Tuesday, September 22, 2026
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Corruption Act: भ्रष्टाचार मामलों में पूर्व नौकरशाहों पर मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति के नियम…दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला सभी पढ़ें

विधिक एवं मामला मैट्रिक्स (Legal Reference Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (अगस्त 2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति नवीन चावला एवं न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा (दिल्ली उच्च न्यायालय)
संबंधित अधिनियमभ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (PC Act) की धारा 19(1) (2018 संशोधन)
कट-ऑफ तिथि26 जुलाई 2018 (संशोधन लागू होने की तिथि)
मुख्य कानूनी सिद्धांतयदि 26.07.2018 से पहले संज्ञान नहीं लिया गया है, तो पूर्व लोक सेवकों के लिए भी अभियोजन स्वीकृति (Sanction) अनिवार्य है; पुराने संज्ञान लिए जा चुके मामलों पर यह लागू नहीं होगा।
न्यायालय मित्र (Amicus Curiae)वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ यादव

Corruption Act: दिल्ली हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act, 1988) की धारा 19(1) के 2018 संशोधन की व्याख्या पर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा की खंडपीठ ने विशेष सीबीआई (CBI) अदालत द्वारा भेजे गए विधिक संदर्भ (Reference) का निपटारा करते हुए यह व्यवस्था दी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 2018 का संशोधन — जो सेवानिवृत्त या पूर्व लोक सेवकों (Ex-Civil Servants) को भी अभियोजन स्वीकृति की सुरक्षा प्रदान करता है — भूतलक्षी (Retrospective) रूप से लागू होगा, लेकिन केवल उन मामलों में जहां अदालत ने 26 जुलाई 2018 तक संज्ञान (Cognizance) नहीं लिया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए मुख्य प्रश्नों के उत्तर

विशेष सीबीआई न्यायाधीश द्वारा भेजे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए पीठ ने निम्नलिखित विधिक सिद्धांत तय किए:

क्या संज्ञान ‘अपराध’ का लिया जाता है या ‘अपराधी’ का?

  • अदालत का निष्कर्ष: सामान्य आपराधिक कानून का यह सिद्धांत कि “संज्ञान अपराध का लिया जाता है, अपराधी का नहीं”, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19(1) पर लागू नहीं होता।
  • व्याख्या: किसी लोक सेवक द्वारा धारा 7, 11, 13 और 15 के तहत किए गए कथित अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लिया जा सकता जब तक कि उस विशिष्ट लोक सेवक के खिलाफ पूर्व अभियोजन स्वीकृति (Previous Sanction) प्राप्त न कर ली गई हो।

क्या 2018 का संशोधन भूतलक्षी (Retrospective) है? (26 जुलाई 2018 की कट-ऑफ तिथि)

  • अदालत का निष्कर्ष: 2018 का संशोधन भूतलक्षी (Retrospective) है, लेकिन एक सीमा तक:
    • यदि अपराध 26 जुलाई 2018 से पहले भी किया गया था, तब भी अभियुक्त/पूर्व लोक सेवक को इस संशोधन का लाभ मिलेगा, बशर्ते अदालत ने 26.07.2018 तक मामले में संज्ञान न लिया हो।
    • हालांकि, यह कानून भविष्यलक्षी (Prospective) इस मायने में है कि जिन मामलों में अदालत 26 जुलाई 2018 से पहले ही संज्ञान ले चुकी है, उन्हें दोबारा नहीं खोला जाएगा और उनमें नई स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी।

क्या 26.07.2018 से पहले संज्ञान लिए जा चुके मामलों में पूर्व लोक सेवक के लिए नई स्वीकृति चाहिए?

  • अदालत का निष्कर्ष: नहीं।
  • यदि सक्षम अदालत ने 26 जुलाई 2018 से पहले संज्ञान ले लिया था, तो 2018 के संशोधन का हवाला देकर मुकदमे को पुनः नहीं रोका जाएगा और न ही नए सिरे से अभियोजन स्वीकृति लेने की आवश्यकता होगी।

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