केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण (अगस्त 2026) |
| माननीय पीठ | कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे एवं न्यायमूर्ति गौतम आंखड़ (बॉम्बे हाई कोर्ट) |
| याचिकाकर्ता | यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (McDowell’s) एवं मोहन मीकिन लिमिटेड (Old Monk) |
| उत्तरदाता | FSSAI (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) |
| संबंधित कानून | FSS Act, 2006 (धारा 33, 34, 36) एवं Alcoholic Beverages Regulations, 2018 |
| मुख्य कानूनी मुद्दा | क्या FSSAI का नामित अधिकारी बिना अदालत के आदेश या स्वास्थ्य खतरे के सीधे उत्पाद के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगा सकता है? |
| अगली सुनवाई | 10 अगस्त 2026 (अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के पक्ष रखने के लिए) |
Liquor Sale: खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा मैक्डॉवेल्स नं. 1 (McDowell’s No. 1 Celebration Matured Rum) और ओल्ड मोंक (Old Monk) के नए स्टॉक के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने के बाद, इनकी निर्माता कंपनियों ने एफएसएसएआई के इस आदेश की वैधता को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायामूर्ति गौतम आंखड़ की खंडपीठ ने ‘यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड’ (United Spirits Limited – मैक्डॉवेल्स की निर्माता) और ‘मोहन मीकिन लिमिटेड’ (Mohan Meakin Limited – ओल्ड मोंक की निर्माता) द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की है।
अदालत ने टिप्पणी की कि ‘रातों-रात सब कुछ बंद नहीं किया जा सकता’, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि वह दोनों पक्षों को सुने बिना इस विशेषज्ञ विषय पर कोई निर्णय नहीं लेगी। पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) की उपस्थिति के लिए मामले की सुनवाई सोमवार (10 अगस्त 2026) तक के लिए स्थगित कर दी।
याचिकाकर्ताओं (शराब निर्माताओं) के मुख्य तर्क
- रातों-रात री-लेबलिंग (Relabelling) असंभव
- यूनाइटेड स्पिरिट्स की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. बीरेंद्र सराफ ने दलील दी कि FSSAI ने नए स्टॉक के निर्माण पर रोक लगा दी है और मौजूदा स्टॉक को केवल “Rum Flavoured Spirit” के रूप में री-लेबल करके बेचने की सशर्त अनुमति दी है।
- उन्होंने तर्क दिया कि मौजूदा लेबल हटाकर और राज्य आबकारी विभाग (State Excise Department) से नए लेबल की मंजूरी लेकर रातों-रात री-लेबलिंग करना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
- उत्पाद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक या असुरक्षित नहीं
- याचिकाओं में कहा गया है कि एफएसएसएआई के फूड एनालिस्ट (Food Analyst) ने अपनी रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं कहा है कि यह उत्पाद मानव उपभोग के लिए असुरक्षित है या इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य को कोई खतरा है।
- उत्पाद ‘खाद्य सुरक्षा और मानक (अल्कोहलिक पेय) विनियम, 2018’ के सभी मानकों का अनुपालन करता है।
- अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) पर सवाल
- याचिका में तर्क दिया गया है कि FSS Act की धारा 36(3)(b) (जो केवल नामित अधिकारी के कार्यों को सूचीबद्ध करती है) को निर्माण/बिक्री रोकने की स्वतंत्र शक्ति के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
- कानून के तहत प्रतिबंध आदेश केवल धारा 33 (सक्षम अदालत द्वारा) या धारा 34 (स्वास्थ्य जोखिम की स्थिति में फूड सेफ्टी कमिश्नर द्वारा) के तहत ही जारी किए जा सकते हैं। FSSAI के अधिकारी ने इनमें से किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
- उद्योग स्तर पर विचार-विमर्श के दौरान मनमाना प्रतिबंध
- FSSAI ने खुद 14 जुलाई 2026 को इन्हीं मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए उद्योग-व्यापी हितधारकों (Industry Stakeholders) की बैठक बुलाई थी। जो नियम खुद परामर्श और विचार-विमर्श के अधीन थे, उन्हें अंतिम मानकर कंपनियों पर दंडात्मक प्रतिबंध लगाना पूरी तरह से मनमाना है।
मामला क्या था? (Case Background)
- निरीक्षण और प्रतिबंध आदेश: FSSAI के पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय के नामित अधिकारी ने बारामती (पुणे) स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का निरीक्षण करने के बाद 29 जून को ‘प्रतिबंध आदेश’ और 27 जुलाई को ‘सशर्त प्रतिबंध आदेश’ जारी किया था।
- आरोप: FSSAI ने दावा किया था कि उत्पाद के लेबल पर भ्रामक जानकारी (Misleading Labelling), घटिया संरचना (Substandard Composition) और अनधिकृत फ्लेवरिंग एजेंट्स (Artificial Flavours) का इस्तेमाल पाया गया है।
- वर्तमान स्थिति: FSSAI ने मौजूदा स्टॉक को “रग फ्लेवर्ड स्पिरिट” का स्टिकर लगाकर बेचने की सशर्त अनुमति दी है, लेकिन नए स्टॉक के निर्माण पर रोक जारी रखी है, जिसे रद्द करने की मांग को लेकर कंपनियां हाई कोर्ट पहुंची हैं।

