Saturday, November 7, 2026
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Legal Strike On Politics-I: एक IAS को ‘पाकिस्तानी’ कहने पर बीजेपी MLC एन. रविकुमार को नसीहत, नेताओं को अपनी जीभ पर नियंत्रण रखना होगा

केस एवं कानूनी सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (अगस्त 2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना (कर्नाटक उच्च न्यायालय)
याचिकाकर्ताएन. रविकुमार (बीजेपी MLC)
पीड़ित पक्षफौज़िया तरन्नुम (IAS अधिकारी)
मुख्य कानूनी मुद्दाBNS की धाराओं के तहत दर्ज FIR को रद्द करने की मांग व लोक सेवकों के खिलाफ हेट स्पीच/व्यक्तिगत टिप्पणियां
अदालत का रुखनेताओं की अमर्यादित टिप्पणी पर कड़ा रुख; रिकॉर्ड तलब, अगली सुनवाई 20 अगस्त को।

Legal Strike On Politics-I: कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला आईएस अधिकारी (IAS Officer) फौज़िया तरन्नुम को “पाकिस्तानी” कहने के मामले में भाजपा विधान परिषद सदस्य (MLC) एन. रविकुमार को कड़ी फटकार लगाई है।

भाजपा नेता रविकुमार द्वारा अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द (Quash) करने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने कहा कि राजनेताओं की ऐसी अनर्गल बयानबाजी से अदालतें फालतू के मुकदमों से पट रही हैं। कोर्ट ने साफ लहजे में कहा कि केवल धर्म के आधार पर किसी सिविल सेवक के खिलाफ ऐसी बयानबाजी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय की कड़ी टिप्पणियां

  1. “क्या आप सोचते हैं कि आप कुछ भी बोल सकते हैं?” न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने याचिकाकर्ता के आचरण पर भारी नाराजगी जताते हुए कहा:“वह राज्य की एक जिम्मेदार IAS अधिकारी हैं। आप इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाइए, लेकिन यह बहुत ज्यादा हो चुका है। विरोध प्रदर्शन क्या था? मैं इसे बिल्कुल माफ नहीं करूंगा… क्या आप सोचते हैं कि आप कुछ भी बोल सकते हैं? मैं इसकी अनुमति नहीं दूंगा।”
  2. “नेताओं के बयानों से न्यायपालिका पर बोझ बढ़ रहा है” न्यायाधीश ने राजनीति के गिरते स्तर और बयानों पर गहरी चिंता व्यक्त की:
    • जीभ पर लगाम रखें: “आप सभी को अपनी जीभ पर नियंत्रण रखना चाहिए। वरना आपराधिक अदालतें ऐसे तुच्छ मामलों से भरी रहती हैं। हत्या और रंगदारी जैसे मामले 10-10 साल से लंबित हैं, और आपके अपनी जीभ पर नियंत्रण न रखने के कारण अदालतें ऐसे मामलों से भरती जा रही हैं।”
    • जनता की भलाई पर बात करें: “चाहे कोई भी राजनीतिक दल हो, आप दोनों (पक्ष-विपक्ष) को यह सब बंद करना चाहिए। सिर्फ एक-दूसरे पर कीचड़ उछालना रह गया है। कोई नीतियों पर बात नहीं करता, कोई ज्वलंत मुद्दों पर बात नहीं करता। लोगों को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है कि आप एक-दूसरे के खिलाफ क्या बोलते हैं, वे अपनी भलाई में रुचि रखते हैं।”
  3. धर्म के आधार पर निशाना साधने पर सवाल जब रविकुमार के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल ने माफी मांग ली है, तो कोर्ट ने सवाल किया कि क्या महज माफी मांग लेने से उनके बयान का प्रभाव खत्म हो जाता है? कोर्ट ने पूछा कि किसी आईएएस अधिकारी को उसके धर्म के आधार पर निशाना कैसे बनाया जा सकता है?

विवाद की पृष्ठभूमि (May 2025 घटनाक्रम)

  • घटना: मई 2025 में एक राजनीतिक रैली के दौरान बीजेपी एमएलसी एन. रविकुमार ने आईएएस अधिकारी फौज़िया तरन्नुम पर कांग्रेस पार्टी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था और उनकी उत्पत्ति/मूल को लेकर उन्हें ‘पाकिस्तानी’ कहा था।
  • दर्ज FIR: इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं (जैसे धारा 193 और 353) के तहत एफआईआर दर्ज की थी, जिसे रद्द कराने के लिए रविकुमार हाई कोर्ट पहुंचे थे।

पुलिस और प्रशासन के आचरण पर भी कोर्ट का रुख

  • तिरंगा फहराने से रोकने पर भी सवाल: विशेष लोक अभियोजक (SPP) बी.एन. जगदीश द्वारा यह कहे जाने पर कि शिकायत दर्ज कराने के बजाय नेता को वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी बात रखनी चाहिए थी, कोर्ट ने संतुलन बनाते हुए पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए।
  • कोर्ट ने कहा कि यदि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) ले जाने से रोका था, तो पुलिस की कार्रवाई भी गलत थी।
  • हाई कोर्ट का निर्देश: कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह विरोध प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े पूरे रिकॉर्ड पेश करे। न्यायमूर्ति नागप्रसन्ना ने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस ने तिरंगा ले जाने से रोका था तो कोर्ट उस पर भी जुर्माना लगाएगा, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि रविकुमार को ऐसे बयान देने की छूट मिल जाएगी।

मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को होगी।

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