Saturday, August 8, 2026
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Doctor’s Strike: यदि मरीजों की मृत्यु हो जाती है, तो क्या वे मृत व्यक्तियों को वापस जीवित कर सकते हैं?…इस सवाल का जवाब डॉक्टरों से क्यों किया

केस एवं विवाद मैट्रिक्स (Case Overview)

Doctor’s Strike: बॉम्बे उच्च न्यायालय (Bombay High Court) ने डॉक्टरों की राज्यव्यापी हड़ताल का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए मौखिक टिप्पणी की है कि अदालत जल्द ही यह सिद्धांत प्रतिपादित करेगी कि डॉक्टर हड़ताल पर नहीं जा सकते

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश (ACJ) रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखाड की पीठ के कड़े रुख और “काम नहीं तो वेतन नहीं” (No Work, No Pay) की चेतावनी के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने महाराष्ट्र में अपनी हड़ताल तुरंत वापस लेने की घोषणा कर दी।

विवाद की वजह (The Trigger: Homeopathy Bridge Course)

  • सरकारी संकल्प (Government Resolution): महाराष्ट्र सरकार ने एक जीआर (GR) जारी किया था, जिसके तहत ब्रिज कोर्स (Certificate Course in Modern Pharmacology) पूरा करने वाले होम्योपैथी (BHMS) चिकित्सकों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) के तहत पंजीकृत होने और एलोपैथिक (Modern Medicines) दवाएं लिखने की अनुमति दी गई थी।
  • डॉक्टरों का विरोध: इसके विरोध में आईएमए (IMA) से जुड़े डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी थी, जिससे आईसीयू और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होने का खतरा बन गया था।

उच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणियां और कानूनी रुख

जीवन का अधिकार और अन्य पेशों से तुलना

अदालत ने कहा कि अन्य पेशों या फैक्ट्रियों में हड़ताल का असर केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित रहता है, लेकिन डॉक्टरों की हड़ताल के परिणाम अपूरणीय होते हैं।

हाई कोर्ट की टिप्पणी: “यदि किसी कारखाने में 30 दिन हड़ताल होती है, तो सबसे बुरा परिणाम कमाई का नुकसान है। लेकिन डॉक्टरों के मामले में, यदि मरीजों की मृत्यु हो जाती है, तो क्या वे मृत व्यक्तियों को वापस जीवित कर सकते हैं?”

‘No Work, No Pay’ की चेतावनी

पीठ ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक या सरकारी अस्पतालों में किसी भी मरीज की जान हड़ताल के कारण नहीं जानी चाहिए। यदि हड़ताल जारी रहती है, तो डॉक्टरों का वेतन रोकने का आदेश दिया जाएगा। इसके बाद IMA ने अदालत में हड़ताल तुरंत वापस लेने का आश्वासन दिया।

स्वतः संज्ञान याचिका लंबित रहेगी

अदालत ने आईएमए द्वारा हड़ताल वापस लेने के बाद भी स्वतः संज्ञान याचिका को बंद नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि वह इस बड़े कानूनी सवाल पर अंतिम दिशानिर्देश (Authoritative Principles) तय करेगी कि क्या डॉक्टरों के पास हड़ताल पर जाने का कोई कानूनी अधिकार है। सहायता के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता विनीत नाइक और अधिवक्ता अमोघ सिंह को न्यायालय मित्र (Amici Curiae) नियुक्त किया गया है।

यहां जानें: मुंबई और महाराष्ट्र भर में रेजिडेंट डॉक्टरों (MARD और IMA) की हड़ताल

मुंबई और महाराष्ट्र भर में रेजिडेंट डॉक्टरों (MARD और IMA) की हड़ताल का मुख्य कारण होम्योपैथी डॉक्टरों को एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति और महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) में उनके पंजीकरण का मुद्दा है।

डॉक्टरों की प्रमुख मांगें

  • ‘क्रॉस-पैथी’ और ‘मिक्सोपैथी’ पर रोक: डॉक्टरों की मांग है कि BHMS (होम्योपैथी) डिग्री धारकों को 1-वर्षीय ‘सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी’ (CCMP) करने के बाद एलोपैथिक (आधुनिक) दवाएं लिखने की अनुमति न दी जाए।
  • MMC रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पर तत्काल रोक: महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) द्वारा CCMP-योग्य होम्योपैथ्स को दिए जा रहे पंजीकरण पर तुरंत रोक लगाई जाए।
  • मरीजों की सुरक्षा का तर्क: एलोपैथिक डॉक्टरों का तर्क है कि बिना व्यापक क्लिनिकल प्रशिक्षण के एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति देने से मरीजों की जान और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो सकता है।

सरकार और न्यायपालिका के स्तर पर उठाए गए कदम

  • बॉम्बे हाई कोर्ट का हस्तक्षेप:
    • हाई कोर्ट ने हड़ताल पर सख्त रुख अपनाते हुए डॉक्टरों को तुरंत काम पर लौटने के निर्देश दिए और “काम नहीं तो वेतन नहीं” (No Work, No Pay) की चेतावनी दी।
    • कोर्ट के इस हस्तक्षेप और अपील के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ले ली है।
  • राज्य सरकार (मुख्यमंत्री) का रुख:
    • अदालत के आदेशों का पालन: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार बॉम्बे हाई कोर्ट के सभी निर्देशों का पूरी तरह से पालन करेगी। यदि अदालत अलग रजिस्टर/रजिस्ट्री बनाए रखने का निर्देश देती है, तो सरकार वही करेगी।
    • स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली: सरकार ने वरिष्ठ डॉक्टरों और इंटर्न्स की मदद से अस्पतालों में आपातकालीन और OPD सेवाएं सुचारू रखने के प्रबंध किए।
    • निष्पक्षता का आश्वासन: मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लिए सभी चिकित्सा पद्धतियों के डॉक्टर समान हैं और सरकार किसी भी डॉक्टर या मरीज के हित के खिलाफ अन्याय नहीं करेगी।

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