केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति किरणमयी मंडावा (आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय) |
| संबंधित संस्थान | डॉ. एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (Dr. NTR University of Health Sciences) |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत (Audi Alteram Partem): आरोपी छात्र को सबूत दिए बिना या निष्पक्ष सुनवाई के बिना डिबार/प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। |
| अदालत का निर्णय | 1 साल का प्रतिबंध रद्द; छात्र को सबूत देकर नई प्रक्रिया अपनाने और अगस्त 2026 की परीक्षा फीस जमा करने का निर्देश। |
Examination Ban: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक एमबीबीएस (MBBS) छात्र पर कथित नकल (Malpractice) के आरोप में लगाए गए एक साल के परीक्षा प्रतिबंध (Examination Ban) को रद्द कर दिया है।
न्यायमूर्ति किरणमयी मंडावा की एकल पीठ ने 3 अगस्त 2026 के अपने आदेश में यह फैसला सुनाते हुए टिप्पणी की कि किसी छात्र को परीक्षा से वंचित करना एक अत्यंत गंभीर दंडात्मक कदम है, जिसका उसके शैक्षणिक करियर और भविष्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अदालत ने पाया कि विश्वविद्यालय ने छात्र को आरोपी साबित करने के लिए इस्तेमाल किए गए सबूत (Material) मुहैया कराए बिना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) का पालन किए बिना ही दोषी ठहरा दिया था।
हाई कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां
- प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष सुनवाई का अवसर:“जब अनुशासनात्मक प्राधिकारी (Disciplinary Authority) किसी छात्र को परीक्षा से वंचित करने का दंड लगाता है, तो उसे यह साबित करना होगा कि जब्त की गई सामग्री संबंधित परीक्षा से सीधे तौर पर प्रासंगिक है। साथ ही, छात्र को सुनवाई का निष्पक्ष और पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए, क्योंकि इस तरह के कड़े दंड से एक पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद हो सकता है और छात्र के शैक्षणिक भविष्य को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।”
- साक्ष्य उपलब्ध कराना अनिवार्य: अदालत ने रेखांकित किया कि विश्वविद्यालय ने जिस विशेष पर्यवेक्षक (Special Observer) की रिपोर्ट और जब्त सामग्री के आधार पर छात्र को दोषी माना, वह सामग्री कभी छात्र को सौंपी ही नहीं गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
- कथित मैलप्रैक्टिस और यूनिवर्सिटी की कार्रवाई
- याचिकाकर्ता डॉ. एनटीआर यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (Dr. NTR University of Health Sciences) का एक मेडिकल छात्र है, जो 4 दिसंबर 2025 को ‘ह्यूमन एनाटॉमी-II’ (Human Anatomy-II) की एमबीबीएस पूरक परीक्षा में शामिल हुआ था।
- परीक्षा के दौरान उस पर प्रतिबंधित सामग्री ले जाने का आरोप लगा और कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
- 10 फरवरी 2026 को विश्वविद्यालय ने एक आदेश पारित कर छात्र को दिसंबर 2025 की परीक्षा रद्द करने के साथ-साथ एक साल के लिए सभी यूनिवर्सिटी परीक्षाओं में बैठने से अयोग्य (Disqualified) घोषित कर दिया।
- छात्र के वकील की दलीलें
- छात्र ने अधिवक्ता डब्ल्यू. वी. बी. श्रवण के माध्यम से हाई कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी।
- दलील दी गई कि विश्वविद्यालय ने जिस रिपोर्ट और कथित कागजात के आधार पर कार्रवाई की, उनकी प्रतियां छात्र को कभी नहीं दी गईं। इसके अलावा, विश्वविद्यालय यह साबित करने में विफल रहा कि जब्त की गई सामग्री का प्रश्नपत्र से कोई सीधा संबंध था या नहीं।
- विश्वविद्यालय का पक्ष
- यूनिवर्सिटी ने तर्क दिया कि छात्र के पास से डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) प्रश्न से संबंधित प्रतिबंधित सामग्री जेबों और कपड़ों से मिली थी और उसने निरीक्षण के दौरान अपनी गलती मानी थी। उस पर साथी छात्र से उत्तर लिखकर मांगने का आरोप भी था।
हाई कोर्ट का फैसला और निर्देश
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने पाया कि विश्वविद्यालय की प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करती है।
- आदेश रद्द (Order Set Aside): अदालत ने विश्वविद्यालय के 10 फरवरी 2026 के प्रतिबंधात्मक आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया।
- ताजा सुनवाई का निर्देश: यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया गया कि वह छात्र को कारण बताओ नोटिस के साथ सभी संबंधित साक्ष्य (जब्त सामग्री और ऑब्जर्वर रिपोर्ट) उपलब्ध कराए और उसे अपना पक्ष रखने का निष्पक्ष अवसर देकर नए सिरे से विचार करे।
- अगस्त 2026 परीक्षा में शामिल होने की अनुमति: कोर्ट ने विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि छात्र को अगस्त 2026 की आगामी परीक्षाओं के लिए परीक्षा शुल्क जमा करने की अनुमति दी जाए, जो नई कार्यवाही के अंतिम परिणाम के अधीन होगी।

