केस एवं प्रक्रियात्मक सारांश (Case Matrix Overview)
| विधिक/प्रशासनिक बिंदु | विवरण |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी एवं न्यायमूर्ति आरती साठे (बॉम्बे उच्च न्यायालय) |
| पक्षकार | आयकर विभाग (राजस्व) बनाम औरम ग्रुप (Aurum Group) |
| संबंधित कानून | Income Tax Act, 1961 – Section 132 (Search & Seizure), Section 153A |
| नजीर/फैसला आधार | Supreme Court ruling in PCIT v. Abhisar Buildwell (P.) Ltd. |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | पूरा हो चुके असेसमेंट में सर्च के बाद एडिशन केवल तभी संभव हैं जब सर्च में कोई आपत्तिजनक सामग्री (Incriminating Material) मिले। नियमित खाता-बही के आधार पर एडिशन अवैध हैं। |
| अदालत का निर्णय | आयकर विभाग की दोनों अपीलें खारिज; ITAT का निर्णय बरकरार। |
Income Tax Department: बॉम्बे हाईकोर्ट ने आयकर विभाग (Income Tax Department) द्वारा दायर दो अपीलों को खारिज करते हुए आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें एक कंपनी के पूरा हो चुके आकलन (Completed Assessment) में की गई अतिरिक्त आय गणना (Additions) को रद्द कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति आरती साठे की पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले में कोई भी ‘कानून का सारवान प्रश्न’ (Substantial Question of Law) उत्पन्न नहीं होता है। अदालत ने पाया कि आयकर विभाग ने ये एडिशन छापेमारी (Search) के दौरान जब्त सामग्री के बजाय कंपनी के नियमित खाता बही (Regular Books of Account) के आधार पर किए थे, जो कानूनन अमान्य है।
हाई कोर्ट की मुख्य व महत्वपूर्ण टिप्पणियां
- अभिषार बिल्डवेल (Abhisar Buildwell) फैसले का हवाला: अदालत ने माना कि यह मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय ‘Principal Commissioner of Income Tax, Central-3 v. Abhisar Buildwell (P.) Ltd.’ द्वारा पूरी तरह से निर्धारित है। settled position के अनुसार, यदि कोई असेसमेंट सर्च से पहले ही पूरा हो चुका है, तो केवल सर्च के दौरान मिली आपत्तिजनक सामग्री (Incriminating Material) के आधार पर ही एडिशन किए जा सकते हैं, नियमित खातों के आधार पर नहीं।
- ट्रिब्यूनल का निष्कर्ष सही: हाई कोर्ट ने ITAT के उस निष्कर्ष से सहमति जताई कि आकलन अधिकारी (Assessing Officer) ने जिन दस्तावेजों (जैसे बोर्ड प्रस्ताव, समझौते और पत्राचार) का हवाला दिया था, वे कंपनी के नियमित बही-खातों का ही हिस्सा थे, न कि छापेमारी में मिली कोई नई आपत्तिजनक सामग्री।
मामला क्या था? (Case Background)
- औरम ग्रुप (Aurum Group) पर सर्च: आयकर विभाग ने रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े औरम ग्रुप पर धारा 132 के तहत छापेमारी (Search Operation) की थी।
- आयकर विभाग (AO) की कार्रवाई
- असेसिंग ऑफिसर ने सर्च के बाद कंपनी द्वारा फ्लैटों की बिक्री से प्राप्त आय को ‘कैपिटल गेंस’ (Capital Gains) के बजाय ‘बिजनेस इनकम’ (Business Income) मानकर टैक्स बढ़ा दिया।
- इसके अलावा, कंपनी द्वारा बिजनेस एक्सपेंस के रूप में क्लेम किए गए ब्याज (Interest Expense) को भी अमान्य (Disallow) कर दिया।
- ITAT का आदेश: कंपनी ने ITAT में अपील की। ITAT ने दोनों एडिशन्स को यह कहते हुए रद्द (Delete) कर दिया कि सर्च से पहले ही असेसमेंट फाइनल हो चुका था और सर्च के दौरान ऐसा कोई इंक्रीमिनेटिंग मटेरियल (Incriminating Material) नहीं मिला जो इन एडिशन्स को जायज ठहरा सके।
- हाई कोर्ट में विभाग का तर्क: राजस्व विभाग ने तर्क दिया कि सर्च के दौरान मिले बोर्ड रेजोल्यूशन और एग्रीमेंट्स से यह स्पष्ट होता है कि कंपनी का इरादा फ्लैट बेचने का कारोबार करने का था, इसलिए इसे बिजनेस इनकम मानना सही था। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
⚖️ बॉम्बे हाई कोर्ट का अंतिम फैसला
बॉम्बे हाई कोर्ट ने आयकर विभाग की दोनों अपीलों को खारिज करते हुए निर्णय सुनाया कि आईटीएटी का आदेश स्थापित कानूनी सिद्धांतों के पूरी तरह अनुरूप है। सर्च के दौरान अगर कोई नई आपत्तिजनक सामग्री नहीं मिलती है, तो पुराने व पूरा हो चुके असेसमेंट को नियमित खातों के आधार पर दोबारा खोलकर अतिरिक्त टैक्स की मांग नहीं की जा सकती।

