Saturday, November 7, 2026
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Advocate Behind Bar: वकील गिरफ्तारी का विरोध कर सकते हैं, लेकिन पुलिस को आरोपी की कोर्ट में पेशी से नहीं रोक सकते…मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी

केस एवं कानूनी सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (अगस्त 2026)
मामलाAjith Kumar Vs State
माननीय पीठन्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती (मद्रास उच्च न्यायालय)
संबंधित कानूनी धाराएंIPC धारा 225 (सरकारी हिरासत/पेशी में बाधा डालना) एवं धारा 186
मुख्य कानूनी सिद्धांतशांतिपूर्ण विरोध अधिकार है, लेकिन पुलिस द्वारा आरोपी को रिमांड कोर्ट के सामने पेश करने से रोकना गैर-कानूनी है।
अदालत का आदेशशर्त (लिखित माफी/हलफनामा) के साथ FIR रद्द करने का निर्देश।

Advocate Behind Bar: मद्रास हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि अधिवक्ताओं (वकीलों) को अपने साथी वकीलों की गिरफ्तारी के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन वे पुलिस को आरोपी व्यक्ति को रिमांड के लिए अदालत के समक्ष पेश करने से नहीं रोक सकते।

न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती की एकल पीठ ने [अजीत कुमार बनाम राज्य] मामले में यह टिप्पणी करते हुए 10 वकीलों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले (FIR) को एक शर्त के साथ रद्द करने का आदेश दिया।

उच्च न्यायालय का रुख और कानूनी सिद्धांत

  1. रिमांड का विरोध अदालत के भीतर करें: पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस द्वारा किसी आरोपी या वकील के साथ मनमानी या अत्यधिक बल का प्रयोग (Police Excesses) किया गया है, तो सही कानूनी तरीका यह है कि रिमांड अदालत (Remand Court) के समक्ष उपस्थित होकर इसका विरोध दर्ज कराया जाए, न कि पुलिस की पेशी में बाधा डाली जाए।हाई कोर्ट की टिप्पणी: “भले ही वकीलों के खिलाफ पुलिस ने ज्यादती की हो, फिर भी वैध तरीका यह है कि जिस अदालत के सामने आरोपियों को पेश किया जा रहा है, वहां उपस्थित होकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई जाए, पीठासीन अधिकारी से रिमांड स्वीकार न करने की अपील की जाए और कानूनी उपचार मांगा जाए।”
  2. IPC की धारा 225 के तहत अपराध: कोर्ट ने कहा कि पुलिस को किसी अभियुक्त को रिमांड के लिए पेश करने से रोकना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 225 (कानूनी हिरासत या गिरफ्तारी में बाधा डालना) के तहत पहली नजर में अपराध की श्रेणी में आता है।

Advocate Behind Bar: मामला क्या था? (नवंबर 2023 की घटना)

  • विवाद की जड़: नवंबर 2023 में सांथनकाडू (Sathankadu) पुलिस ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम से जुड़े 2 साल पुराने एक मामले में दो वकीलों (दिनेश और नीरज) को गिरफ्तार किया था।
  • अदालत परिसर में हंगामा: वकीलों का आरोप था कि उनके साथियों को झूठे मामले में फंसाया गया है। जब पुलिस उन्हें रिमांड के लिए विशेष अदालत में पेश करने लाई, तो 10 वकीलों ने परिसर के भीतर विरोध प्रदर्शन कर पुलिस को पेशी से रोक दिया।
  • FIR और समिति की रिपोर्ट: हाई कोर्ट की सुरक्षा समिति द्वारा सीसीटीवी (Video Footage) की जांच के बाद, रजिस्ट्रार (प्रशासन) की शिकायत पर 2025 में वकीलों के खिलाफ IPC की धारा 186, 152 और 225 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

Advocate Behind Bar: सशर्त राहत (Conditional Quashing)

अदालत ने मामले की विशेष परिस्थितियों (जैसे पुलिस द्वारा बाद में दोनों वकीलों को जमानत पर छोड़ देना और चार्जशीट दाखिल न होना) को ध्यान में रखते हुए सभी 10 वकीलों के खिलाफ FIR रद्द करने पर सहमति व्यक्त की।

शर्त: सभी याचिकाकर्ता वकीलों को 10 कार्य दिवसों के भीतर हलफनामा (Affidavit) दाखिल कर अपने “अत्यधिक/उग्र व्यवहार” के लिए खेद प्रकट करना होगा। यदि कोई याचिकाकर्ता हलफनामा दाखिल नहीं करता है, तो उसके खिलाफ IPC की धारा 225 के तहत मुकदमा जारी रहेगा।

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