Tuesday, September 22, 2026
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Legal Strike On Politics: स्वतंत्रता सेनानियों ने सीने पर गोलियां खाईं और आप अंडों से डरती हैं? महुआ मोइत्रा की वर्चुअल पेशी की याचिका खारिज

केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)

विधिक/प्रशासनिक बिंदुविवरण (7 अगस्त 2026)
माननीय पीठन्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता एवं न्यायमूर्ति शील नागू
याचिकाकर्तामहुआ मोइत्रा (TMC सांसद)
मुख्य विवादधार्मिक भावनाएं आहत करने के मामले में पुलिस के सामने व्यक्तिगत बनाम वर्चुअल पेशी
अदालत का फैसलायाचिका वापस लेने के आधार पर खारिज; महुआ मोइत्रा को 14 अगस्त को पुलिस के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।

Legal Strike On Politics: सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका को सुनने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने ‘अंडे फेंके जाने के डर’ का हवाला देते हुए पुलिस के सामने वर्चुअल (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए) पेश होने की अनुमति मांगी थी।

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने सीने पर गोलियां खाई हैं, तो फिर एक राजनेता को अंडों (Egg Attacks) से डर क्यों लगना चाहिए। शीर्ष अदालत के इस कड़े रुख के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने याचिका वापस ले ली, जिसके बाद कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियां

  1. ‘राजनीति में आईं तो अंडों से क्या डरना?’ न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने महुआ मोइत्रा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन से सवाल किया।
  2. न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की टिप्पणी: “राजनीति में उतरने के बाद आप अंडों से क्यों डरती हैं? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने सीने पर गोलियां खाई थीं।”
  3. ‘क्या सांसद होने के नाते वर्चुअल पेशी चाहिए?’ जब वकील ने मोइत्रा को पुलिस अधिकारी के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति देने का आग्रह किया, तो न्यायमूर्ति दत्ता ने पूछा: “सिर्फ इसलिए कि आप एक सांसद (MP) हैं, इसलिए वर्चुअल पेशी चाहिए?” पीठ ने यह भी कहा कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक लाना ही नहीं चाहिए था।

मामला और कलकत्ता उच्च न्यायालय का आदेश

  • FIR की वजह: महुआ मोइत्रा के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में एक आपराधिक मामला (FIR) दर्ज किया गया है।
  • कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला (21 जुलाई): न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की पीठ ने मोइत्रा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत (Interim Protection) दी थी, लेकिन निर्देश दिया था कि वह संसद के मानसून सत्र खत्म होने के बाद 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश हों। हाई कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया था कि पेशी के दौरान उनके साथ कोई उत्पीड़न या अप्रिय घटना न हो।

याचिकाकर्ता (महुआ मोइत्रा) की दलीलें

  • कानूनी अधिकार का हवाला: वरिष्ठ अधिवक्ता शंकरनारायणन ने दलील दी कि कानून (CRPC/BNSS) महिलाओं को जांच के लिए उनके निवास स्थान के अलावा किसी अन्य स्थान पर उपस्थित होने के लिए मजबूर न किए जाने का संरक्षण प्रदान करता है।
  • अंडे फेंके जाने की घटनाएं: वकील ने कहा कि जब मोइत्रा पिछली बार अपने निर्वाचन क्षेत्र के पुलिस स्टेशन गई थीं, तो उन पर अंडे फेंके गए थे और धमकियां दी गई थीं। इसलिए सुरक्षा और कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए उन्हें वर्चुअल रूप से पेश होने की अनुमति दी जाए।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि सांसद को जांच का सामना व्यक्तिगत रूप से ही करना होगा।

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