ | न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना |
| मुख्य आदेश | एफआईआर की जांच पर स्टे; आचरण को ‘न्यायिक पद के अनुपयुक्त’ मानते हुए प्रशासनिक तबादला। |
Malur Principal Civil Judge and JMFC Gayatri: कर्नाटक हाईकोर्ट ने मालूर की प्रधान सिविल न्यायाधीश और जेएमएफसी (JMFC) गायत्री का स्थानांतरण (Transfer) बीदर जिले के हुमनाबाद कर दिया है।
हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल एम. चंद्रशेखर रेड्डी द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह तबादला प्रशासनिक कारणों और जनहित को ध्यान में रखते हुए किया गया है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई एक रोड रेज (Road Rage) की घटना में उनकी संलिप्तता का सीसीटीवी फुटेज सामने आने और हाई कोर्ट द्वारा उनके आचरण पर कड़ी आपत्ति जताए जाने के बाद की गई है।
मामला क्या था? (The Incident & CCTV Footage)
- सड़क पर विवाद और पुलिस का इस्तेमाल: रिपोर्ट के अनुसार, बाइक सवार दो युवकों द्वारा महिला न्यायाधीश की निजी गाड़ी को ओवरटेक करने के बाद विवाद शुरू हुआ। इसके बाद जज ने बाइक सवारों के साथ बहस की और कथित तौर पर पुलिस तंत्र का इस्तेमाल करते हुए उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करवा दिया।
- सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल: इस घटना का सीसीटीवी फुटेज और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें न्यायिक अधिकारी का व्यवहार सामने आया।
उच्च न्यायालय का आदेश और सख्त टिप्पणियां
28 जुलाई 2026 को दिए अपने आदेश में न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों की जांच के बाद निम्नलिखित कड़े निर्देश दिए।
- पद की गरिमा के खिलाफ आचरण: हाई कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारी का व्यवहार उनके पद की गरिमा और उनसे अपेक्षित मानकों के पूरी तरह विपरीत था।हाई कोर्ट की टिप्पणी: “सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि न्यायिक अधिकारी ने अपने धारित पद के पूर्णतः अनुपयुक्त आचरण किया।”
- जांच पर रोक: अदालत ने महिला जज की शिकायत पर दोनों बाइक सवारों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में आगे की पुलिस जांच पर तत्काल रोक (Stay) लगा दी।
- मुख्य न्यायाधीश को रिपोर्ट: न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने प्रशासनिक कार्रवाई के लिए जज के आचरण की रिपोर्ट कर्नाटक हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के समक्ष रखने का निर्देश दिया, जिसके बाद 5 अगस्त को स्थानांतरण की यह कार्रवाई की गई।
यह है कोलार जिले के मालूर (Malur) की प्रधान सिविल न्यायाधीश एवं जेएमएफसी गायत्री का रोडरेज विवाद
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कोलार जिले के मालूर (Malur) की प्रधान सिविल न्यायाधीश एवं जेएमएफसी गायत्री (Gayatri) का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण (Transfer) बीदर जिले के हुमनाबाद कर दिया है। यह स्थानांतरण सड़क पर हुए एक विवाद (Road Rage), अधिकारों के दुरुपयोग और न्यायिक मर्यादा के उल्लंघन से जुड़े मामले में हाई कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद किया गया है।
विवाद का पूरा विवरण (रोड रेज घटना)
- घटना की शुरुआत (18 जुलाई 2026): विनय नामक एक युवक अपनी मोटरसाइकिल से जा रहा था। उसने न्यायाधीश गायत्री की निजी इनोवा कार को ओवरटेक किया और कार चला रहे उनके पति को गाड़ी धीरे चलाने का इशारा किया।
- घर तक पीछा और बहस: कार ओवरटेक करने से गुस्सा होकर न्यायाधीश और उनके पति ने बाइक सवार का पीछा किया और उसके घर तक पहुँच गए। वहाँ न्यायाधीश, उनके पति और युवक के परिवार (उसकी माँ और 70 वर्षीय दादा) के बीच तीखी बहस हुई।
- सीसीटीवी और सोशल मीडिया पर वीडियो: इस पूरे विवाद का सीसीटीवी (CCTV) फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
- पुलिस में शिकायत व गिरफ्तारी: घटना के बाद न्यायाधीश ने 23 जुलाई को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए युवक और उसके 70 वर्षीय बुजुर्ग दादा को गिरफ्तार कर लिया।
कानूनी प्रक्रिया और हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
पीड़ित परिवार ने पुलिस एफआईआर (FIR) और कानूनी कार्रवाई को चुनौती देने के लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय का रुख किया। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्न की एकल पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए बेहद सख्त रुख अपनाया:
- “अपने ही मामले में स्वयं जज बनीं (Judge in her own cause)”: हाई कोर्ट को जब पता चला कि पुलिस ने सोशल मीडिया से वायरल वीडियो हटाने की अनुमति मांगी थी, तो न्यायाधीश गायत्री ने खुद शिकायतकर्ता होते हुए भी अपने ही कोर्ट से वीडियो हटाने का न्यायिक आदेश जारी कर दिया। हाई कोर्ट ने इसे “कानूनी सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन” और “अधिकारों का दुरुपयोग” करार दिया।
- अहंकार और न्यायिक मर्यादा: पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल कार ओवरटेक करने से किसी न्यायाधीश का अहंकार आहत नहीं होना चाहिए। न्यायिक पद का अर्थ यह नहीं है कि कोई व्यक्ति सड़क पर आम जनता के साथ हाथापाई या दब्बूपन दिखाए। न्यायिक गरिमा सिर्फ कोर्ट रूम तक सीमित नहीं होती।
- पीड़ितों के खिलाफ कार्रवाई पर रोक: हाई कोर्ट ने पुलिस द्वारा युवक और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज की गई पूरी एफआईआर और आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी।
अब तक की कार्रवाई
- स्थानांतरण (Transfer Order): 5 अगस्त 2026 को हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी अधिसूचना के तहत न्यायाधीश गायत्री को मालूर से हटाकर तुरंत हुमनाबाद (बीदर) स्थानांतरित कर दिया गया।
- विभागीय जांच की सिफारिश: हाई कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि मामले की फाइल मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के समक्ष विभागीय/अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) के लिए रखी जाए।
- वकील संघ का विरोध: बेंगलुरु एडवोकेट्स एसोसिएशन और स्थानीय वकीलों ने भी न्यायाधीश के आचरण की निंदा करते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक निलंबन की मांग की थी।

