केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति विक्रम नाथ एवं न्यायमूर्ति संदीप मेहता |
| मुख्य विषय | पुलिस थानों में चालू सीसीटीवी कैमरों की कमी, कस्टोडियल डेथ्स एवं पुलिस आधुनिकीकरण |
| केंद्र का बयान | नई अम्ब्रेला पुलिस आधुनिकीकरण योजना वित्त मंत्रालय की मंजूरी हेतु भेजी गई; ASUMP योजना 31 मार्च 2027 तक विस्तारित। |
| एमिक्स क्यूरी | वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे |
| अगला कदम | केंद्र सरकार नई योजना के विस्तृत ब्यौरे के साथ कोर्ट में हलफनामा पेश करेगी। |
Modernization of Police Force: सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार द्वारा अवगत कराया गया है कि देश भर में संपूर्ण पुलिस बल के आधुनिकीकरण (Modernization of Police Force) के लिए एक व्यापक ‘अम्ब्रेला योजना’ (Umbrella Scheme) तैयार की जा रही है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) राजकुमार भास्कर ठाकरे ने यह जानकारी दी। इसके साथ ही केंद्र ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पुलिस आधुनिकीकरण के लिए दी जाने वाली सहायता योजना (ASUMP) को 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया है। यह सुनवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुलिस थानों में सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के काम न करने और हिरासत में मौतों (Custodial Deaths) पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर दर्ज की गई जनहित याचिका पर हो रही थी। इस प्रस्तावित योजना को सैद्धांतिक मंजूरी (In-Principle Approval) के लिए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure) के पास भेजा गया है।
सुनवाई की मुख्य बातें: ‘आधुनिकीकरण’ का मतलब क्या हो?
- अदालत और एमिक्स क्यूरी (Amicus Curiae) की चिंताएं:
- मामले में न्याय मित्र (Amicus Curiae) वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने ध्यान दिलाया कि मौजूदा ASUMP योजना के तहत राज्य/केंद्र शासित प्रदेश गाड़ियों (जैसे जिप्सी आदि) की मांग करने लगते हैं। जबकि पुलिस बल के वास्तविक आधुनिकीकरण का मतलब उन्नत उपकरण (Advanced Gear), फॉरेंसिक और वैज्ञानिक जांच पद्धतियां और तकनीकी अवसंरचना होना चाहिए।
- न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने इस पर सहमति व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिकीकरण के तहत पुलिस बलों को हाई-टेक उपकरण (High-Tech Equipment) और उन्नत तकनीक मुहैया कराई जानी चाहिए।
- अदालत का निर्देश:
- पीठ ने मामले को स्थगित करते हुए ASG को निर्देश दिया कि वे प्रस्तावित अम्ब्रेला योजना के विस्तृत ब्यौरे के साथ एक हलफनामा (Affidavit) अदालत में दाखिल करें।
मामले की पृष्ठभूमि और घटनाक्रम (Background Timeline)
यह सुओ मोटू मामला पुलिस थानों में सुरक्षा, पारदर्शिता और हिरासत में होने वाली मौतों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख से जुड़ा है:
- सितंबर 2025 (मामले की शुरुआत): ‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट में 7-8 महीनों में पुलिस हिरासत में 11 मौतों की खबर आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया।
- ऐतिहासिक संदर्भ (परमवीर सिंह सैनी निर्णय, 2020): सुप्रीम कोर्ट ने परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह (2020) मामले में देश के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था, लेकिन इसका अनुपालन कई राज्यों में अधूरा या निष्क्रिय रहा।
- सितंबर 2025 (निगरानी का मुद्दा): कोर्ट ने कहा कि कैमरों की स्वतंत्र और बिना मानवीय हस्तक्षेप (Human Intervention) के मॉनिटरिंग की जरूरत है, क्योंकि थानों में अधिकारी जानबूझकर सीसीटीवी बंद कर देते हैं।
- अक्टूबर 2025 – जनवरी 2026 (केंद्रीकृत कमांड सेंटर): राजस्थान सरकार से पूछताछ के दौरान न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि थानों के सीसीटीवी फीड को केंद्रीय एजेंसी/कमांड सेंटर से जोड़ा जाना चाहिए (जैसे राजस्थान में सड़कों का सीसीटीवी फीड जुड़ा होता है)। यदि कोई कैमरा बंद होता है, तो तुरंत अलर्ट जाना चाहिए।
- अप्रैल 2026 (केरला मॉडल पर चर्चा): कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था और सवाल किया था कि अन्य राज्य पुलिस थानों की लाइव मॉनिटरिंग के लिए ‘केरल मॉडल’ (Kerala Model) को क्यों नहीं अपना रहे हैं। तत्पश्चात अटॉर्नी जनरल ने सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया था।

